Kashi Tamil Sangamam 3.0: स्टार्ट-अप, इनोवेशन, रिसर्च ग्रुप ने सुब्रमण्यम भारती और मंदिरों के इतिहास को जाना
Kashi Tamil Sangamam : काशी तमिल संगमम-3 के तहत स्टार्ट-अप, इनोवेशन और रिसर्च ग्रुप के सदस्य हनुमान घाट पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा स्नान कर मां गंगा की पूजा की और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान मौजूद आचार्यों ने गंगा के विभिन्न घाटों के इतिहास की विस्तार से जानकारी दी।
15 फरवरी से 24 फरवरी तक काशी में एक बार फिर दो संस्कृति के संगम की साक्षी बनने की कहानी पूरे देश ने देखी-सुनी। इससे पहेल काशी तमिल संगमम 3.0 के अंतिम दिन स्टार्ट-अप, इनोवेशन, रिसर्च ग्रुप ने गंगा स्नान के बाद घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।

उन्हें मंदिरों के इतिहास, उनकी दिव्यता और भव्यता के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके पश्चात, तमिल मेहमानों ने हनुमान घाट स्थित सुब्रमण्यम भारती के घर का भ्रमण किया, जहां उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। दल के सदस्यों में ऐतिहासिक तथ्यों को जानने की विशेष रुचि देखी गई। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के घर के समीप स्थित पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और इससे संबंधित जानकारी प्राप्त की।
सुब्रमण्यम भारती के घर भ्रमण के बाद, दल कांची मठ पहुंचा और वहां के ऐतिहासिक महत्व को समझा। काशी में स्थित दक्षिण भारतीय मंदिरों को देखकर दल के सदस्य अत्यंत उत्साहित दिखे। पंडित वेंकट रमण घनपाठी ने कहा कि काशी और तमिलनाडु का संबंध बहुत गहरा और ऐतिहासिक है। यह समागम केवल एक पखवाड़े का नहीं, बल्कि सदियों पुराना रिश्ता दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि हनुमान घाट, केदारघाट और हरिश्चंद्र घाट पर तमिल संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। यहाँ दक्षिण भारत के हजारों परिवार बसे हैं, जो काशी और तमिलनाडु के संबंधों को मजबूत बनाते हैं। विशेष रूप से हनुमान घाट पर 150 से अधिक तमिल परिवार निवास करते हैं, और यहाँ की गलियों में प्रतिदिन काशी तमिल संगमम जैसा माहौल रहता है।
रमन स्वामी ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के कारण अब काशी, प्रयागराज और अयोध्या के धार्मिक स्थलों का दर्शन और अधिक सुगम हो गया है। उन्होंने बताया कि वे 2012 में भी काशी आए थे, लेकिन अब उन्हें काशी अधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित दिख रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर जाने का मार्ग भी अब काफी सरल हो गया है।
इस यात्रा से तमिलनाडु के प्रतिनिधिमंडल को काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने का अवसर मिला, और यह समागम दोनों राज्यों के ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने में सहायक होगा।
यूं तो इसका आयोजन केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय ने किया। इसमें सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार सहित कई दूसरी संस्थाओं का रहा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय और आईआईटी मद्रास विशेष साझेदार रहा। उसके साथ ही रेल मंत्रालय और विशेषकर आईआरसीटीसी, केंद्रीय खेल मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सहित केंद्र की कई विभागों का बेहतर समन्वय देखने को मिला। इसका उद्देश्य तमिलनाडु व काशी के बीच सदियों पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करना रहा। तमिलनाडु के शास्त्रीय व लोक कलाकारों, साहित्यकारों, उद्यमियों, किसानों, धर्मगुरुओं, खिलाड़ियों आदि के छोटे जत्थों में ढाई हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने उत्सव में भाग लिया।












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