हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली में होने वाले प्रदूषण पर केजरीवाल गंभीर, मंत्री जावड़ेकर को लिखी चिट्ठी
पराली जलाने से दिल्ली में होने वाले प्रदूषण पर केजरीवाल गंभीर, मंत्री जावड़ेकर को लिखी चिट्ठी
नई दिल्ली। जाड़े के मौसम में हर बार दिल्ली जबरदस्त प्रदूषण की समस्या से जूझता है। दिल्ली में हर बार प्रदूषण में बढ़ोत्तरी में बहुत बड़ा योगदान पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में पराली जलने से उठने वाले धुएं से होती है। यही कारण है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस समस्या को लेकर गंभीर हो चुके हैं।

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दिल्ली सीएम केजरीवाल ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को स्टबल बर्निंग मुद्दे पर पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में दिल्ली और आस-पास के राज्यों में आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित एक तकनीक के उपयोग के बारे में जानकारी दी है।
केजरीवाल ने पंजाब, हरियाणा के सीमएम को भी लिखा पत्र
बता दें इससे पहले केजरीवाल ने पराली जलने से होने वाले प्रदूषण को लेकर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल पराली जलाने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को भी लिखा है जिससे आने वाले समय में दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने वाले इस पराली को जलाने से रोका जा सके।
सीएम ने नई तकनीक के बारे में दी जानकारी
बता दें धान की कटाई के बाद पराली जलना प्रारंभ हो गया है। पंजाब और हरियाणा में पराली जलने से निकलने वाला धुआं हर साल नवंबर में दिल्ली के वायु को तेजी से प्रदूषित करता है। केजरीवाल ने अपने पत्र में एआरएआई पूसा (Pusa) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा पराली के निस्तारण को लेकर विकसित की नई तकनीक के बारे में बताया है। पत्र में लिखा है कि हालांकि वो दिल्ली में इस तकनीक का प्रयोग अधिक से अधिक करवाने की कोशिश करेंगे और आशा करते हैं कि अन्य राज्य और केंद्र सरकार मिलकर भी पराली निस्तारण को लेकर विकसित की गई इस प्रकार की तकनीकों के प्रयोग को बढ़ावा देंगी ताकि वायु प्रदूषण से बचा जा सके।
पूसा डीकंपोजर के बारे में दी जानकारी
केजरीवाल ने इस तकनीक के लाइव डेमोंसट्रेशन के लिए पूसा परिसर का दौरा किया। पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा पराली के निस्तारण को लेकर विकसित की नई तकनीक का लाइव डेमो देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकारों को फसल के अवशेष को जलाने की समस्या का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। पराली निस्तारण की यह तकनीक पूसा डीकंपोजर कहीं जाती है जिसमें फसल के अवशेषों को सड़ाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। फसल वाली खेतों में छिड़काव किया जाता है और 8 से 10 दिनों में फसल के डंठल के विघटन को तय करने और जलाने की आवश्यकता को रोकने के लिए खेतों में छिड़काव किया जाता है। इसके द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट भी खत्म हो जाते हैं।
तत्काल कड़े कदम उठाने की गुजारिश
केजीवाल ने अपने पत्र में लिखा है कि लोगों का स्वास्थ्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पूरे उत्तर भारत में सर्दियों में वायु प्रदूषण का उच्च स्तर होता है। जिससे कारण हर साल लोग परेशान होते हैं विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए तत्काल कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। सभी सरकारी एजेंसियों और दिल्ली के लोगों के निरंतर प्रयासों के कारण दिल्ली आज उन कुछ शहरों में शामिल है, जहां प्रदूषण (pollution) पिछले 4 वर्षों में 25 प्रतिशत तक कम हुआ है।
केजरीवाल सरकार कर रही ये प्रयास
मुख्यमंत्री ने पहले ही सर्दियों में फसल जलने के कारण वायु गुणवत्ता बिगड़ने की समस्या से निपटने के लिए 7 सूत्री पराली प्रधान कार्य योजना और 5 सूत्री शीतकालीन कार्य योजना की घोषणा की है. 50 लाख मास्क की खरीद शुरू हो गई है और ऑड-ईवन योजना पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा दीपावली पर पटाखे न जलाने के लिए राज्य सरकार लोगों को जागरुक करेगी। केजरीवाल ने पत्र के अंत में लिखा है कि मेरा निवेदन है कि आपकी सरकार इस बार जरूर यह सुनिश्चित करेगी कि पराली जलाने पर तत्काल रोक लगे. यही एक मात्र तरीका है, जिससे हम पंजाब और दिल्ली के लोगों के लिए अच्छे स्वास्थ्य की अपनी जिम्मेदारी को पूरा कर सकते हैं।












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