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Lok Sabha Election 2024: लद्दाख में बदल गया समीकरण! बीजेपी के लिए तीसरी बार जीत क्यों बनी चुनौती?

Ladakh Lok Sabha Election 2024: बीजेपी 2014 में लद्दाख लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने उतरी और लगातार दो बार जीत दर्ज की। पार्टी ने 2019 में भी तत्कालीन सांसद की जगह नए और युवा प्रत्याशी को मौका दिया। 2024 में भी मौजूदा और चर्चित सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल की जगह ताशी ग्यालसन पर दांव लगाया गया है। लेकिन, फिर भी अभी तक बीजेपी के लिए समीकरण सटीक नहीं नजर आ रहा है।

इस सीट पर इंडिया ब्लॉक की ओर से कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, जिसे नेशनल कांफ्रेंस का समर्थन हासिल है। कांग्रेस ने लद्दाख से इस बार हाजी हनीफ जान को मौका दिया है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक कारगिल और लेह जिलों में लोगों की नाराजगी की वजह से हनीफ जान बीजेपी के लिए अबकी बार कड़ी चुनौती बन सकते हैं।

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लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करना है मुद्दा
भाजपा ने इस बार ताशी ग्यालसन को टिकट दिया है, जो एक वकील हैं और बीजेपी की अगुवाई वाली लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल-लेह (LAHDC-Leh) के प्रमुख भी।

इस साल की शुरुआत से लद्दाख के कुछ मुस्लिम और बौद्ध संगठन लेह और कारगिल लोकतांत्रिक गठबंधन के नाम एक बड़ी संस्था के तहत इसे राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार से नहीं बन पाई है बात
इन संगठनों का दावा है कि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए खत्म किए जाने के बाद बीजेपी नेतृत्व ने इन मांगों पर सहमति जताई थी। अब ये संगठन लद्दाख में दिल्ली और पुडुचेरी की तरह से विधानसभा की मांग कर रहे है। लेकिन, केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के साथ इसका कोई हल नहीं निकल पाया है।

क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट बिगाड़ सकते हैं बीजेपी गेम!
इनके नेता क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक मार्च में अपने समर्थकों के साथ 21 दिनों की भूख हड़ताल करके दिल्ली को संदेश दे चुके हैं। हालांकि, भाजपा उम्मीदवार ताशी ग्यालसन को लेकर माना जा रहा है कि जमीनी एंटी इंकंबेंसी फैक्टर को देखते हुए, वह भाजपा की तरफ से काफी बेहतर दांव हैं।

ताशी ग्यालसन माने जा रहे हैं बीजेपी के बेहतर दांव
2020 में हुए LAHDC-Leh चुनाव बीजेपी 26 में से 15 सीटें जीती थी और ग्यालसन इसके चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर चुने गए थे। ये उस ज्वाइंट-सब-कमेटी के सदस्य के तौर पर भी नामित हो चुके हैं, जो राज्य का दर्जा देने, छठी अनुसूची में शामिल करने समेत लद्दाख की अन्य मांगों को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत कर रही है।

लद्दाख के लोगों का मोहभंग हुआ है- वांगचुक
वांगचुक का सवाल है कि 'कई बैठकों के बाद सरकार अपने वादों से पीछे हट गई और अब यह संविधान में जो पहले से है, उसी के बहुत ही मामूली प्रावधानों को लेकर बात कर रही है। तो उन्होंने अपना मन क्यों बदल लिया।' उनका कहना है, 'जब लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया तो लोगों ने उसपर खुशी मनाई। लेकिन अब उनका मोहभंग हुआ है और उन्हें लगता है कि उन्हें हल्के में लिया गया है।'

लद्दाख और जम्मू और कश्मीर बने हैं दो केंद्र शासित प्रदेश
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत जम्मू और कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। इसमें पहले के लिए विधनसभा का प्रावधान है। लेकिन, लद्दाख में लक्षद्वीप की तरह विधानसभा की व्यवस्था नहीं है। जम्मू और कश्मीर फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात कई बार सामने आ चुकी है।

ऐसे में बीजेपी के लिए इस बार लद्दाख की चुनौती कठिन भी और दिलचस्प भी। क्योंकि, 370 हटने से पहले वह लगातार दो बार यहां जीत चुकी है। लद्दाख में 20 मई को पांचवें चरण में चुनाव है, जहां कुल 1,82,570 वोटर हैं, जिनमें 90,867 महिलाएं हैं। ये यहां के कुल 577 मतदान केंद्रों पर वोट डालेंगे।

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