लद्दाख: चीन की चालबाजी बरकरार, हर स्थिति से निपटने की लिए सेना है तैयार

नई दिल्ली- पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी से चीनी सेना भले ही थोड़ी पीछे हट गई हो, लेकिन इलाके के दूसरी जगहों पर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की हरकतें देखकर उसके इरादे नेक नहीं लग रहे। चाइनीज सेना की गतिविधियों और उसके इतिहास को देखकर कहना मुश्किल हो चुका है कि वह कब और किस तरह से अपना पैंतरा बदल दे। यही वजह है कि भारतीय सेना अब लद्दाख में लंबी लड़ाई के लिए कमर कस चुकी है। चीन ने हाल में तनाव वाले इलाके में जिस तरह अपना सैन्य जमावड़ा बढ़ा लिया है, उसका हर माकूल जवाब देने के लिए भारतीय सेना भी तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि सर्दियों की मौसम में भी ड्रैगन का सिर कुचलने के लिए भारतीय सेना को वहां 40 से 50 हजार जवानों की तैनाती की जरूरत पड़ सकती है।

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    China को चालबाजी पड़ेगी भारी, LAC पर Indian Army हर स्थिति से निपटने को तैयार | वनइंडिया हिंदी
    एलएसी पर चीन की नापाक हरकतें बरकरार

    एलएसी पर चीन की नापाक हरकतें बरकरार

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना कुछ इलाकों में एलएसी पर अभी भी उस तरह पेट्रोलिंग नहीं कर पा रही है, जैसे पहले करती थी। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह अस्थाई स्थिति है, क्योंकि सेनाओं का जमावड़ा कम करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया जारी है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों को लगता है कि अगर हालात इसी तरह बरकरार रहे तो यथास्थिति पर असर पड़ सकता है। मेजर जनरल अशोक मेहता (रि) के मुताबिक, 'चाइनीज कमोवेश उस स्थानों पर डटे ही हुए हैं, जहां पर वो फायदेमंद स्थिति में हैं। गलवान में उन्होंने एलएसी को 1 किलोमीटर पश्चिम खिसकाना सुनिश्चित कर लिया।' हालांकि नेशनल सेक्युरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य और लेफ्टिनेंट जनरल (रि) एसएल नरसिम्हन ने इन दावों को जोरदार तरीके से खारिज किया है कि एलएसी भारतीय क्षेत्र के 1 किलोमीटर अंदर है। उन्होंने ये भी कहा है कि गलत तरीके से ऐसी धारणा बनाई गई है। पेट्रोलिंग रुकने के बारे में उनका कहना है कि, 'ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के दौरान हालात और न बिगड़े, जैसा कि 15 जून को हुआ था। '

    माइनस 25 डिग्री तापमान झलने के लिए तैयार रहना होगा

    माइनस 25 डिग्री तापमान झलने के लिए तैयार रहना होगा

    इस बीच एलएसी के पास भारतीय सेना की मौजूदगी भी लगातर बढ़ रही है। भारतीय सेना ने अभी से जाड़ों के मौसम के मुताबिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसा चीन के जवाब में किया जा रहा है, जो एक तरफ तो बातचीत कर रहा है, दूसरी तरफ एलएसी के उसपार सैनिकों को कम करने के बजाय अपनी तैयारियां और पुख्ता करता चल रहा है। भारत के लिए यह जरूरी है कि आने वाले मौसम में माइनस 25 डिग्री तापमान के मद्दनजर अपनी तैयारियां पूरी रखे। इसके लिए 45,000 से 50,000 सैनिकों की आवश्यकता होगी। क्योंकि, ज्यादातर तनाव वाले इलाके 14,000 फीट से ज्यादा ऊंचाइयों पर हैं, इसलिए योजना भी उसी के मुताबिक रखी जा रही है।

    पैंगोंग लेक के पास चीन बढ़ा रहा है अपनी ताकत

    पैंगोंग लेक के पास चीन बढ़ा रहा है अपनी ताकत

    पैंगोंग लेक और हॉट स्प्रिंग-गोगरा इलाके स्थिति अभी भी विस्फोटक बनी हुई है। यहां चीन की बदमाशी ये है कि वह झील के किनारे फिंगर 4 से फिंगर 5 की ओर तो खिसक चुका है, लेकिन चोटियों पर अभी भी मौजूद है। जबकि, भारतीय सेना झील के किनारे के फिंगर 3 और फिंगर 2 के बीच मौजूद है। सूत्रों के अनुसार यही नहीं चीनी सेना ने फिंगर 8 से फिंगर 4 के बीच जो स्ट्रक्चर खड़े किए थे, उसके हटाने भी कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। कॉर्प्स कमांडर लेवल की 14 जुलाई को हुई बातचीत के 10 दिन बाद भी यहां हालात में कोई बदलाव नहीं आया। सच्चाई तो यह है कि वह फिंगर 5 और 8 के बीच अपनी ताकत लगातार बढ़ाता ही जा रहा है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के एक्सपर्ट कर्नल विनायक भट्ट (रि) के मुताबिक, 'यह चिंताजनक है, क्योंकि हम आर्टिलरी पोजिशन, एयर डिफेंस पोजिशन हैं, सिग्नल और इंजीनियर स्टोर भी देख रहे हैं। एक छोटा सा अस्पताल भी दिख रहा है। पीएलए ग्राउंड फोर्स की नेवल यूनिट भी फिंगर 5 तक आ चुकी है।' इस इलाके में कुल मिलाकर 10 से 20 हजार जवानों का जमावड़ा हो सकता है।

    गलवान में दोंनों सेनाओं के बीच करीब 3 किलोमीटर की दूरी

    गलवान में दोंनों सेनाओं के बीच करीब 3 किलोमीटर की दूरी

    पैंगोंग लेक के अलावा हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा इलाके में भी तनाव बरकरार है। यहां करीब 600 से 800 मीटर के फासले पर 40-50 जवान डटे हुए हैं। अलबत्ता गलवान वैली में पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर चीनी सेना जरूर एलएसी से 1.5 किलोमीटर भीतर धकेली जा चुका है और यहां दोनों सेनाओं के बीच की दूरी 3 किलोमीटर है। 15 जून की रात यहीं हिंसक झड़प हुई थी, जहां 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे और चीन ने आजतक मारे गए अपने आर्मी अफसरों और जवानों की सही संख्या नहीं बताई है। वैसे यहां भी डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी तरह से संपन्न नहीं हुई है, लेकिन दोनों सेना इतनी दूर पर हैं कि 15 जून जैसे हालात बनने की आशंका कम से कम यहां पर अभी नहीं है। एक और विवाद के इलाके पीपी 15 में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी हुई लगती है और भारत और चीन की सेनाएं यहां 8 से 10 किलोमीटर एक-दूसरे से दूर हो चुकी हैं।

    कम समय में हर जवाबी कार्रवाई के लिए सेना तैयार

    कम समय में हर जवाबी कार्रवाई के लिए सेना तैयार

    चीन की हरकतों की वजह से ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना को कम समय में किसी भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर सेना किस तरह का ऐक्शन लेगी, इसके तमाम विकल्पों पर चर्चा हुई है। कुल मिलाकर चीन की मंशा को भांपते हुए भारतीय सेना ने लंबे संघर्ष की तैयारी कर ली है, ताकि ड्रैगन को उसकी किसी भी नापाक हरकत का समय रहते माकूल जवाब दिया जा सके।

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