Manipur Vivad: 'मेरिकॉम -चानू के राज्य में निर्वस्त्र महिला की परेड', जानिए क्यों जल रहा है मणिपुर?
Kya hai Manipur Vivad? : मणिपुर का नाम लेते ही आंखों के सामने प्रकृति की गोद में समाए उस राज्य की तस्वीर आती है, जिसने देश को मैरिकॉम और मीराबाई चानू जैसी बेटियां दी हैं, जिन्होंने विश्वस्तर पर भारत का सीना गर्व से चौड़ा किया है, उन्होंने अपने दम पर ना केवल देश को गौरवान्वित किया है, बल्कि विश्वपटल पर भारत को इतराने का मौका भी दिया है लेकिन आज वो ही मणिपुर सिसक रहा है, शर्मसार है और अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है।

वजह है वो वीडियो, जिसमें कुछ निर्दयी और बेशर्म लोग दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके सड़क पर परेड करवा रहे हैं। मानवता और इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना ने राज्य की मौजूदा स्थिति को तो बयां किया ही है, साथ ही वहां पर महिलाओं के प्रति क्या सोच और समझ है वो भी बता दिया है।
दो महिलाओं के साथ हुआ घिनौना बर्ताव
आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कुकी समुदाय की दो महिलाओं को पूरी तरह निर्वस्त्र करके मैतई समुदाय के लोग सड़क पर परेड करा रहे हैं। रोंगटे खड़ी कर देने वाली कांगपोकपी जिले की इस घटना के सामने आने के बाद पूरा देश गुस्से से उबल रहा है।
मणिपुर में आखिर बवाल का कारण क्या है?
सवाल ये है कि बीते दो महीने से हिंसा का शिकार और राजनीतिक दलों के बीच बहस का मुद्दा बने मणिपुर में आखिर बवाल का कारण क्या है? तो चलिए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
'मैतई', 'नगा' और 'कुकी समुदाय'
मणिपुर में तीन जनजातियों के लोग प्रमुखता से रहते हैं और ये जातियां हैं- 'मैतई', 'नगा' और 'कुकी समुदाय'। जिनमें सबसे ज्यादा आबादी मैतई की है और इसके बाद कुकी और नागा का नंबर आता है लेकिन सबसे ज्यादा संख्या वाले मैतई के पास राज्य में केवल दस फीसदी ही जमीन है।
आरक्षण को लेकर झगड़ा शुरू हुआ
जबकि बाकी पहाड़ी इलाकों में कुकी और नागा रहते हैं। ये झगड़ा शुरू हुआ है आरक्षण को लेकर, दरअसल मैतई वहां के अग्रणी लोग हैं, जबकि एसटी का दर्जा प्राप्त की गई बाकी दोनों जातियों को आरक्षण की वजह से काफी सुविधाएं मिली हुई हैं।
मैतई समुदाय को एसटी दर्जा देने पर विचार
मैतई भी लगातार अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं, करीब दो महीने पहले हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में मैतई समुदाय को एसटी दर्जा देने पर विचार करने की बात कही थी, जिसके बाद से यहां विरोध शुरू हो गया। कुकी-नागा को लगता है कि मैतई पहले से ही उनसे संख्या में बहुत ज्यादा है, ऐसे में अगर उन्हें आरक्षण मिला तो वो उन पर हावी हो जाएंगे, उनका जीना ही मुश्किल हो जाएगा इसलिए यहां पर विरोध हो रहा है।
'आदिवासी एकता मार्च' पर भड़की हिंसा
तीन मई को कुकी समुदाय की ओर से निकाले गए 'आदिवासी एकता मार्च' के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, तीन मई की शाम तक हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार को केंद्र से मदद मांगनी पड़ी थी जिसके बाद सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियों को वहां तैनात है। इस हिंसा में अब तक करीब 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों की संख्या में लोगों को घर छोड़कर दूसरे राज्य में शिफ्ट होना पड़ा है।












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