लॉकडाउन के बाद 50 रुपए में डायलिसिस दे रहा कोलकाता का ये डॉक्टर, लोग बोले- किसी फरिश्ते से कम नहीं

लॉकडाउन के बाद से 50 डायलिसिस दे रहे कोलकाता के ये डॉक्टर, कोरोना संक्रमितों मरीजों को भी नहीं भेजते वापस

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने और लॉकडाउन लगने के बाद लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है। सबसे ज्यादा परेशान मरीज हुए हैं, क्योंकि लंबे समय तक नर्सिंग होम और अस्पताल बंद रहे या कोविड मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए। इस वक्त में कोलकाता के डॉक्टर फवाद हलीम ऐसा काम कर रहे हैं, जिसकी तारीफ ना सिर्फ कोलकाता और पश्चिम बंगाल बल्कि देशभर में हो रही है। डॉ फवाद लॉकडाउन के बाद 50 रुपए में डायलिसिस उपलब्ध करा रहे हैं।

परिवार और दोस्तों की मदद से चलाते हैं यूनिट

परिवार और दोस्तों की मदद से चलाते हैं यूनिट

49 साल के डॉक्टर फवाद अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर बनाए गए एनएजी स्वास्थ्य संकल्प के तहत दक्षिण कोलकाता में पार्क स्ट्रीट के पास एक स्टैंडअलोन डायलिसिस यूनिट चलाते हैं। कोविड-19 महामारी को लेकर 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से किडनी जैसी बीमारियों के मरीजों को भारी परेशानी होनी लगी। इसे देखते हुए उन्होंने मात्र 50 रुपए में एक बार डायलिसिस की सुविधा देने का काम अपनी यूनिट में शुरू कर दिया।

अब तक 2200 को डायलिसिस दे चुके, कोरोना संक्रमित को लौटाते नहीं

अब तक 2200 को डायलिसिस दे चुके, कोरोना संक्रमित को लौटाते नहीं

लॉकडाउन शुरू होने के बाद, यानी 25 मार्च से अब तक फवाद करीब 2200 लोगों को 50 रुपए में डायलिसिस उपलब्ध करा चुके हैं। सबसे खास ये है कि वो कोरोना के नाम पर किसी मरीज को लौटाते नहीं है। उनकी यूनिट में ही लिखा है कि कोरोना पॉजिटिव को भी डायलिसिस दी जाएगी। हालांकि इसके लिए जो सरकारी नियम हैं, वो जरूर मरीज को मानने होंगे।

डॉ फवाद ने 2008 में पांच बेड वाली एक यूनिट खोली थी। जिसमें वो आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को सस्ता इलाज दे सकें। 2008 से वो प्रति डायलिसिस 350 रुपए ले रहे थे, जो दूसरे अस्पतालों के मुकाबले काफी कम है। वहीं लॉकडाउन के बाद लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने इसे 50 रुपए कर दिया।

माकपा के नेता हैं फवाद

माकपा के नेता हैं फवाद

फवाद हलीम राजनीतिक परिवार से आते हैं और खद भी राजनीति में हैं। लेफ्ट की सरकार में उनके पिता अब्दुल हलीम 1982 से 2011 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रहे हैं। फवाद ने 2019 का लोकसभा चुनाव माकपा के टिकट पर डायमंड हार्बर सीट से लड़ा था। जिसमें वो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बनर्जी से हार गए थे। फवाद हलीम माकपा की पीपुल्स रिलीफ कमेटी के महासचिव भी हैं। हालांकि उनकी डायलिसिस यूनिट का पार्टी या राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। हलीम के मुताबिक, उनके स्कूल के कुछ दोस्त, परिवार और चचेरे भाई आर्थिक तौर पर इस यूनिट के लिए मदद करते हैं।

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