जानिए, कौन है 'बुल्ली बाई' का 'जन्मदाता' नीरज बिश्नोई? सरकार ने पढ़ाई के लिए दिया लैपटॉप, उसी से बनाया ऐप
नई दिल्ली, 07 जनवरी। 'बुल्ली बाई' ऐप विवाद में अब एक नया नाम सामने आया है जिसने उस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी ली है। 21 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र नीरज बिश्नोई को गिटहब पर बुल्ली बाई ऐप का मास्टरमाइंड और ऐप का मुख्य ट्विटर अकाउंट धारक कहा जा रहा है। नीरज बिश्नोई को दिल्ली पुलिस ने बीते रात असम के जोरहाट जिले से गिरफ्तार किया था। नीरज बिश्नोई जोरहाट शहर के दिगंबर चौक क्षेत्र का निवासी है। वह वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल में बीटेक कंप्यूटर साइंस का सेकंड ईयर का छात्र है।

कौन है नीरज बिश्नोई?
नीरज बिश्नोई के अलावा मुंबई पुलिस ने भी इस मामले में दो गिरफ्तारियां की थीं, जिनमें से एक इंजीनियरिंग का छात्र विशाल कुमार झा है तो दूसरी उत्तराखंड की रहने वाली श्वेता सिंह है। सभी आरोपियों ने मिलकर गिटहब पर बुल्ली बाई नाम का एक ऐप बनाया और उस पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर पोस्ट की। ये तस्वीरें महिलाओं के पर्सनल सोशल मीडिया हैंडल से ली गई थी। बुल्ली बाई ऐप पर इन महिलाओं के लिए बोली लगाई जा रही थी।

दो बहनों में सबसे छोटा है नीरज बिश्नोई
नीरज बिश्नोई कौन है? ये सवाल अब कई लोगों के मन में उठ रहा है। महज 21 वर्षी की उम्र में छात्र अपराधी कैसे बना इसे लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। नीरज बिश्नोई के पिता दशरथ बिश्नोई एक दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार रात करीब 11 बजे दिल्ली पुलिस की तीन सदस्यीय टीम जोरहाट पुलिस के साथ उनके घर पहुंची और उनके बेटे के बारे में पूछा। नीरज बिश्नोई की दो बहने भी हैं, आरोपी अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा है।

पुलिस ने जब्त किया लैपटॉप और फोन
नीरज के पिता ने कहा, 05 जनवरी (बुधवार) पुलिस की टीम हमारे घर आई और नीरज के बारे में पूछा। टीम ने करीब 45 मिनट बिताए और हमारे घर की तलाशी ली। जाने से पहले, वे मेरे बेटे को ले गए और उसका लैपटॉप और एक मोबाइल फोन जब्त कर लिया, जो मेरी पत्नी का था। मेरा बेटा उन डिवाइस का इस्तेमाल करता था। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा निर्दोष है और वह कोई गलत काम नहीं कर सकता।

पिता ने बताई ये बात
दशरथ बिश्नोई ने कहा, नीरज ने हमें बताया कि वह किसी भी गलत काम में शामिल नहीं था। उसने दिल्ली पुलिस की टीम को यह भी बताया कि वह निर्दोष है और हो सकता है कि किसी ने उसकी फोटो का इस्तेमाल किया हो। मेरे बेटे ने 10वीं की परीक्षा सेंट मैरी स्कूल से 86 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। उसे राज्य सरकार की तरफ से एक लैपटॉप भी मिला। हमारी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी और हम अपने बेटे के लिए एक कंप्यूटर नहीं खरीद सकें।

लैपटॉप में ही चिपका रहता था नीरज
उन्होंने कहा, 'वह हर दिन रात 11 बजे तक ज्यादातर समय कंप्यूटर में व्यस्त रहता था। नीरज को 2019 में वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल में प्रवेश मिला, लेकिन कोरोना के वजह से वह घर से ही ऑनलाइन क्लास ले रहा था। बेटे ने शायद ही कभी किसी और से बात की होगी, वह सिर्फ पढ़ाई में लगा रहता था। उसने कक्षा 12 की परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए। नीरज का कोई भी दोस्त हमारे घर में रहने के दौरान घर नहीं आया था। वह हमेशा अपने लैपटॉप से चिपका रहता था।

कम उम्र में ही कट्टरपंथी हो गया था नीरज
21 वर्षीय ऐप डेवलपर नीरज बिश्नोई बहुत कम उम्र से ही धर्म के मुद्दों में रुचि लेने लगा था। उसके एक सोशल मीडिया अकाउंट से पता चला कि वह धर्म के मामले में काफी एक्टिव था। सवाल-जवाब वेबसाइट पर उनके उत्तरों के अनुसार, ऐसा लगता है कि वह बहुत ही कम उम्र में कट्टरपंथी हो गए था। वेबसाइट पर उसने कई लोगों के सवाल के जवाब दिए थे।
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