Kerala Tanur Boat Tragedy: नाव में लाइफ जैकेट के बिना 40 पर्यटक, 'मौत की टिकट' की जिम्मेदारी किसकी
Kerala Tanur Boat Tragedy: समुद्र तट से 300 मीटर दूर डूबी नाव में लाइफ जैकेट के बिना 40 पर्यटकों के सवार होने की बात सामने आई है। हादसे के बाद सवाल ये कि क्या इन्हें 'मौत की टिकट' दी गई। हादसे की जिम्मेदारी किसकी?

केरल की तनूर नाव त्रासदी (Kerala Tanur Boat Tragedy) दर्जनों परिवारों को गहरे घाव दे गया है। दुर्घटना के कारणों की सरकारी जांच होगी, लेकिन हादसे के तत्काल बाद लोगों ने नाव में ओवरलोड के आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों ने निर्धारित समय के बाद भी नाव के संचालन का आरोप लगाया है।
Kerala Tanur Boat Tragedy: केरल के मलप्पुरम में हाउसबोट डूबने का कारण 18 लोगों की मौत हुई। तनूर में हुए इस हृदयविदारक हादसे के बाद मुख्यमंत्री विजयन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने शोक प्रकट किया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
शाम 6 बजे के बाद नावों पर रोक!
मल्लपुरम के तनूर में स्थानीय निवासियों ने नाव संचालन में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल सरकार ने निर्देश दिया है कि छह बजे के बाद टूरिस्ट बोट नहीं चलायी जानी चाहिए।
किस संचालक की नाव डूबी
तनूर के हादसे में शिंकारा नाव डूबने से हुई है। इस सर्विस का संचालन तनूर के मूल निवासी नासिर करते हैं। हादसे की जिम्मेदारी किसकी है, इस पर बहस रेस्क्यू के बाद होगी। सरकारी जांच में दोष भी साबित होगा, लेकिन नाव का स्वामित्व रखने वाली शिंकारा नाव कंपनी पर हादसे के बाद शुरुआती आरोप गंभीर हैं।
ओवललोडेड हाउसबोड, लाइफ जैकेट भी नहीं!
वनइंडिया केरल की रिपोर्ट के अनुसार रविवार होने के कारण समुद्र तट पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पर्यटक पहुंच गए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। दुर्घटना में डबल डेकर नाव डूबी है। 40 से ज्यादा लोगों को टिकट देने लेकिन यात्रियों को लाइफ जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराने के भी आरोप लगे हैं।
कैसे डूबी नाव
नाव डूबने के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार समुद्री किनारे से 300 मीटर की दूरी पर डूबने से पहले बोट बाईं ओर झुकी। रात, समुद्र और रोशनी की कमी के कारण बचाव अभियान शुरू में बाधित हुआ। पहले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान छोटी नावों की मदद ली गई। हादसा झील और समुद्र के संगम पर हुआ।
किन अस्पतालों में भेजे गए लोग
रेस्क्यू टीम और दमकल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कोझिकोड और मलप्पुरम से अग्निशमन दल और आपदा प्रबंधन दल ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। लोगों को कोट्टाक्कल, तिरूर और तनूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश
मुख्यमंत्री विजयन ने अधिकारियों को बचाव कार्य संबंधी दिशानिर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज ने स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को घायलों का विशेषज्ञ उपचार मुहैया कराने का निर्देश दिया और कहा, मनचेरी मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पतालों और आसपास के निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
40 लोगों को मिली बोट की टिकट
तनूर नगर पालिका पार्षद निजामुद्दीन ने बताया कि करीब 40 लोगों को टिकट देकर नाव में बैठाया गया था। नाव को किनारे के करीब लाने के प्रयास जारी हैं। नाव को तोड़कर अंदर फंसे लोगों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। मलप्पुरम के एसपी ने बताया कि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।












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