केरल में निपाह वायरस के पीछे चमगादड़? एनआईवी पुणे की जांच में मिला ये तथ्य
तिरुवनंतपुरम, 29 सितंबर: केरल के कोझीकोड में इस महीने निपाह वायरस के एक किशोर की मौत ने राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ी दी हैं। कोकिझाड़ में इस लड़के को निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि के करीब एक महीने बाद महीने बाद पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने अपने अध्ययन के आधार पर कहा है कि क्षेत्र से एकत्र किए गए चमगादड़ों के नमूनों की जांच में एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता चला है। जिसके बाद आईसीएमआर अब इन नमूनों पर आगे स्टडी करेगा।
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केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बुधवार को बताया है कि एनआईवी पुणे ने हमारी हमारी सरकार को सूचित किया है कि एक विशेष स्थान से चमगादड़ों से एकत्र किए गए कुछ नमूनों में निपाह वायरस के प्रति एंटीबॉडी की उपस्थिति पाई गई है। इस पर आईसीएमआर आगे अध्ययन कर रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि राज्य में निपाह वायरस का कोई नया मामला नहीं आया है।
कोकिझाड के पझूर गांव के 12 वर्षीय लड़के मोहम्मद हाशिम में निपाह वायरस संक्रमण मिला था। इसके बाद 5 सितंबर को संक्रमण के कारण उसकी मौत हो गई थी। एनआईवी पुणे की इस जांच ये चमगादड़ों में एंटीबॉडी का पता चलने से स्वास्थ्य विभाग की यह धारणा और मजबूत हो गई है कि लड़के को उनसे संक्रमण हुआ होगा। निपाह के फैलने के पीछे चमगादड़होने के दावे को भी इससे बल मिला है। बता दें कि मई, 2018 में केरल में सबसे पहले निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उस वक़्त इसकी वजह से 17 लोगों की जान गई थी। इसके बाद कोकिझाड़ में एक महीने पहले ये मामला सामने आया।
कितना खतरनाक है ये वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ निपाह वायरस इंसानों और जानवर दोनों में फैलता है। इसमें बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सूजन और मानसिक भ्रम की शिकायत होती है। संक्रमित व्यक्ति 24 से 48 घंटों के भीतर कॉमेटोज हो सकता है। इससे संक्रमितों में मृत्यु दर 9 से 75 प्रतिशत है। सबसे अहम बात ये है कि इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं बना है।












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