दिल्ली का रण: केजरीवाल या किरण बेदी, कौन है बेहतर?
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। किरण बेदी का बीजेपी की ओर से सीएम प्रत्याशी घोषित होने के कारण यह चुनाव पहले से ज्यादा दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।

चारों ओर केवल एक ही शोर है और वो यह कि दिल्ली के चुनाव की लड़ाई अब केजरीवाल बनाम किरण बेदी हो गई है। इसलिए अब लोगों के बीच में बहस छिड़ गई है कि केजरीवाल और किरण बेदी में कौन ज्यादा बेहतर है।
आईये जानते हैं पहले दोनों ही अद्भभुत व्यक्तित्व केजरीवाल और किरण बेदी की समानताएं..
1. अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी दोनों ही देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आईआईटी के पढ़े हुए हैं। किरण बेदी आईआईटी दिल्ली की तो केजरीवाल आईआईटी खडगपुर के स्टूडेंट रहे हैं।
2. दोनों ही प्रशासनिक सेवा में कार्यरत रह चुके हैं, जहां किरण बेदी देश की पहली महिला आईपीएस थीं तो वहीं केजरीवाल आईआरएस ऑफिसर थे।
3.दोनों ने ही देश के भ्रष्ट प्रशासन के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है और लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं।
4. दोनों ही ईमानदार व्यक्तित्व के मालिक हैं और देश और समाज के लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहते हैं।
5. दोनों ही निजी स्वार्थ से परे होकर देश और देशवासियों की सेवा करना चाहते हैं।
आईये अब जानते हैं पहले दोनों ही अद्भभुत व्यक्तित्व केजरीवाल और किरण बेदी की असमानताएं..
1. अरविंद केजरीवाल के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खामी यही रही कि उन्होंने सिस्टम के बदलने के लिए खुद को नहीं बदला बल्कि सिस्टम को ही छोड़ दिया जबकि किरण बेदी ने सिस्टम में रहकर सिस्टम को बदलने का प्रण किया है।
2.किरण बेदी ने केजरीवाल की तरह ना तो धरना प्रदर्शन किया और ना ही शोर मचाया, जबकि केजरीवाल हर चीज की शुरूआत बहस और प्रदर्शन से ही करते हैं।
3.अपने आईपीएस पोस्ट के दौरान ही किरण बेदी ने बहुत कुछ बदलाव किये थे लेकिन यह सब उन्होंने पॉवर और जॉब के बीच में किया था जबकि केजरीवाल ने उनकी तुलना में अपने विरोध के लिए हमेशा सिस्टम को छोड़कर आवाज उठायी, उन्होंने नौकरी भी इसलिए ही छोड़ी थी।
4.किरण बेदी ने अपनी निडरता का परिचय तब ही दिया था जब उन्होंने इंदिरा गांधी की कार जो कि नो पार्किंग में थी, उसका चलान काटा था। जबकि केजरीवाल के रिकार्ड में अब तक ऐसा कोई वाक्या नहीं है।
5. पिछले चालीस सालों से किरण बेदी दि्ल्ली से जुड़ी हुई हैं, देश की हर महिला के लिए वो एक रोल मॉडल हैं जबकि केजरीवाल लोगों के हीरो तो रहे हैं लेकिन इस हीरो ने अभी तक मिली अपनी सारी तारीफों को केवल छोड़ा ही है, चाहे वो अन्ना के अर्जुन बनकर उन्हें नसीब हुई हो या फिर दिल्ली के सीएम बनकर। लेकिन इन तारीफों को वो लंबे समय तक सहेज कर रख नहीं पाये हैं।
फिलहाल केजरीवाल बनाम किरण बेदी का फैसला अब जनता के हाथ में हैं देखते हैं कि जनता 10 फरवरी को क्या फैसला सुनाती है?












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