जानिए, यूपी की 18 सीटों पर क्यों है बीजेपी को इतनी टेंशन?

नई दिल्ली- बीजेपी ने यूपी की 80 में से 61 सीटों पर उम्मीवारों के नामों ऐलान कर दिया है। मिर्जापुर की सीट पर उसकी सहयोगी अपना दल से केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल प्रत्याशी हैं। लेकिन, बाकी 18 सीटों पर पेंच अभी भी फंसा हुआ है। ये वो सीटें हैं, जिनपर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने में पार्टी को बड़ी दिक्कत हो रही है। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहली बात तो ये है कि बीएसपी-एसपी और आरएलडी गठबंधन ने उसे अपनी रणनीति में काफी बदलाव लाने के लिए मजबूर कर दिया है। इसके अलावा कुछ सीटों पर सहयोगी दलों की दावेदारी ने भी परेशान कर रखा है।

वैसे राज्य की जिन 18 सीटों पर अभी भी उम्मीदवारों की घोषणा होनी बाकी है, वे हैं- झांसी, रायबरेली, बांदा, प्रतापगढ़,अंबेडकर नगर,संत कबीर नगर, लालगंज, मछलीशहर, भदोही, रॉबर्ट्सगंज, घोसी, गोरखपुर, फूलपुर, मैनपुरी, आजमगढ़, फिरोजाबाद, देवरिया और जौनपुर। इनमें से हर एक सीट को लेकर अलग-अलग संकट है, जिसे सुलझाना बीजेपी नेतृत्व के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है। पहले इन सभी सीटों पर उम्मीदवारों का फैसला 30 मार्च तक हो जाने की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी इसमें कुछ और समय लगना तय है।

कद्दावर नेताओं के खिलाफ बेहतर उम्मीदवारों की तलाश

कद्दावर नेताओं के खिलाफ बेहतर उम्मीदवारों की तलाश

बीजेपी ने अबतक जिन 61 सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की है, उनमें से कई जगहों पर उम्मीदवारों को बदल दिया गया है। इनमें से कुछ को नए जातीय समीकरणों और कुछ को एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर के मद्देनजर बदला गया है। लेकिन, अब पार्टी को जिन सीटों के लिए उम्मीदवार तय करने हैं, उनमें वो सीटें भी शामिल हैं, जिनपर विपक्ष के कद्दावर नेता मैदान में हैं। मसलन रायबरेली की सीट पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ अभी तक पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं तय कर पाई है। 2014 में बीजेपी ने यहां से अजय अग्रवाल को मुकाबले में उतारा था। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को खत लिखकर चेताया है कि अगर उनका टिकट कटा, तो पार्टी को इसका नुकसाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

बीजेपी को आजमगढ़ में एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव, मैनपुरी में पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव और फिरोजाबाद में उनके भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ भी उनके गढ़ में टक्कर देने लायक प्रत्याशियों की तलाश है। वैसे भोजपुरी एक्टर दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के बीजेपी में शामिल होने के बाद यह भी चर्चा उठ चुकी है कि उन्हें अखिलेश के खिलाफ मौका दिया जा सकता है, लेकिन पार्टी आधिकारिक तौर पर इसको लेकर अभी तक मौन है।

कद्दावर नेताओं की सीटों पर बेहतर प्रत्याशियों की तलाश

कद्दावर नेताओं की सीटों पर बेहतर प्रत्याशियों की तलाश

इस चुनाव में बीजेपी के कई दिग्गज चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। कुछ ने खुद ही असमर्थता जताई है, तो कुछ को पार्टी ने रिटायरमेंट दे दिया है। खुद से चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करने वालों में केंद्रीय मंत्री उमा भारती और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा शामिल हैं। पार्टी को उमा की जगह झांसी में उनके विकल्प वाला प्रत्याशी चाहिए और देवरिया में कलराज मिश्रा की सीट वापस पार्टी की झोली में डालने लायक उम्मीदवार भी चाहिए। जाहिर है कि बीजेपी चुनाव समिति के पास नामों की कमी नहीं होगी, लेकिन जीतने लायक प्रत्याशी ढूंढना भारी पड़ रहा है।

फूलपुर,गोरखपुर के लिए भी चाहिए जिताऊ उम्मीदवार

फूलपुर,गोरखपुर के लिए भी चाहिए जिताऊ उम्मीदवार

बीजेपी को गोरखपुर और फूलपुर में इस बार जीतने लायक उम्मीदवारों की तलाश है। गोरखपुर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट रही है और पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है। जबकि, फूलपुर से 2014 के लोकसभा चुनाव में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जीते थे। लेकिन, 2018 में हुए उपचुनाव में बीएसपी-एसपी गठबंधन ने इन दोनों सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों को आसानी से हरा दिया था। बीजेपी इस बार हर हाल में इन दोनों सीटों पर वापस अपना कब्जा करना चाहती है। ये दोनों सीटों राज्य के सीएम और डिप्टी सीएम की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई हैं। गोरखपुर में तो बीजेपी 1991 से ही जीतती आई थी। खुद आदित्यनाथ यहां से 5 बार- 1998,1999, 2004, 2009 और 2014 में जीत चुके हैं। लेकिन, यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार ने राज्य ही नहीं, देश की राजनीति बदलने का भी काम किया है। इसलिए बीजेपी के लिए अबकी बार अपना सम्मान वापस पाना बहुत बड़ी चुनौती है।

सहयोगी दलों के दबाव से निपटने की भी है चुनौती

सहयोगी दलों के दबाव से निपटने की भी है चुनौती

बीजेपी के सामने एक बड़ी मुसीबत सहयोगी दलों की भी है। अपना दल की अनुप्रिया पटेल के लिए तो मिर्जापुर की सीट तय है, लेकिन उनकी पार्टी के लिए बीजेपी दूसरी कौन सी सीट छोड़ेगी यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। खबरों के मुताबिक ये सीटें प्रतापगढ़ या रॉबर्ट्सगंज हो सकती हैं। 2014 में मिर्जापुर के अलावा प्रतापगढ़ में भी अपना दल को जीत मिली थी। लेकिन, उम्मीदवारों के चुनाव में सबसे बड़ी अड़चन सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) को लेकर हो रही है। जानकारी के अनुसार पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर घोसी, जौनपुर, मछलीशहर, अंबेडकर नगर और लालगंज सीट पर दावेदारी जता रहे हैं। जबकि, इन सभी सीटों पर पिछली बार बीजेपी जीती थी। राजभर की पार्टी कह चुकी है कि अगर बीजेपी की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले, तो आखिरी तीन चरणों के लिए वह अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देगी। हालांकि, भाजपा के लोगों का मानना है कि यह 'दबाव की राजनीति' से ज्यादा कुछ भी नहीं है। पार्टी का कहना है कि राजभर की पार्टी से बातचीत चल रही है और जल्द ही अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे।

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