जानिए, उन तीन लोगों को जो करेंगे अयोध्या विवाद की मध्यस्थता?
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर बड़ा फैसला करते हुए इस विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थता का फैसला दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मध्यस्थता की प्रक्रिया कैमरे के सामने होने की बात कही। कोर्ट ने इसके साथ ही आदेश दिया कि इस विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थता फैजाबाद में होगा।कोर्ट ने इसकी जिम्मेदारी तीन सदस्यों की समिति को सौंपी। समिति की अध्यक्षता जस्टिस खलीफुल्ला (रिटायर) करेंगे। वहीं इसके अलावा इस पैनल में श्री श्री रविशंकर और सीनियर वकील श्रीराम पांचू भी होंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक इस विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थता के पैनल की अध्यक्षता जस्टिस खलीफुल्ला (रिटायर) करेंगे। आपको हम उन तीन सदस्यों के बारे में बता रहे हैं, जिनपर इस विवाद के निपटारे की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कौन हैं जस्टिस खलीफुल्ला
पूर्व जस्टिस खलीफुल्ला सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ट जज हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1951 में तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने साल 1975 में बतौर वकील अपने करियर की शुरुआत की। साल 2000 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। इसके बाद साल 2011 में उन्हें जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया। इसके बाद दो अप्रैल 2012 को खलीफुल्ला को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस नियुक्त किया गया। साल 2016 में वो यहां से रिटायर हो गए।

कौन हैं श्रीराम पांचु
सुप्रीम कोर्ट ने पांच लोगों की कमिटी में श्रीराम पांचु को भी नियुक्त किया है। श्रीराम पांचु द मेडिएशन चेम्बर्स के नाम से एक समिती गठित की है, जिसके जरिए वो मध्यस्थता और मध्यस्थता में शामिल होते हैं। वो भारतीय मध्यस्थों के संघ के अध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता संस्थान बोर्ड के निदेशक रह चुके हैं। पांचु ने मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कौन हैं श्री श्री रविशंकर
आध्यात्मिक धर्मगुरू श्री श्री रविशंकर देश और दुनिया भर में जाने जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने श्री श्री रविशंकर को भी इस मामले में मध्यस्थ बनाया है। श्री श्री रविशंकर के अनुयायी न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी फैले हुए हैं। श्री श्री रविशंकर आर्ट ऑफ लिविंग नाम की एक संस्था चलाते हैं, जिसकी मदद से वो लोगों में आत्मविश्वास भरते हैं। अपनी संस्था की मदद से वो 67887 बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने 618 स्कूल खुलवाएं हैं जिनमें से ज्यादातर स्कूल ग्रामीण और आदीवासी इलाकों में है। आर्ट ऑफ लिविंग की मदद से कई अस्पताल चलाए जाते हैं। इसके अलावा कई मेडिकल कैंप लगवाए जाते हैं।
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