जानिए क्या है 'जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म', छात्र-छात्राओं के लिए केरल के स्कूल ने शुरू की अनोखी पहल
एर्नाकुलम, 20 नवंबर। स्कूलों में छात्र-छात्राओं के अलग-अलग ड्रेस को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिला है। अब केरल के एक सरकारी स्कूल ने स्टूडेंट्स के ड्रेस को लेकर बड़ा ही अच्छी पहल की शुरुआत की है। एर्नाकुलम जिले के वलयनचिरंगारा स्थित सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल में छात्र-छात्राओं को एक जैसी वर्दी पहनने की अनुमति दी गई है, हालांकि इसके लिए कुछ नियम भी तय किए गए हैं। स्कूल द्वारा निर्धारित वर्दी को 'जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म' कहा जाता है।

साल 2018 में आया था विचार
यह पहली बार है जब किसी सरकारी स्कूल में छात्र-छात्राओं को समान यूनिफॉर्म पहनने की आजादी दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में स्कूल की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका ने जेंडर न्यूट्रल यूनिफॉर्म की नीति पेश की थी। इसके तहत छात्रों और छात्राओं के लिए शर्ट और तीन-चौथाई पतलून तय किया गया। इस तरह के ड्रेस में स्टूडेंट्स को किसी भी गतिविधि को करने में दिक्कत नहीं आती।

अन्य स्कूल भी अपना रहे इस तरह की पहल
यह आईडिया अब धीरे-धीरे केरल से अन्य स्कूलों में भी फैलता जा रहा है। लोअर प्राइमरी स्कूल के बच्चे भी अपनी यूनिफॉर्म से काफी खुश हैं। सोशल मीडिया पर अब केरल का यह स्कूल और वहां की यूनिफॉर्म चर्चा का विषय बन गई है। यूनिफॉर्म की इस नीति को पेश करने वालीं पूर्व प्रधानाध्यापिका सी राजी का कहना है कि यह स्कूल अच्छी सोच वाला है, यहां लैंगिक समानता मुख्य विषय था। सभी ने स्कूल में नीति लागू करने के लिए कई कारकों के बारे में बात करते थे।

बच्चों के अभिभावकों ने भी किया समर्थन
सी राजी ने आगे कहा, लैंगिक तटस्थता के लिए इस तरह के स्कूल यूनिफॉर्म का ख्याल दिमाग में आया। स्कूल में अब बच्चे एक तरह की ही ड्रेस पहनते हैं। जब स्कर्ट की बात आती है तो लड़कियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस बदलाव के विचार पर सभी के साथ चर्चा की गई और हमें 90 फीसदी अभिभावकों का भी समर्थन मिला। मुझे अब गर्व और खुशी महसूस होती है कि इस पर चर्चा हो रही है।

105 साल पुराना है स्कूल
गौरतलब है कि छात्राओं को स्कर्ट पहनने पर शौचालय जाने, खेलने और अन्य गतिविधियों में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लैंगिक समानता की दृष्टि से स्कूल के ड्रेस में नया परिवर्तन सराहनीय है। स्कूल करीब 105 साल पुराना है इसलिए किसी ने इसका कोई खास विरोध नहीं किया। स्कूल प्रबंधन समिति के पूर्व अध्यक्ष एनपी अजयकुमार ने कहा, 'हमारे इरादे से इसे और अधिक मान्यता मिली।' स्कूल की हेडमास्टर प्रभारी सुमा केपी ने कहा, वर्दी को नया रूप देने के पीछे बड़ा कारण यह है कि लड़के और लड़कियों को समान स्वतंत्रता और खुशी दी जा सके।
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