योजनाओं और विकास की बात छोड़ केसीआर चुनाव प्रचार में तेलंगाना की भावनाओं का ले रहे हैं सहारा
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के लिए सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सुप्रीमो के.चंद्रशेखर राव वोटरों को लुभाने के लिए एक बार फिर तेलंगाना की भावनाओं को सहारा ले रहे हैं। चुनाव प्रचार की शुरूआत में केसीआर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और उनकी सरकार में राज्य के विकास के बारे में बात कर रहे थे वहीं लेकिन कांग्रेस के कारण फिर से तेलंगाना राज्य की भावनाओं पर बात कर हैं।

केसीआर ने अपनी रणनीति पर पुनर्विचार तब किया जब कांग्रेस ने कर्नाटक की जीत के बाद तेलंगाना में पुनरुत्थान दिखाना शुरू कर दिया है और उससे बीआरएस का मुख्य मुकाबला दिखने लगा तो कांग्रेस को कुंद करने के प्रयास में केसीआर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए तेलंगाना की भावनाओं का सहारा ले रहे हैं।
चुनावी बैठाकों में केसीआर इस बारे में बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के हिस्से के रूप में संबंधित क्षेत्र को कैसे "कष्ट" झेलना पड़ा, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस जीतती है तो स्थिति फिर से वैसी ही हो जाएगी।
तेलंगाना राज्य आंदा्ेलन का प्रमुख चेहरा रहे केसीआर ने अपने अभियान के बाद से ही तेलंगाना के क्षेत्रीय गौरव का मुद्दा उठा रहे हैं। जिसमें राज्य भर में 41 रैलियां भी शामिल है। केसीआर ने अपनी रैलियों में याद दिलाया कि कैसे अगल तेलंगाना राज्य के आंदोलन के लिए किए गए आंदोलन मे उन्होंने लोगों की दुर्दशा का पता लगाने के लिए जिले के हर कोने का दौरा किया था।
उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना कई लोगों के बलिदान से बना है। केसीआर ने दिवंगत तेलंगाना विचारक के जयशंकर का भी जिक्र किया और कहा कि प्रोफेसर के सुझाव पर ही उन्होंने महबूबनगर से चुनाव लड़ा था। इसके साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि महबूबनगर जिला भूख और सूखे का सामना कर रहा था, और हम पीड़ा देखकर रो पड़े।
केसीआर ने पिछली चार रैलियां की जिसमें उन्होंने जनता को समझाया कि कांग्रेस पार्टी पर भरोसा मत करना अगर वा राज्य में जीत गई तो तबाही मच जाएगी। तेलंगाना बर्बाद हो जाएगा। इसके अलावा राज्य आंदोलन से जो कुछ भी हासिल किया गया था, वह खो जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications