नितिन नबीन बनेंगे BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष? सियासी प्लान आया सामने, मोदी-शाह की पसंद पर क्या RSS करेगा भरोसा?
BJP President Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हलचल तेज है। नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या वही पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। पार्टी के भीतर से आ रही सूचनाएं इशारा कर रही हैं कि मकर संक्रांति के बाद औपचारिक प्रक्रिया शुरू होते ही तस्वीर और साफ हो जाएगी। संकेत यह भी हैं कि नितिन नबीन के नाम पर पार्टी हाईकमान की सहमति के साथ संघ (RSS) की भी मुहर लग सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक मोदी-शाह की पसंद नितिन नबीन को RSS की भी सहमति मिल जाएगी। 14 दिसंबर 2025 को बीजेपी संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया। 2020 से पार्टी की कमान संभाल रहे जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 में पूरा हो चुका था और वह विस्तार पर थे।

अब ऐसे इनपुट है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया उत्तरायण के बाद शुरू होगी। पार्टी संविधान के मुताबिक इसमें करीब 22 दिन लगते हैं। इसके बाद नेशनल काउंसिल की बैठक बुलाई जाएगी, संभव है कि यह दिल्ली में हो, जहां अंतिम मुहर लगेगी।
क्यों भाजपा का युवा चेहरे पर दांव?
45 साल की उम्र में नितिन नबीन का आगे आना महज संयोग नहीं माना जा रहा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह फैसला प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा है। सोच यह है कि आने वाले 25 सालों के लिए आज से ही युवा नेतृत्व तैयार किया जाए ताकि 2047 में पार्टी के पास परिपक्व और अनुभवी कमान हो। नितिन नबीन 2047 में 67 वर्ष के होंगे, यानी नेतृत्व के लिए आदर्श उम्र।
नितिन नबीन अकेला नाम नहीं हैं। बीजेपी ने राज्यों में भी युवाओं को अहम जिम्मेदारियां दी हैं। छत्तीसगढ़ में विजय शर्मा और गुजरात में हर्ष सांघवी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि 50 के आसपास उम्र वाले 8 से 10 नेताओं की एक सूची तैयार की गई थी, जिनमें उपमुख्यमंत्री, युवा सांसद और संगठन में सक्रिय चेहरे शामिल थे।

मोदी-शाह की पसंद नितिन नबीन पर RSS क्यों हो सकता है राजी?
बीजेपी के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद हमेशा से बहुत अहम रहा है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल और फिर 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है। बीजेपी में अध्यक्ष के चुनाव कभी वोटिंग से नहीं होते। परंपरा यही रही है कि पार्टी और आरएसएस आपसी बातचीत और सहमति से नाम तय करते हैं, ताकि संगठन में किसी तरह का टकराव न हो।
अब नितिन नबीन को स्थायी अध्यक्ष बनाने की चर्चा तेज है। माना जाता है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष आमतौर पर संघ का भरोसेमंद होता है। नितिन नबीन को भले ही संघ का बेहद करीबी चेहरा न माना जाए, लेकिन यह भी सच है कि मौजूदा दौर में नजदीकी की परिभाषा बदल चुकी है। आज का समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भरोसेमंद नेताओं का माना जाता है। नितिन नबीन का राजनीतिक करियर अब तक विवादों से दूर रहा है, यही बात पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पसंद आई है।
पिछले करीब डेढ़ साल से भाजपा और संघ के बीच नए अध्यक्ष को लेकर खींचतान चल रही थी। ऐसे में अचानक नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से कई लोग चौंक गए। उनका नाम पहले चर्चा में नहीं था, लेकिन अंदरखाने माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में वही राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नितिन नबीन का संघ परिवार से पुराना रिश्ता रहा है। उनके पिता भाजपा के शुरुआती नेताओं में रहे और परिवार दो पीढ़ियों से विचारधारा से जुड़ा हुआ है। इसी वैचारिक जुड़ाव और युवा चेहरे की जरूरत ने मोदी-शाह की पसंद पर आरएसएस की सहमति बनवाई है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे कराती है? (BJP President Election)
बीजेपी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 15 साल की सदस्यता जरूरी है। चुनाव पार्टी का निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य होते हैं।
किसी उम्मीदवार के नाम पर 20 सदस्य संयुक्त प्रस्ताव रख सकते हैं और यह प्रस्ताव कम से कम पांच ऐसे राज्यों से होना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव हो चुके हों। नामांकन पर उम्मीदवार की स्वीकृति अनिवार्य होती है।
BJP के कार्यकारी अध्यक्ष की सीमाएं क्या हैं?
BJP के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अभी पार्टी से जुड़े कोई बड़े फैसले नहीं ले सकते हैं। पार्टी सूत्र साफ करते हैं कि कार्यकारी अध्यक्ष अभी स्वतंत्र फैसले नहीं ले सकते। न वह टीम से किसी को हटा सकते हैं, न नया जोड़ सकते हैं। मौजूदा ढांचे के साथ चल रही योजनाओं की निगरानी, बैठकें और समन्वय ही उनकी भूमिका है। पुराने अध्यक्ष को भी कुछ समय मिलता है ताकि वह लंबित काम और फैसलों का ट्रांसफर कर सकें।

मोदी-शाह की पसंद कैसे बने नितिन नबीन!
पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिस दिन नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ, उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष एक साथ मौजूद थे। बताया जाता है कि फैसला सार्वजनिक होने से कुछ घंटे पहले ही नितिन नबीन को इसकी जानकारी दी गई। यहां तक कि कई वरिष्ठ नेताओं को भी औपचारिक पत्र जारी होने के बाद ही पता चला।
सभी संकेत यही बताते हैं कि पार्टी 2027 से पहले नेतृत्व को स्थिर और भविष्य के लिए तैयार करना चाहती है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो नितिन नबीन का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर औपचारिक रूप से सामने आ सकता है। अब नजरें मकर संक्रांति के बाद शुरू होने वाली प्रक्रिया और नेशनल काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं।
कौन हैं नितिन नबीन?
पटना के रहने वाले नितिन नबीन बीजेपी नेता नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं और कायस्थ समुदाय से आते हैं। 2006 में राजनीति शुरू की और बांकीपुर से पांच बार विधायक बने। युवा मोर्चा के अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। बिहार सरकार में शहरी विकास, आवास और पथ निर्माण जैसे विभाग संभाले। छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहे और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है।
नितिन नबीन ने 16 दिसंबर को बिहार सरकार के मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया। उनके पास पथ निर्माण और नगर विकास जैसे अहम विभाग थे। पार्टी में लंबे समय से 'एक व्यक्ति एक पद' का सिद्धांत लागू है, इसलिए यह कदम उठाया गया। 15 नवंबर को उन्होंने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभाला था।
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