PFI भरे 5.20 करोड़ रुपए मुआवजा, दो हफ्ते का वक्त, प्रतिबंध के बाद इस वजह से चला केरल HC का डंडा
तिरुवनंतपुरम, 29 सितंबर: पॉपुलर फ्रंट इंडिया को बैन किए जाने के एक दिन बाद केरल हाई कोर्ट ने उसे 5.20 करोड़ रुपए मुआवजा भरने का आदेश दिया है। दरअसल, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के चलते प्रतिबंधित किए गए इस संगठन ने अवैध रूप से हड़ताल का आयोजन किया था, जिस दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इसके उपद्रवियों ने केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट के कई बसों में तोड़-फोड़ की थी और कई लोग इस दौरान घायल भी हो गए थे। अब केरल हाई कोर्ट ने पीएफआई से कहा है कि वह दो हफ्ते के भीतर मुआवजा भरे और अदालत ने गैर-कानूनी हड़ताल के दौरान हुई आपराधिक घटनाओं को लेकर इसके राज्य सचिव अब्दुल सत्तार को भी पार्टी बनाने का आदेश दिया है। सबसे बड़ी बात है कि मुआवजा चुकाने तक अदालत ने आरोपियों को जमानत नहीं देने की बात कह दी है।

पीएफआई भरे 5.20 करोड़ रुपए मुआवजा-केरल हाई कोर्ट
केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया प्रदेश सरकार के पास 5.20 करोड़ रुपए जमा करे, जो कि मुआवजे के तौर पर उसकी ओर से आयोजित हड़ताल के दौरान हुए नुकसान की एवज में केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने मांगा है। 23 सितंबर को पीएफआई की केरल यूनिट ने 12 घंटे की हड़ताल आयोजित की थी, जिस दौरान सरकारी बसों को काफी नुकसान पहुंचाया गया था। यह हड़ताल अब प्रतिबंधित हो चुके पीएफआई के नेताओं और उसके गुर्गों की गिरफ्तारी और उसके ठिकानों पर एनआईए की राष्ट्रव्यापा छापेमारी के खिलाफ की गई थी। देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल इस संगठन के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की यह कार्रवाई हड़ताल के एक दिन पहले ही हुई थी।

जबतक मुआवजा नहीं, तबतक जमानत नहीं- हाई कोर्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केरल हाई कोर्ट के जस्टिस एके जयसंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी ने आदेश दिया है कि 5.20 करोड़ रुपए की यह रकम दो हफ्तों के भीतर जमा किया जाए। केएसआरटीसी के वकील दीपू ठंकन ने कहा कि इस प्रतिबंधित संगठन के पूर्व राज्य सचिव अब्दुल सत्तार को राज्य भर में हड़ताल और संपत्ति को पहुंचाए गए नुकसान को लेकर दायर हुए सभी आपराधिक मुकदमों में पार्टी बनाने को भी कोर्ट ने कहा है। अदालत ने यहां तक कह दिया है कि जब तक प्रतिबंधित संगठन के आरोपियों की ओर से सारे नुकसान की भरपाई नहीं कर दी जाती है, किसी को भी जमानत नहीं मिलेगी।

केएसआरटीसी को 5,06,21,382 रुपए का वित्तीय नुकसान
केएसआरटीसी की ओर से अदालत में कहा गया था कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने बिना किसी पूर्व नोटिस के हड़ताल बुला ली थी, जो कि केरल हाई कोर्ट के 2019 के आदेश का उल्लंघन है। उस आदेश में अचानक हड़ताल को गैर-कानूनी घोषित किया गया था और कहा गया था कि किसी भी हड़ताल के लिए 7 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। केरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक पीएफआई की हिंसक हड़ताल की वजह से 58 बसों को नुकसान पहुंचा था और हिंसा की वजह से 10 कर्मचारी और यात्री जख्मी हुए थे। केएसआरटीसी ने कहा था कि पीएफआई की हड़ताल के चलते उसे 5,06,21,382 रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है।

एनआईए की पेड के खिलाफ पीएफआई ने बुलाई थी हड़ताल
इससे पहले 23 सितंबर को ही केरल हाई कोर्ट पीएफआई और अब्दुल सत्तार के खिलाफ राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान करने को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रयवाही शुरू कर दी थी। बता दें कि 22 सितंबर, 2022 को एनआईए और ईडी ने बाकी कई एजेंसियों के साथ मिलकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ अबतक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया था। इसके तहत 15 राज्यों के 93 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी और 100 से ज्यादा पीएफआई के नेताओं को देश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में धर-दबोचा गया था। केरल से सबसे ज्यादा 22 संदिग्ध गिरफ्तार हुए थे।

पीएफआई पर लग चुका है प्रतिबंध
लेकिन, 28 सितंबर यानी बुधवार को केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और इससे जुड़े 8 और संदिग्ध संगठनों पर 'आतंकवाद से तार' जुड़े होने के आरोपों के तहत अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ऐक्ट (यूएपीए) के तहत प्रतिबंध लगा दिया है। बाद में पीएफआई के केरल प्रदेश सचिव सत्तार ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गैर-कानूनी घोषित होने के बाद इस संगठन को भंग कर दिया गया है और वो इस फैसले का पालन करेंगे। बाद में सत्तार को गिरफ्तार कर लिया गया।












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