International Yoga Day: योग बढ़ा सकता है उम्र? बेंगलुरु के क्रिस्टु जयंती यूनिवर्सिटी में मिला फिट रहने के राज

International Yoga Day 2026: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले बेंगलुरु स्थित क्रिस्टु जयंती (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बेंगलुरु के क्रिस्टू जयंती विश्वविद्यालय में आने वाले 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। यूनिवर्सिटी ने श्री श्री स्कूल ऑफ योगा और 'द आर्ट ऑफ लिविंग' के साथ मिलकर एक योग और सेहत कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस साल के कार्यक्रम की थीम 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' रखी गई है। यूनिवर्सिटी कैंपस में सेंटर फॉर योग एंड वेलनेस और जयंतियन एक्सटेंशन सर्विसेज ने मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया।

Students practicing yoga at Kristu Jayanti College Bengaluru

इसमें छात्रों, शिक्षकों और योग एक्सपर्ट्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का मकसद था कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर और मन को कैसे तंदुरुस्त, एक्टिव और संतुलित रखा जाए।

बढ़ती उम्र में योग के फायदे और वैज्ञानिक पहलू

इस कार्यक्रम में श्री श्री स्कूल ऑफ योगा की सीईओ और डायरेक्टर वसंती एस. अय्यर और कॉर्पोरेट व सरकारी योग कार्यक्रम विभाग के हेड रुद्रेश कुमार सिंह मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे। एक्सपर्ट्स ने बताया कि योग सिर्फ एक शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह पूरी सेहत को ठीक रखने का एक विज्ञान है। आज की नई रिसर्च भी इस बात को मानती हैं।

एक्सपर्ट्स ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में बीमारियों से बचने और खुद को फिट रखने के लिए योग बहुत मददगार साबित होता है। यह शरीर का लचीलापन और बैलेंस सुधारता है, साथ ही मन को मजबूत और सकारात्मक बनाता है।

एक साथ योग का अभ्यास और युवाओं की भागीदारी

इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण एक साथ योग का अभ्यास करना रहा। इसमें सभी लोगों ने योग गुरुओं की देखरेख में आसान योग आसनों, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। इस दौरान जोर दिया गया कि योग केवल बुजुर्गों के लिए ही नहीं, बल्कि आज के युवाओं के लिए भी बेहद जरूरी है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, युवाओं को शुरुआत से ही योग को अपनी रोज की आदत बना लेना चाहिए। इससे वे आगे चलकर खराब लाइफस्टाइल की वजह से होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं। योगाभ्यास के दौरान सांस लेने के सही तरीकों (प्राणायाम) और ध्यान लगाने पर खास ध्यान दिया गया, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मन की शांति पाने का बेहतरीन जरिया हैं।

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'वन अर्थ, वन हेल्थ' से मिला दुनिया को संदेश

यह आयोजन 21 जून को मनाए जाने वाले 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले की गई एक बड़ी पहल है। इस साल का ग्लोबल मैसेज 'योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ' (एक धरती, एक स्वास्थ्य के लिए योग) है। यह थीम 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) की भारतीय भावना को दर्शाती है, जिसमें सभी लोगों की भलाई की बात कही गई है।

क्रिस्टू जयंती यूनिवर्सिटी और श्री श्री स्कूल ऑफ योगा की इस कोशिश ने पुरानी भारतीय परंपराओं को आज की लाइफस्टाइल से जोड़ने का एक नया उदाहरण पेश किया है। आज जब पूरी दुनिया में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, तब बीमारियों से बचने के लिए योग की मांग और लोकप्रियता दुनियाभर में काफी बढ़ गई है।

योग केवल एक दिन करने की चीज नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। बेंगलुरु के इस कार्यक्रम ने साफ कर दिया कि रोज योग करने से एक सेहतमंद समाज बनाया जा सकता है। यह पहल लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करने और बुढ़ापे की मुश्किलों को आसान और स्वस्थ बनाने के लिए प्रेरित करती है।

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