टूट की ओर बढ़ी बीजेपी की सहयोगी पार्टी, मोदी सरकार में शामिल होते ही क्यों खड़ा हुआ संकट?
मोदी सरकार में शामिल होते ही केरल में जनता दल (सेक्युलर) के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रदेश में अब जेडीएस पार्टी पूरी तरह से खत्म हो सकती है। यह हालात कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने की वजह से पैदा हुए हैं।
दरअसल, केरल में जेडीएस पिछले कई महीनों से विरोधियों का निशाना बन रहा था। राज्य में इस पार्टी का सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ के साथ गठबंधन है। लेकिन, अब इसकी प्रदेश इकाई ने फैसला किया है कि वह अब जेडीएस की जगह नई पार्टी का गठन करेगी।

बीजेपी की सहयोगी नहीं रहना चाहती पार्टी- केरल जेडीएस
जेडीएस प्रदेश इकाई ने यह कहते हुए ये फैसला किया कि वह उस पार्टी का हिस्सा नहीं रह सकती, जो बीजेपी की सहयोगी हो। केरल में जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष और एमएलए मैथ्यू टी थॉमस ने कहा, 'केरल में पार्टी नहीं चाहती कि उसे बीजेपी की सहयोगी के तौर पर जाना जाए।'
नई पार्टी बनेगी, जिसमें जेडीएस प्रदेश इकाई का विलय होगा- प्रदेश जेडीएस अध्यक्ष
उन्होंने कहा,' कानूनी पहलुओं पर मंथन के बाद हम इस तरह का फैसला लेंगे कि स्थानीय निकायों समेत पार्टी के सभी निर्वाचित सदस्य अपने पदों पर कायम रह सकें। एक नई पार्टी पंजीकृत की जाएगी और जेडीएस की प्रदेश इकाई का नई पार्टी में विलय कर दिया जाएगा।'
केरल में एलडीएफ सरकार में शामिल है जेडीएस
केरल में जेडीएस के दो एमएलए हैं। थॉमस के अलावा के कृष्णकुट्टी भी पार्टी विधायक हैं, जो अभी पिनराई विजयन सरकार में ऊर्जा मंत्री हैं। पिछले साल सितंबर में जब जेडीएस भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा बना था, तभी से कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ ने केरल में पार्टी को सरकार से बाहर करने के लिए सीपीएम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
मोदी सरकार में शामिल होते ही खड़ा हुआ संकट
उसके बाद से सीपीएम लगातार कोशिश कर रही थी कि या तो जेडीएस एलडीएफ सरकार से खुद ही निकल जाए या फिर प्रदेश इकाई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व (देवगौड़ा परिवार) से खुद को अलग कर ले। जेडीएस की प्रदेश इकाई ने तभी से पार्टी से नाता तोड़ने की बात कहनी शुरू कर दी थी, लेकिन वास्तव में ऐसा किया कभी नहीं।
लेकिन, जब एचडी कुमारस्वामी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए और इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्रालय का कार्यभार सभाल लिया तो सीपीएम को अन्य सहयोगियों के साथ-साथ विपक्ष का हमला झेलना मुश्किल हो गया।
कांग्रेस ने सीपीएम के खिलाफ खोला था मोर्चा
कांग्रेस ने तो यहां तक दावा करना शुरू कर दिया है कि कुमारस्वामी केरल में सीपीएम की 'मौन सहमति' से ही मोदी कैबिनेट में शामिल हुए हैं। केरल में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीसन ने कहा कि सीपीएम को 'खुलासा करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में जेडीएस के के कृष्णकुट्टी केरल कैबिनेट में बने हुए हैं।'
उनके मुताबिक, 'यह सीपीएम के दोहरे मापदंड को जाहिर करता है। सीएम विजयन को कांग्रेस पर संघ परिवार बीजेपी के साथ लड़ाई को लेकर लेक्चर देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विजयन अपनी कैबिनेट में एनडीए की सहयोगी को बचा रहे हैं। इससे पता चलता है कि केरल में भी एनडीए और एलडीएफ के बीच गठबंधन है।'
विपक्ष के इन हमलों का ही असर हुआ है कि आखिरकार जेडीएस का प्रदेश में टूट लगभग तय हो गया है। लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में जेडीएस को बीजेपी के साथ गठबंधन का फायदा मिला है और उसे 3 में से 2 सीटें जीतने का मौका मिला है; और 2 सांसद होने के बावजूद कुमारस्वामी को केंद्र में अहम मंत्रालय दिया गया है।












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