मई से लेकर नवंबर तक हुई नोटबंदी की प्लानिंग, हर शुक्रवार होती थी एक गुप्त बैठक

भले ही यह फैसला दिखने में तुरंत लिया गया लगता हो, लेकिन इसकी योजना पिछले साल मई से बनने लगी थी। इसके लिए हर शुक्रवार को दिल्ली में एक गुप्त बैठक होती थी।

नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी का ऐलान किए जाने से तीन घंटे पहले ही भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड ने इसे मंजूरी दी थी। उर्जित पटेल ने शुक्रवार को दूसरी संसदीय समिति के सामने नोटबंदी के पहले इसे लेकर बनाई गई योजना के बारे में समझाया। उन्होंने बताया कि 8 नवंबर की शाम 5.30 बजे उनकी अगुवाई में केन्द्रीय बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें एक दिन पहले सरकार द्वारा नोटबंदी किए जाने के सुझाव को मंजूरी दे दी गई। बुधवार को भी वह संसद की वित्तीय समिति के सामने पेश हुए थे।

मई से शुरू हो गई थी नोटबंदी की प्लानिंग

मई से शुरू हो गई थी नोटबंदी की प्लानिंग

शुक्रवार और बुधवार को उनके द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों के अनुसार सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच नोटबंदी पर चर्चा पिछले साल मई से ही शुरू हो गई थी, लेकिन 7 नवंबर को इस योजना में तेजी आई और 24 घंटे में ही इस पर फैसला ले लिया गया। जहां एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक बोर्ड 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की योजना पर चर्चा कर रहा था, वहीं पीएम मोदी 7 बजे से अपने ऑफिस में होने वाली कैबिनेट मीटिंग की तैयारी कर रहे थे। इस कैबिनेट मीटिंग में किसी भी मंत्री को मोबाइल फोन रखने की इजाजत नहीं थी।
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10 में से 8 सदस्यों ने नोटबंदी पर लगाई मुहर

10 में से 8 सदस्यों ने नोटबंदी पर लगाई मुहर

इसके बाद यह सूचना आई कि भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड के 10 में से 8 सदस्यों ने नोटबंदी के फैसले पर मुहर लगा दी है। इसके तुरंत बाद पीएमम मोदी को घर से ऑफिस छोड़ा गया, जहां उन्होंने इसके बारे में कैबिनेट को बताया और उनकी मंजूरी ली। उसके बाद रात करीब 8 बजे पीएम मोदी ने देश के नाम संदेश में नोटबंदी की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 10 में से 8 सदस्यों ने दिल्ली में इस फैसले को मंजूरी दी। इसके अलावा नौवां सदस्य विदेश में था, जबकि दसवां सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्यालय, मुंबई में था, जहां पर उसे भारत का अब तक का सबसे बड़े आर्थिक फैसले को लागू करना था।

हर शुक्रवार होती थी मीटिंग

हर शुक्रवार होती थी मीटिंग

उच्च स्तर के सूत्रों के अनुसार भले ही यह फैसला दिखने में तुरंत लिया गया लगता हो, लेकिन इसकी योजना पिछले साल मई से बनने लगी थी। मई से ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और एक डिप्टी गवर्नर लगातार दिल्ली आते थे और पीएम मोदी और उनकी एक गुप्त टीम के साथ इस मुद्दे पर बात करते थे। यह मीटिंग हर शुक्रवार को शाम 6 बजे के करीब होती थीं, जिनमें नोटबंदी पर चर्चा होती थी। इस फैसले को गुप्त रखने के उद्देश्य से इसकी कोई रिकॉर्डिंग नहीं की गई।
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रघुराम राजन भी करते थे चर्चा

रघुराम राजन भी करते थे चर्चा

सूत्रों के अनुसार रघुराम राजन भी अपने कार्यकाल के दौरान अगस्त तक इससे जुड़ी चर्चाओं में शामिल हुए थे। इसके अलावा, यह भी दावा किया जा रहा है कि गवर्नर बदलने की वजह से 2000 रुपए के नोटों की छपाई में थोड़ी देर हो गई। यह भी सूचना है कि नए नोट जारी करने का फैसला जून में ही ले लिया गया था, ताकि पुराने नोट बंद होते ही नए नोट बाजार में आ जाएं। पीएम और वित्त मंत्री द्वारा नए नोटों के डिजाइन और सुरक्षा फीचर्स पर मुहर भी लग गई थी, लेकिन नए नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर चाहिए थे, इसलिए उर्जित पटेल की नियुक्ति तक नोट छापने के काम में देरी हो गई।

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