केरल VC इस्तीफा मामला: 'BJP हित में गर्वनर का फैसला, विवि में भी RSS एजेंडे को लाने की कोशिश', बोले CPIM नेता
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अब तक 11 विश्वविद्यालयों के वीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके बाद इस पर काफी विवाद बढ़ गया है। सीपीआईएम नेता एमवी गोविंदन मास्टर ने इसको लेकर राज्यपाल पर निशाना साधा है।
Kerala VC resignation case: केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अब तक 11 विश्वविद्यालयों के वीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके बाद इस पर काफी विवाद बढ़ गया है। सीपीआईएम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन मास्टर ने इसको लेकर राज्यपाल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते से केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के फैसले आरएसएस और बीजेपी के पक्ष में हैं। अब वे विश्वविद्यालयों में भी अपने एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय संवैधानिक नहीं हैं।

इससे पहले राज्यपाल ने 9 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस्तीफा देने की मांग की है। साथ ही कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। वहीं आज राज्यपाल ने दो और कुलपतियों को नोटिस जारी किया है। वीसी से यह बताने के लिए कहा कि उनकी नियुक्तियों को "अवैध" क्यों नहीं माना जाना चाहिए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय के कुलपतियों की भर्ती राज्य को यूजीसी के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
राज्यपाल पर लगाया गंभीर आरोप
इसके बाद राजभवन द्वारा हाल ही में इसको लेकर कार्रवाई की गई। राज्यपाल के इस कार्रवाई से पिनराई विजयन और आरिफ मोहम्मद खान को बीच रिश्ते में और तल्खी बढ़ गई है। केरल के मुख्यमंत्री ने राज्यपाल पर "संघ के एजेंडे" को राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल करने का आरोप लगाया है।
सरकार की सिफारिश पर वीसी की हुई थी नियुक्ति
केरल यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी के वीसी साजी गोपीनाथ और श्रीनारायणगुरु ओपन यूनिवर्सिटी के वीसी पीएम मुबारक पाशा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया है जिसमें केटीयू वीसी की नियुक्ति प्रक्रियात्मक उल्लंघन के लिए रद्द कर दी गई थी। कुलपतियों को 4 नवंबर को या उससे पहले जवाब देने के लिए कहा गया था। कुलपतियों को सरकार की सिफारिशों के आधार पर कुलपतियों द्वारा नियुक्त किया गया था, जो यूजीसी के नियमों के तहत नहीं किया गया है।
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