गृह युद्ध् में फंसे यमन से वापस आने को तैयार नहीं केरल की नर्सें

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) यमन में गृह युद्ध चल रहा है, पर वहां पर कामकाज के लिए गई भारतीय नर्से वापस स्वदेश लौटने के लिए तैयार नहीं हैं। यमन में रहने पर उन्हें मोटी पगार मिलती है, घर लौटने पर आर्थिक संकट से उन्हें गुजरना पड सकता है। इसलिए बहुत सी केरल से संबंध रखने वाली नर्से स्वदेश लौटने को लेकर कोई बहुत उत्साहित नहीं हैं। यमन में करीब पांच हजार भारतीय हैं। इनमें आधी संख्या नर्सों की है। भारत सरकार वहां से नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश ला रही है।

विदेश मंत्रालय को मिली जानकारी के अनुसार, गृह युद्ध के बाद भी नर्से वहां पर रहना चाह रही हैं। भारतीय दूतावास के उनसे संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि केरल लौटने पर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। वे उस कर्ज को उतार नहीं सकेंगी जो उन्होंने या उनके परिवार ने लिया है।

पैसा नहीं बचेगा

कुछ नर्सों ने कहा कि उन्हें भारत में नौकरी तो मिल जाएगी, पर वहां पर उनके लिए पैसा बचाना कठिन होता है। कारण यह है बड़े शहरों में घर और ट्रांसपोर्ट पर बहुत खर्चा आता है। इस बीच,भारतीय वायुसेना ने यमन से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए पूरी मुस्तैदी से दो भारी परिवहन विमान तैनात कर दिए है।

भारतीय वायुसेना ने विगत बुधवार को वहां दो सी-17 ग्लोबमास्टर-3 विमान तैनात किए। ये विमान बुधवार की सुबह दिल्ली से उड़ान भर कर दिजिबोती पहुंचे। इन विमानों से यमन में फंसे लोगों को निकाल कर भारत लाया गया। लोगों को भारत लेकर आ रहा वायुसेना का पहला सी-17 विमान कोच्चि हवाई अड्डा पहुंचा। इसमें 168 यात्री सवार थे। दूसरा सी-17 विमान190 यात्रियों को लेकर मुंबई हवाई अड्डा पहुंचा।

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