Kisan andolan news:न पानी-न टॉयलेट, क्या अब ट्यूबवेल बोर करेंगे किसान ?

Kisan andolan news: किसान अब दिल्ली में 26 जनवरी की तरह ट्रैक्टर परेड (tractor parade) वाली हालात ना पैदा करें, इसके लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने प्रदर्शन वाले तीनों जगहों सिंघु (Singhu border), टिकरी (Tikri border) और गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur border) पर जबर्दस्त किलेबंदी कर दी है। सिंघु बॉर्डर पर तो चार-पांच फीट चौड़ी कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई है, जिससे प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली से पूरी तरह कट गए हैं। ऐसी स्थिति लगभग तीनों प्रमुख प्रदर्शन स्थलों पर देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से अब प्रदर्शनकारी को न ठीक से पानी उपलब्ध हो पा रहा है और टॉयलेट तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर तो प्रदर्शनकारी खुले में ही शौच जाने को मजबूर हो रहे हैं।

मोबाइल टॉयलेट तक नहीं पहुंच पा रहे किसान

मोबाइल टॉयलेट तक नहीं पहुंच पा रहे किसान

अगर सिंघु बॉर्डर (Singhu border)की बात करें तो दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाइवे (Delhi-Chandigarh national highway) पर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में पांच लेयर की बैरिकेडिंग कर दी है। इसका परिणाम ये हुआ है कि आंदोलनकारी किसानों को बैरिकेडिंग के उसपार करीब दो दर्जन मोबाइल टॉयलेट वैन और दिल्ली जल बोर्ड के वॉटर टैंकर तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो चुका है। इसकी वजह से स्वच्छता की समस्या भी खड़ी हो रही है। दूसरी ओर जो कुछ टॉयलेट बचे हुए हैं, उसके इस्तेमाल करने के लिए बहुत देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। महिलाएं तो और भी ज्यादा परेशान हो रही हैं। कुछ को तो पास की खेतों में ही जाना पड़ रहा है। पंजाब के गुरदासपुर से आए एक प्रदर्शनकारी हरभजन सिंह कहते हैं, 'अब इस तरफ बहुत ही कम टॉयलेट रह गए हैं। एक टॉयलेट पेट्रोल पंप के पास है और जहां पर सैकड़ों टॉयलेट हैं, वहां पर हम पहुंच नहीं सकते। इसलिए पंप पर लंबी कतार लगी है।'

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    जरूरत पड़ी तो हम ट्यूबवेल बोर करेंगे-किसान

    जरूरत पड़ी तो हम ट्यूबवेल बोर करेंगे-किसान

    भारतीय किसान यूनियन (BKU) के कैथल से आए एक कार्यकर्ता मंजीत ढिल्लन ने कहा है कि किलेबंदी इसलिए की गई है, ताकि किसान दिल्ली की ओर नहीं जा सकें। लेकिन, इसके चलते दिल्ली की ओर से आने वाली हर तरह की मदद भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा, 'शुरू में रोड की उस तरफ से कई वॉटर टैंकर आते थे, लेकिन अब हम सिर्फ हरियाणा से आने वाले वॉटर टैंकर के भरोसे हैं। कई लोग तो पानी की सीलबंद बोतलें खरीद रहे हैं।' कुछ किसान खालसा की ओर से लगाए गए आरओ वॉटर प्लांट के भरोसे हैं, जो टेंटों में 20 लीटर की बोतलें भरने के लिए लगाए गए हैं। हाइवे पर मौजूद दुकानें भी पानी देने में मदद कर रहे हैं। इन दिक्कतों से किसान निराश हैं, लेकिन फिर भी डटे हुए हैं। पटियाला से आए एक किसान कुलजीत सिंह ने तो यहां तक कहा है कि, 'हम किसान हैं। अगर जरूरत पड़ी तो हम ट्यूबवेल बोर करेंगे। सरकार को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह हमें डरा देगी। हम अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित किए बिना अपने गांव नहीं लौटेंगे।'

    कचरा भी जमा होता जा रहा है

    कचरा भी जमा होता जा रहा है

    पानी और टॉयलेट के अलावा किसानों के सामने बैरिकेडिंग के चलते एक और परेशानी पैदा हो रही है। प्रदर्शन वाली जगह के आसपास कचरे का ढेर जमा होता जा रहा है। टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मंगलवार को कहा कि सोमवार से सफाई कर्माचारी नहीं आए हैं। पंजाब के बठिंडा से आए 52 साल के किसान रंजीत सिंह के मुताबिक, 'गणतंत्र दिवस के विरोध से पहले सफाई कर्मचारी आते थे और सफाई कर जाते थे। लेकिन, अब नहीं आ रहे। हम सिर्फ कचरा जमा करके उसे किनारे रख देते हैं। हमें डर लग रहा है कि अगर कुछ नहीं किया गया तो बीमारियां फैल सकती हैं।' बता दें कि सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी हरियाण की तरफ धरने पर बैठे हैं और गाजीपुर बॉर्डर पर यह धरनास्थल उत्तर प्रदेश में है।

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