पीएम मोदी के ऐसे मंत्री जिनके माता-पिता आज भी करते हैं मजदूरी, लाइन में लगकर लेते हैं राशन
चेन्नई, 18 जुलाई: केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक ऐसे मंत्री भी हैं, जिनके माता-पिता आज भी दूसरे के खेतों में काम करके अपना गुजारा करते हैं। दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। बेटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री बन गया है, लेकिन उनके बुजुर्ग मां-बाप आज भी बेटे के ओहदे के भरोसे अपना जीवन नहीं जीते, बल्कि अपनी हाथ की ताकत और हौसले के दम पर दो जून की रोटी जुटाने में यकीन करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि बेटे के साथ उनका किसी तरह से कोई खटपट है। उन्हें अपने बेटे की कामयाबी पर उतना ही गर्व है, जितना ऐसे किसी भी माता-पिता को होगा। लेकिन, उन्हें मेहनत का काम करने में बुरा नहीं लगता। वह स्वाभिमान के साथ मजदूरी करके न सिर्फ अपना जीवन जी रहे हैं, बल्कि एक विधवा बहू और उनके बच्चों की भी जिम्मेदारी उठा रहे हैं। (एल मुरुगन के माता-पिता की तस्वीर टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार से ली गई है)

मोदी के ऐसे मंत्री जिनके माता-पिता आज भी करते हैं दिहाड़ी
आजादी के बाद से अपना देश न जाने कितने ऐसे मंत्रियों को देख चुका है, जिनके परिवार वाले जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों पर ऐशो आराम करना अपना अधिकार समझ लेते हैं। लेकिन, दिल्ली से करीब 2,400 किलोमीटर दूर तमिलनाडु में एक ऐसा गांव है, जहां मोदी सरकार में मंत्री एल मुरुगन के माता-पिता आज भी दिहाड़ी की कमाई के सहारे अपने बुजुर्ग हो चुके शरीर को गतिशील बनाए हुए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 59 साल की उनकी मां एल वरुदाम्मल और 68 वर्षीय पिता लोगानाथन को अपने बेटे के मोदी सरकार में मंत्री बनने की जानकारी है, लेकिन वो जश्न में डूबकर वक्त गंवाने की जगह खेतों में अपने रोजाना के काम में पहले की तरह ही लगे हुए हैं। यह बुजुर्ग दंपति अपने बेटे के भरोसे रहने की बजाय अपने खून-पसीने की कमाई से ही दोनों वक्त की रोटी खाना पसंद करते हैं।

'अगर मेरा बेटा मंत्री बन जाए तो मुझे क्या करना चाहिए'
एल मुरुगन के माता-पिता तमिलनाडु के नमक्कल जिल के छोटे से गांव कोनूर में रहते हैं। इन दिनों वरुदाम्मल खरबूजा तोड़ने और झाड़ियों को साफ करने में लगी रहती हैं तो उनके पति फावड़े से जमीन को समतल करने के काम में जुटे हुए हैं। वरुदाम्मल से जब उनके बेटे के मंत्री बनने की बात कही गई तो वो हिचकिचाते हुए बोलीं, 'अगर मेरा बेटा मंत्री बन जाए तो मुझे क्या करना चाहिए।' दिल छू लेन वाली बात ये है कि इस मां को अपने बेटे के मोदी सरकार में मंत्री बनने का गर्व तो है, लेकिन वह इसका कोई श्रेय नहीं लेना चाहतीं- 'हमने उसकी तरक्की में कुछ नहीं किया है।'

बेटे पर गर्व है, लेकिन उसकी शोहरत पर घमंड नहीं
मुरुगन के माता-पिता अरुनथाथियार समुदाय से आते हैं, जो कि एक दलित जाति है। उनका परिवार एस्बेस्टस की छत वाले छोटे से घर में रहता है। बेटा मंत्री है, लेकिन उन्हें कुली और दिहाड़ी के काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। पिछले सात जुलाई को जब उन्हें उनके बेटे के मंत्री बनने की खबर मिली तो भी उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा और खेतों में उसी तरह काम करते रहे। ऐसा नहीं है कि मुरुगन की शोहरत अचानक इतनी ऊंचाई पर पहुंची है। मंत्री बनने से पहले पिछले साल मार्च में बीजेपी ने उन्हें तमिलनाडु का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद वो अपने काफिले के साथ माता-पिता से मिलने अपने गांव पहुंचे थे। लेकिन, वो उनसे उसी तरह से मिले जैसे हमेशा मिलते हैं। उनकी बढ़ी हुई शोहरत का उनके बेटे से रिश्ते पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

मुरुगन के साथ क्यों नहीं रहते माता-पिता ?
डॉक्टर एल मुरुगन के पिता लोगानाथन कहते हैं कि उनके बेटे बचपन से ही मेधावी थे। उन्हें कॉलेज में दाखिला कराने के लिए उन्हें दोस्तों और जानने वालों से उधार लेने पड़े थे। मुरुगन ने हमेशा अपने माता-पिता से कहा कि वो उनके साथ चेन्नई में ही रहें। उन्होंने बताया, 'हम जाते थे और उनके साथ चार दिन रहते थे। लेकिन, हम उनकी व्यस्त जीवन शैली में फिट नहीं हो सके और हमने वापस लौटना पसंद किया।'

मंत्री के पिता कतार में लगकर लेते हैं राशन
पांच साल से लोगानाथन दंपति अपनी छोटी बहू और उनके बच्चों को भी अपने साथ ही रखते हैं और वही उनकी भी देखभाल करते हैं। यह तबसे है जब मुरुगन के छोटे भाई की मौत हो गई थी। एक स्थानीय गांव वाले वासु श्रीनिवासन ने कहा कि पिछले दिनों जब राज्य सरकार की ओर से कोविड राहत बांटी जा रही थी तो लोगानाथन भी स्थानीय राशन की दुकान पर कतार में लगे थे। 'हमने उनसे कतार छोड़ने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।' उनके मुताबिक बुजुर्ग दंपति के पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी नहीं है।

कौन हैं एल मुरुगन ?
डॉक्टर एल मुरुगन पहले तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। मोदी मंत्रिपरिषद के विस्तार के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया है। इस समय उनके पास सूचना और प्रसारण मंत्रालय, मत्स्य, पशुपाल और डेयरी मंत्रालय का जिम्मा है।











Click it and Unblock the Notifications