Kolkata Taratala Warehouse Collapses: ताराताला में निर्माणाधीन गोदाम कैसे ढहा? 3 की मौत-60 मलबे में दबे

Kolkata Taratala Warehouse Collapse Reason: कोलकाता के औद्योगिक इलाके तारातला में बुधवार (24 जून) दोपहर एक भयानक हादसा हो गया। एक निर्माणाधीन गोदाम का शेड ताश के पत्तों की तरह ढह गया। हादसे के समय वहां करीब 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे, जो पलक झपकते ही भारी मलबे के नीचे दब गए। बताया जा रहा है कि हादसे में तीन की मौत हो चुकी है।

लेकिन, भाजपा विधायक राकेश सिंह घटनास्थल पर पहुंचते ही 5-6 लोगों की मौत की बात कही थी। साथ ही कहा था कि मैं यह नहीं कहूंगा कि जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, यह लापरवाही है। शंभू ने वहां गंदगी फैलाई थी। उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए, एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों की चीख-पुकार के बाद तुरंत बचाव कार्य शुरू हुआ। पुलिस, दमकल, आपदा प्रबंधन टीम और अब भारतीय सेना भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हो गई है। अब तक 6-7 मजदूरों को निकाला जा चुका है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। मलबे के नीचे से अभी भी दबे मजदूरों की दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही हैं। यह हादसा कोलकाता में निर्माण कार्यों में लगातार हो रही लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का दर्दनाक उदाहरण बन गया है।

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Kolkata Taratala Warehouse Collapses Reason: हादसा कैसे हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चश्मदीदों ने बताया कि दोपहर के समय गोदाम का निर्माणाधीन शेड अचानक पूरा ढांचा भरभराकर गिर पड़ा। भारी लोहे के बीम, छत की पत्तियां और कंक्रीट के ढेर ने मजदूरों को कुचल दिया। बताया जा रहा है कि 23 जून को कोलकाता में हुई भारी बारिश से मिट्टी और संरचना कमजोर हुई। निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री घटिया गुणवत्ता की थीं। बिना पर्याप्त सपोर्ट और सेफ्टी उपायों के काम चल रहा था। इसी वजह से हादसा हो गया। हालांकि, अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। मलबा हटाने के लिए क्रेन, गैस कटर और हेवी मशीनरी लगाई गई है। रात तक बचाव कार्य जारी रहने की संभावना है।

Kolkata Taratala Rescue Opreation: बचाव अभियान, चुनौतियां क्या?

एनडीआरएफ के साथ सेना की टीम भी शामिल, क्योंकि मलबा बहुत भारी है। कई अस्पताल अलर्ट पर, घायलों को तुरंत शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य सरकार ने नवान्न में स्पेशल कंट्रोल रूम स्थापित किया। मौके पर राज्य मंत्री इंद्रनील खां और भाजपा नेता राकेश सिंह पहुंचे। दोनों ने कहा कि प्राथमिकता जिंदगियां बचाना है। मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि लोहे के बड़े-बड़े स्ट्रक्चर को काटना पड़ रहा है।

हेल्पलाइन नंबर जारी:

मंत्री इंद्रनील खान भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन विभाग ने आपदा की स्थिति में एक नियंत्रण कक्ष खोला है। नियंत्रण कक्ष के नंबर 1070, 8697981070, 033 22143526, 033 22535185 हैं।

Taratala Area History: औद्योगिक हब लेकिन जोखिम भरा

ताराताला, कोलकाता का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। यहां गोदाम, फैक्टरियां और लॉजिस्टिक हब बड़ी संख्या में हैं। बंदरगाह के पास होने के कारण ट्रक और कंटेनरों की आवाजाही लगातार रहती है।

लेकिन इसी इलाके में बार-बार हादसे होते रहते हैं। कभी आग, ढहने और दुर्घटनाएं। घनी आबादी और अनियोजित निर्माण ने जोखिम बढ़ा दिया है।

निर्माण कार्यों में सुरक्षा लापरवाही: बड़ा मुद्दा

कोलकाता और पश्चिम बंगाल में पिछले वर्षों में कई बड़े हादसे हो चुके हैं:

  • निर्माणाधीन इमारतों का ढहना।
  • घटिया सामग्री का इस्तेमाल।
  • बिना मंजूरी के निर्माण।
  • मजदूरों को सेफ्टी गियर (हेलमेट, हार्नेस) न देना।

इस हादसे में भी प्राथमिक जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आ रही है। मजदूरों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। कई मजदूर बिहार, झारखंड और ओडिशा से आए प्रवासी थे।

कानूनी पहलू क्या है?

  • बिल्डिंग कॉन्स्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट।
  • फैक्ट्री एक्ट।
  • ओएसएच (Occupational Safety and Health) नियमों का उल्लंघन।
  • दोषी पाए जाने पर मालिक, इंजीनियर और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

आगे क्या?

पूर्ण बचाव अभियान पूरा होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मजिस्ट्रेट जांच और फॉरेंसिक जांच शुरू होगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग। पूरे पश्चिम बंगाल में निर्माण साइटों की सख्त जांच का आदेश आने की संभावना।

ताराताला गोदाम ढहना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। जहां मजदूरों की जान को सस्ता समझ लिया जाता है। भारी बारिश एक ट्रिगर हो सकती है, लेकिन असली वजह लापरवाही है। प्रशासन को अब सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि दोषियों को सजा और ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस नीति बनानी होगी। मलबे में दबे हर मजदूर की जिंदगी बचाना वक्त की पुकार है।

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