जानिए, दिल्ली में क्यों आई है केजरीवाल की 'AAP' पर आफत?
नई दिल्ली- दिल्ली में इस बार लोकसभा का चुनाव बहुत ही दिलचस्प बना हुआ है। पहले कुछ महीनों तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर आए दिन आने वाली नई खबरों ने लोगों का खूब एंटरटेनमेंट किया। अब अरविंद केजरीवाल की 'आप' (AAP) की 'हमनाम' पार्टियों ने चुनावी माहौल को बहुत ही रोचक बना दिया है। इन पार्टियों में 'अंजन आदमी पार्टी' (AAP) और 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) जैसे दल शामिल हैं। इनकी मौजूदगी ने आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं का टेंशन बढ़ा दिया है। अगर नई दिल्ली लोकसभा सीट की ही बात करें, तो यहां का वोटर ईवीएम (EVM) देखकर बहुत कंफ्यूज हो सकता है। क्योंकि, यहां 'आप' (AAP) के ब्रिजेश गोयल के मुकाबले 'आप' (AAP)के उपेंद्र मिश्रा और 'आप' (AAP) के ही सुनील भी चुनाव मैदान में मौजूद हैं।

केजरीवाल से 'AAP' उम्मीदवार की नाराजगी
नई दिल्ली सीट पर 'आम आदमी पार्टी' (AAP) उम्मीदवार ब्रिजेश गोयल के खिलाफ उपेंद्र मिश्रा नाम के प्रत्याशी 'अंजन आदमी पार्टी' (AAP) से मैदान में उतरे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पेशे से मेकेनिकल इंजीनियर मिश्रा ने 'आम आदमी पार्टी' (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के रवैए से नाराज होकर चुनाव में उतरने का फैसला किया है। दरअसल, उन्हें दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन की केजरीवाल की छटपटाहट से नाराज होकर यह फैसला लेना पड़ा है। 'आप' (AAP) के मिश्रा कहते हैं, "मैं केजरीवाल के एंटी-करप्शन मूवमेंट से जुड़ा हुआ था और फिर से अपने पेशे में तब लौटा जब मूवमेंट ने राजनीतिक स्वरूप ले लिया। मैं खुश था कि 'आप' (AAP) का गठन हो गया था और उम्मीद थी की चीजें बदलेंगी, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।" मिश्रा को जब 'अंजन आदमी पार्टी' (AAP) के बारे में पता चला, तब उन्होंने उसके प्रमुख से मिलकर नई दिल्ली से पार्टी की उम्मीदवारी ले ली। उनका दावा है कि, "मैं बहुत बढ़िया चुनाव अभियान चला रहा हूं और हमें अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।"

एक और 'AAP' उम्मीदवार का दावा
नई दिल्ली सीट पर ही एक और 'आप' (AAP) यानी 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) की ओर से सुनील भी 'आम आदमी पार्टी' (AAP) उम्मीदवार ब्रिजेश गोयल के खिलाफ ही चुनाव मैदान में हैं। 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) नई दिल्ली के अलावा दिल्ली की 5 और सीटों पर भी 'आम आदमी पार्टी' (AAP) के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) के प्रमुख रामवीर चौहान का दावा है कि, "'आप' (AAP) तो मुकाबले में ही नहीं है।" मजेदार बात ये है कि इन दोनों 'आप' (AAP) की लड़ाई चुनाव मैदान से पहले अदालत में भी लड़ी जा चुकी है। क्योंकि, केजरीवाल की पार्टी 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP)के इलेक्शन सिंबल, जलती हुई टॉर्चलाइट के खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। इसकी वजह ये है कि 'आम आदमी पार्टी' (AAP) को डर था कि 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) की सिंबल 'जलती हुई टॉर्चलाइट' उसकी 'झाड़ू' जैसी दिखेगी, तो वोटर कंफ्यूज कर जाएंगे। आखिरकार अदालत ने 'आपकी अपनी पार्टी' (AAP) को 'बिना जलती हुई टॉर्चलाइट' वाला सिंबल इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।

'AAP'की राह में और भी हैं रोड़े
वैसे 'आम आदमी पार्टी' के आम कार्यकर्ताओं को डर है कि ये 'हमनाम' पार्टियां कहीं उनका चुनावी खेल ही खराब न कर दें। नई दिल्ली से 'आम आदमी पार्टी' (AAP) उम्मीदवार बृजेश गोयल का तो आरोप है कि ये 'हमनामी' पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी के मोहरे हैं। लेकिन, उन्हें यकीन है कि मतदाता इन्हें जरा भी भाव नहीं देंगे। 'आप' (AAP) नाम की इन 'हमनाम' पार्टियों के अलावा कुछ और भी ऐसे दल हैं, जो दिल्ली के मतदाताओं को वोटिंग के समय कुछ ज्यादा दिमाग लगाने को मजबूर कर सकते हैं। इसमें 'नेशनल अपनी पार्टी', 'अखिल भारतीय मानवता पक्ष', 'पिरामिड पार्टी ऑफ इंडिया', 'करप्शन एवॉलिशन पार्टी', 'राइट टु रिकॉल पार्टी' और 'चैलेंजर्स पार्टी' अपने-अपने चुनावी वादों-इरादों के साथ ईवीएम पर नजर आएंगी। ये जरूर है कि अपने एजेंडे के साथ मैदान में उतरीं ये पार्टियां वोटर्स को बहुत ज्यादा प्रभावित कर पाएंगी, ऐसा लगता नहीं है। लेकिन, मुख्य रूप से त्रिकोणीय मुकाबले वाले इस चुनाव में हर वोट का अपना महत्त्व होगा और शायद इसलिए केजरीवाल की 'आम आदमी पार्टी' इनको लेकर इतनी परेशान नजर आ रही है।












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