CAA के विरोध में केरल के CM ने 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा पत्र
नई दिल्ली। केरल विधानसभा द्वारा विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द करने का हाल ही प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 11 राज्यों के अपने समकक्षों को पत्र लिखकर इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने के आह्वान किया है। पिनराई विजयन ने इन राज्यों को मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कहा कि धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है। लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिये सभी भारतीयों का एकजुट होना समय की मांग है।
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ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य मुख्यमंत्रियों को लिखे एक पत्र में, विजयन ने कहा, "हमारे समाज के एक बड़े वर्गों के बीच नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के परिणामों को आशंकाएं पैदा हो गई हैं। अब लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिये सभी भारतीयों का एकजुट होना समय की मांग है। पिनराई विजयन ने ये पत्र झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश, पुदुचेरी, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और ओडिशा को राज्य प्रमुखों को भेजा है।
पत्र में उन्होंने सीएए के खिलाफ केरल विधानसभा के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि बाकी राज्य भी इस तरह के कदम पर विचार कर सकते हैं। विवादास्पद संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ केरल विधानसभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित किए जाने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस बारे में भाजपा की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि राज्य विधानसभा के अपने विशेषाधिकार होते हैं।
हालांकि, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का कहना है कि केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव असंवैधानिक है और इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है। केरल के राज्यपाल ने कहा, नागरिकता का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। ये लोग उन चीजों में क्यों उलझे हैं जो कि केरल का मुद्दा है ही नहीं? वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह विवादित नागरिकता संशोधन कानून में बदलाव के लिए केरल विधानसभा में पास किए गए प्रस्ताव के पक्ष हैं।












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