देश के हर राज्य में लाखों कर्मचारी हड़ताल के मूड में
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। देश में लाखों श्रमिक हड़ताल करने के मूड में हैं। इनमें कोयला,बंदरगाह, रक्षा उत्पादन इकाइयों और रेल में काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं। बैंकों में 2 से 5 दिसम्बर तक अलग-अलग शहरों में हड़ताल की तैयारी पूरी भी की जा चुकी है। बैंक कर्मचारी वेतन वृद्धि को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।

कोयला मजदूर लड़ाई के मूड में
उधर,कोयला श्रमिक के संगठनों ने दिल्ली में दूसरे संगठनों को कहा है कि वे कोयले का उत्पादन ठप करने पर विचार कर रहे हैं, वहीं बंदरगाह पर काम करने वाले 50 हजार श्रमिकों के संगठन कह रहे हैं कि वे माल का लदान और उसका उतारना बंद कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप
जानकार मानते हैं कि इन हालातों में प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बिना बात बनने से रही। आरएसएस के संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने सभी राजनीतिक दलों के संगठनों को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार के खिलाफ 5 दिसम्बर का विरोध प्रदर्शन कमजोर नहीं रहना चाहिए।
श्रमिक विरोधी सरकार
इंटक के अध्यक्ष संजीवा रेड्डी कहते हैं कि सरकार के श्रमिक विरोधी चेहरे को जनता के बीच मिलकर उजागर किया जाएगा। एटक के नेता गुरुदास दास गुप्ता और सीटू के नेता तपन सेन का कहना है कि सड़क पर ही नहीं, संसद में भी श्रमिकों की आवाज बुलंद की जाएगी।
किस बात का विरोध
जानकारी के अनुसार, ये श्रमिक एफडीआई, विनिवेश और सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल पर जाना चाहते हैं। इस बार की हड़ताल बड़ी हो सकती है, क्योंकि सभी राजनीतिक दलों के मजदूर संगठन एक साथ हैं। इसके बड़े रहने की यह भी वजह हो सकती है क्योंकि इसमें कई क्षेत्रों के श्रमिक शामिल हो गए हैं।
खास होगा 11 दिसंबर
जानकारी के अनुसार,11 दिसम्बर को हड़ताल की तारीख तय करने के लिए सारे मजदूर फेडरेशन की बड़ी बैठक दिल्ली में रखी गई है। नए श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की मजदूर संगठनों के साथ पहले दौर की बातचीत फेल हो गई है।












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