केरल में अब नए सिरे से फिल्म मसौदा नीति, मलयालम सिनेमा पर आरोपों के बीच बड़ा कदम
केरल में मयालयम सिनेमा के दिग्गज आर्टिस्ट्स पर लग रहे आरोपों के बीच प्रदेश सरकार ने नई फिल्म मसौदा नीति बनाने का निर्णय लिया है। जिसके तहत केरल सरकार कम आयवर्ग के कलाकारों को प्रोत्साहित करने जा रही है। इस पहल के तहत कम सुविधा प्राप्त पृष्ठभूमि के फिल्म निर्माताओं और कलाकारों, जिसमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के आर्टिस्ट्स को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
केरल में पिनाराई विजयन सरकार की इस नई पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि इससे सिनेमा और थिएटर में रुच रखने युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। केरल के संस्कृति मंत्री, साजी चेरियन ने शुक्रवार को श्री थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं।

संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने फिल्म "चुरुल" के रिलीज के मौके पर कहा, "केरल राज्य फिल्म विकास निगम (केएसएफडीसी) द्वारा एससी/एसटी फिल्म निर्माताओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक परियोजना के तहत निर्मित एक फिल्म है, एससी/एसटी समुदायों ने शिक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जबकि सिनेमा में उनका प्रतिनिधित्व सीमित है।"
उन्होंन दावा किया की केरल सरकार एक करोड़ रुपये खर्च करके ऐसी नीति बनाने जा रही है, जो सभी वर्गों के आर्टिस्ट्स को एक नया प्लेटफॉर्म देगा, जो निम्न आयवर्ग को सहारा देगी।
बता दें कि राज्य सरकार ने पहले ही मलयालम सिनेमा के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। ऐसी ही एक पहल में राज्य की राजधानी में चितरंजली स्टूडियो का नवीनीकरण शामिल है, जिसे एक प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न हिस्सों में केएसएफडीसी सिनेमा का नवीनीकरण वर्तमान में चल रहा है।












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