क्या है पीआरसी, जिस लेकर अरुणाचल प्रदेश में मचा है बवाल
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में पीआरसी यानि परमानेंट रेजीडेंस सर्टिफिकेट को लेकर लोगों का प्रदर्शन जारी है। अब ये विवाद धीरे धीरे हिंसक रूप लेता जा रहा है। इसको लेकर राज्य के उप मुख्यमंत्री चौना मैन के घर पर पथराव भी हुआ है जिसके बाद इसे आग के हवाले कर दिया गया। यहां लोगों के लिए जानना जरूरी है कि इस विवाद की जड़ पीआरसी आखिर है क्या जिसके चलते इतना विकराल प्रदर्शन हो रहा है।

क्या है पीआरसी?
दरअसल अरुणाचल प्रदेश में सरकार नामसाई और चांगलांग जिलों में 6 आदिवासी समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने को लेकर विचार कर रही है। बता दें कि ये सभी 6 समुदाय गैर अरुणाचली और गैर आदिवासी समुदाय हैं। ऐसे में इन्हें स्थायी निवासी प्रमाण पत्र दिए जाने के फैसले को लेकर सरकार का व्यापक विरोध हो रहा है। इसको लेकर लोग जगह जगह तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

इन समुदायों को पीआरसी देने पर हो रहा विचार
पीआरसी के लिए सोनोवाल, कछारी, देवरिस, मोरांस, आदिवासी और मिशिंग समुदाय समुदायों को शामिल करने पर विचार हो रहा था। इन सभी को असम में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है। साथ ही गोरखा को भी ये दर्जा देने पर विचार हो रहा है। ये सभी अरुणाचल के स्थाई निवासी नहीं हैं लेकिन वरसों से चांगलांग और नामसाई जिले में रह रहे हैं।

इसलिए पीआरसी के विरोध में हैं अरुणाचल प्रदेश के लोग
6 आदिवासी समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने के विचार को लेकर अरुणाचल के लोगों में गुस्सा है क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा करने से राज्य के आदिवासियों के अधिकारों और उनके हितों को ठेस पहुंचेगी। बता दें कि पीआरसी के इस प्रस्ताव को शनिवार को विधानसभा में पेश किया जाना था लेकिन इस आंदोलने के बाद इसे पेश नहीं किया जा सका। स्पीकर ने इस दौरान विधानसभा सत्र को ही भंग कर दिया।












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