Konda Vishweshwar Reddy:सबसे अमीर राजनेता को अब है नई पार्टी की तलाश, जानिए कितनी है संपत्ति

हैदराबाद: भारत के सबसे अमीर सांसद रहे पूर्व लोकसभा एमपी कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने पिछले महीने कांग्रेस को टाटा कह दिया। इस वक्त वो किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े हैं। अब वो तेलंगाना में नई राजनीतिक पार्टी बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए वे कई छोटे-छोटे दलों से संपर्क में हैं। लेकिन, वह अपनी भूमिका अभी भी केंद्रीय राजनीति में भी देखना चाहते हैं। उन्होंने खुद तो 53 साल की उम्र में 2013 में राजनीति में एंट्री ली थी, लेकिन सियासत उन्हें विरासत में मिली है और उनके दादा कोंडा वेंकट रंगा रेड्डी पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश के बहुत कद्दावर नेता रह चुके हैं। वैसे रेड्डी अक्सर राजनीति से अलग हटकर भी सोचते रहते हैं, जैसे कि अभी भी वो एक खास राइस ट्रांसप्लांटिंग मशीन विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

दादा से विरासत में मिली है राजनीति

दादा से विरासत में मिली है राजनीति

कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी की राजनीतिक विरासत की जड़ें बहुत ही गहरी हैं। वो खुद 2014 से 2019 के बीच लोकसभा सांसद तो रह ही चुके हैं, उनके दादा कोंडा वेंकट रंगा रेड्डी एकजुट आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री थे। उन्हीं के नाम पर वहां के एक जिले का नाम रंगा रेड्डी भी रखा गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में वे जब तेलंगाना के चेवेल्ला लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे, तब वे देश के सबसे अमीर सांसद थे। 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा था, लेकिन उस चुनाव में उनके लिए उनका धन कोई काम नहीं आया और वो चुनाव हार गए थे। पिछले महीने कांग्रेस छोड़ने के बाद वे अब क्षेत्रीय दल की थीम पर एक नई पार्टी बनाना चाहते हैं, लेकिन खुद राज्य की राजनीति से परहेज करना चाहते हैं और संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।

अमीर नेता होने का मुझे फायदा मिला- कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी

अमीर नेता होने का मुझे फायदा मिला- कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी

उनका इरादा तेलंगाना के छोटे-छोटे दलों को इकट्ठा करके एक ऐसा विशाल सियासी प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरसी) का विकल्प बन सके। उनका मानना है कि धनवान राजनेता कहलाना कई मायने में उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया है, 'शुरू में मुझे चिंता होती थी (अमीर कहे जाने पर)।' उन्होंने अपनी शुरुआती झिझक को हैदराबादी दखनी में कुछ इस तरह से बयां किया है, 'उन्हें लगेगा कि अरे, इने पैसे वाला है, इने आम अदमी की समस्या जानते नई और इसी तरह की बातें....लेकिन मुझे बहुत हैरानी हुई कि इससे मुझे बहुत ही फायदा मिला (2014 में)....'

'मैं सिर्फ कागजों पर अमीर हूं'

'मैं सिर्फ कागजों पर अमीर हूं'

इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि, 'लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि यह पैसे वाला है। इसे रिश्वत लेने की जरूरत नहीं है और यह जीत सकता है। और सच तो यह है कि मैं सिर्फ पेपर पर सबसे अमीर हूं। तेलंगाना का लगभग हर एमपी मुझसे ज्यादा अमीर है। ये लग तो मुझे 20 से 30 बार खरीद सकते हैं। क्योंकि मैं टैक्स देता हूं, वो नहीं देते।' कांग्रेस छोड़ने के बाद वो नई पार्टी क्यों बनाना चाहते हैं, इसपर उनका कहना है, 'किसी भी राष्ट्रीय पार्टी में फैसले सेंट्रल लीडरशिप करती है। कांग्रेस को ही देख लीजिए। जब तक वे समस्या को समझ पाते हैं, सेंट्रल लीडरशिप तक बात पहुंचाते हैं, समाधान खोजा जाता है, केसीआर (तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव) जैसे लोग चीजों को बदल चुके होते हैं। '

राज्य की राजनीति से इस वजह से है परहेज

राज्य की राजनीति से इस वजह से है परहेज

इसीलिए वो क्षेत्रीय पार्टी बनाना चाहते हैं और इसके लिए तेलंगाना जन समिति, तेलंगाना इंती पार्टी और तीनमार मल्लाना जैसे निर्दलीयों को साथ में लाना चाहते हैं। वो टीआरएस के खिलाफ एक विकल्प देना चाहते हैं और भविष्य में कांग्रेस या भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के साथ हाथ मिलाने की संभावनाओं को खारिज नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा है, 'हम कांग्रेस और टीआरएस से भी कुछ लोगों को लाएंगे। वे लोग सही विकल्प की तलाश में हैं।' लेकिन, जब उनसे पूछा गया कि वे खुद राज्य की राजनीति क्यों नहीं करना चाहते तो उन्होंने बताया कि प्रादेशिक राजनीति एक तरह से 'सूअरों के साथ कीचड़ में कुश्ती लड़ने जैसा है।' उनके मुताहिक, 'विधानसभाओं की राजनीति थोड़े निचले स्तर की होती है। कम से कम संसद में कोई किसी पर चप्पल नहीं फेंकता।'

कितनी संपत्ति के मालिक हैं कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ?

कितनी संपत्ति के मालिक हैं कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ?

जब 2014 से 2019 के बीच वे लोकसभा सांसद थे तो उनके पास कुल 528 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति थे और वे देश के सबसे अमीर सांसद थे। लेकिन, 2019 में जब उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा था तब उनकी संपत्ति बढ़कर 895 करोड़ रुपये हो चुकी थी। तब वे देश में दूसरे सबसे अमीर उम्मीदवार थे। हालांकि, उनकी अमीरी भी कांग्रेस के टिकट पर उन्हें लोकसभा तक नहीं पहुंचा पाई। उन्हें अमीर एमपी और अमीर उम्मीदवार कहलाने में कभी कोई आपत्ति नहीं रही। लेकिन, जब उन्हें अमीर कारोबारी बताया जाता है तो उन्हें यह बात नहीं जंचती। वो कहते हैं, 'मैं एक विज्ञानिक, उद्यमी और शोधकर्ता के रूप में पहचाना जाना ज्यादा पसंद करूंगा।' इनकी पत्नी संगीता रेड्डी अपोलो हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। खुद इनके नाम कई पेटेंट और कॉपीराइट हैं, जिसने इन्हें इतना संपत्तिशाली बनाया है। (आखिरी तीनों तस्वीरें कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी के ट्विटर के सौजन्य से)

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