एक्सीडेंट के बाद हुआ ब्रेन डेड, जाते-जाते भी कई लोगों को नई जिंदगी दे गए सुरेश

एक्सीडेंट के बाद हुआ ब्रेन डेड,

कोच्चि, 30 सितंबर: केरल के इडुक्की शहर के रहने वाले 46 साल के पीएम सुरेश की वजह से कई लोगों को नई जिंदगी मिलने जा रही है। हाल ही में एक एक्सीडेंट का शिकार हुए सुरेश को डॉक्टर ब्रेन डेड घोषित कर चुके हैं। जिसके बाद परिवार ने उनके अंग दान करने का फैसला लिया, जिससे कई को नया जीवन मिलेगा। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने सुरेश के परिवार के इस फैसले के लिए उनकी तारीफ की है।

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46 साल के सुरेश का 24 सितंबर को एक्सीडेंट हुआ था। मजदूरी करने वाले सुरेश वंदनमेडु में अपनी वर्कसाइट पर गिर गए थे। जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लग गई। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया लेकिन बाद में उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें राजागिरी में स्थानांतरित कर दिया गया। जहां उनकी हालत और बिगड़ गई और ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

केरल नेटवर्क फॉर ऑर्गन शेयरिंग (केएनओएस) ने बताया कि सुरेश के अंगों को कैडेवर अंग दान योजना के तहत दान किया गया था। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने सुरेश के परिवार के सदस्यों की उनके अंगदान करने के फैसले की सराहना की, जो उनके असामयिक निधन के चलते काफी मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं।

सुरेश की पत्नी बिंदू सुरेश और बच्चों अजेश, विनेश और वीना ने सुरेश की आंखें, लीवर और किडनी दान की हैं। किम्स अस्पताल में इलाज करा रहे गंभीर रूप से बीमार मरीज में उनका लीवर ट्रांसप्लांट किया जाएगा। एक किडनी कोट्टायम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक मरीज में और दूसरे को कोच्चि के लक्षेशोर अस्पताल में एक मरीज में प्रत्यारोपित किया जाएगा। आंखों को अंगमाली के लिटिल फ्लावर अस्पताल ले जाया जाएगा। इस तरह सुरेश कई लोगों को नई जिंदगी दे गए हैं।

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क्या है ब्रेन डेड होना

ब्रेन डेड होना मेडिकल की दुनिया में किसी व्यक्ति की उस शारीरिक अवस्था को कहते हैं, जब उसका दिमाग क्रिया और प्रतिक्रिया करना बंद कर देता है। इससे वह व्यक्ति जीवित तो रहता है लेकिन उसमें चेतना नहीं होती है। वह किसी तरह का रिऐक्शन नहीं देता है। कह सकते हैं कि ब्रेन डेड की स्थिति में शरीर के अंदर ब्रेन काम नहीं करता है जबकि बाकी के अंग जैसे हार्ट, लीवर, किडनी काम करते रहते हैं। इससे व्यक्ति का शरीर तो जिंदा रहता है लेकिन उसकी चेतना जीवित नहीं होती। उसे दर्द का अहसास तक नहीं होता। ब्रेन डेड की स्थिति में आमतौर पर वह सांस नहीं ले रहा होता, इसलिए ब्रेन डेड लोगों को वेंटिलेटर पर ही रखा जाता है ताकि उनकी सांस चलती रहे।

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