हरियाणा- 20 में से 22 अंक देकर असिस्टेंट प्रोफेसर बनाने का खेल
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या कभी आपने सुना है कि किसी को 20 में से 22 अंक मिल जाए? हरियाणा में सरस्वती के मंदिर में बेशर्मी और बेहयाई का ऐसा मंजर सामने आया है कि दोषियों के लिए सारी सजाएं हल्की साबित होंगी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर डा़. वंदना शर्मा की नियुक्ति के लिए ऐसा कारनामा हुआ है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कुलपति डॉ. डीडीएस संधू की अध्यक्षता वाली चयन समिति के 'विद्वानों' ने डा़ वंदना शर्मा को इंटरव्यू में 20 में से 22 अंक देकर असिस्टेंट प्रोफेसर बना दिया।
दिलचस्पी क्यों
अहम सवाल यह है कि डा़ वंदना शर्मा के चयन में कुलपति डॉ. डीडीएस संधू की इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों थी? दूसरा सवाल यह है कि चयन समिति के सदस्यों ने इस बेशर्मी का विरोध क्यों नहीं किया?
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क्या सभी सदस्यों की मिलीभगत थी? इतना तो तय है कि डा़ वंदना शर्मा के चयन के लिए कोई बड़ी राजनैतिक पैरवी होगी इसीलिए कुलपति डॉ. डीडीएस संधू समेत चयन समिति के सभी सदस्यों ने निर्लज्जता की सारी सीमाएं लांघ दी?
बड़ा 'आदमी'
डा़ वंदना शर्मा की कौन नेता या तथाकथित बड़ा 'आदमी' पैरवी कर रहा था, इसका खुलासा होगा तो कुछ और बेशर्मों के चेहरे बेनकाब होंगे। डॉ. डीडीएस संधू तो चाबी से चलने वाला मोहरा है।
जांच में यह पता लगाना जरूरी है कि मोहरे में चाबी कौन भर रहा था। हालांकि खट्टर सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन मोहरे में चाबी भरने वाले 'पराक्रमी पुरुष' का नाम सामने आने की उम्मीद कम है।
'हरिश्चंद्र के अवतारों'
वरिष्ठ पत्रकार उमेश जोशी कहते हैं कि मेरा अंदेशा बेबुनियाद इसलिए नहीं है कि इस सरकार में बैठे कुछ 'हरिश्चंद्र के अवतारों' ने भी कभी न कभी इस मोहरे में चाबी जरूर भरी होगी।













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