जानिए कैसे अमेरिका में हुए आतंकी हमले की जांच में शामिल होगी एनआईए?
नई दिल्ली। अमेरिकी एजेंसी एफबीआई यानी फेडरल इनवेस्टिगेशन ब्यूरो और भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए, दोनों ही काफी अलग हैं। दोनों के काम करने का तरीका भी अलग है और दुनिया में दोनों की ताकत का स्तर भी अलग है। गृह मंत्रालय ने अब एनआईए को एफबीआई जितना ताकतवर बनाने की दिशा में एक कदम उठाया है। इस कदम के तहत अब एनआईए दूसरे देशों में बसे भारतीयों पर होने वाले आतंकी हमलों की जांच के लिए दूसरे देश जा सकेगी।

गृह मंत्रालय ने एनआईएस को और शक्तियां प्रदान करने के लिए जरूरी प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है। मंत्रालय इस बात पर राजी है कि एनआईए को एफबीआई की ही तरह भारतीयों पर हुए आतंकी हमले की जांच के लिए इजाजत दी जाएगी।
आपको बता दें कि जिस समय 26/11 का हमला हुआ था उस समय एफबीआई को भारत आकर एनआईए के साथ ही मिलकर जांच करने की अनुमति दी गई थी। इन हमलों में कुछ अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी।
कैसे काम करेगा प्रस्ताव
- प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के साथ ही एनआईए की टीम किसी भी देश का दौरा कर सकेंगे।
- वह वहां की जांच एजेंसी के साथ मिलकर आतंकी हमलों में जांच शुरू कर सकेंगे।
- हालांकि यह जांच हमलों में प्रभावित भारतीयों तक ही सीमित होगी।
- इस ताकत के मिलने के बाद अफगानिस्तान जैसे देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा हो सकेगी।
- अफगानिस्तान के हेरात में हुए ब्लास्ट में सिर्फ अफगानिस्तान की एजेंसी ने ही जांच पूरी की थी।
- एनआईए की टीम दूसरी जांच एजेंसी के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी।
- वहां स्थानीय टीम के साथ मिलकर जांच के लिए जरूरी आंकड़ें इकट्ठा करेगी।
- इस तरह की कार्यप्रणाली में एनआईए को भी अपना डाटा बेस मजबूत करने में मदद मिलेगी।
- भारत को अक्सर यह बात महसूस होती है कि दूसरे देशों में हो रही जांच कुछ हद तक पक्षपाती होती है।
- इस ताकत के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई और मजबूत हो सकेगी।
- वर्तमान समय में एनआईए और रॉ दोनों ही विदेशी जांच एजेंसियों की ओर से मिल रही जानकारी पर निर्भर हैं।












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