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Karnataka: सरकार चुनने में महिलाएं निभाएंगी अहम रोल, जानें पार्टियों ने लुभाने के लिए क्‍या की है घोषणाएं

कर्नाटक में महिला वोटरों को लुभाने में राजनीतिक दल जुट चुके हैं जानिए राज्‍य में कितनी है महिला मतदाताओं की संख्‍या और उन्‍हें पार्टियां क्‍या दे रही हैं प्रलोभन?

womanvotar

Karnataka Elections: कर्नाटक विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 10 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव होंगे और 13 मई को चुनाव परिणाम घोषित होंगे। 2023 के चुनाव में कौन सी पार्टी सरकार बनाएंगी इसमें राज्‍य की महिला वोटरों की अहम भूमिका होगी। इसकी वजह है कि कर्नाटक में पुरुषों और महिलाओं के बीच लिंगानुपात का अंतर कम हो रहा है। यानी कर्नाटक में महिला मतदाताओं की संख्‍या बढ़ चुकी हैं। इसलिए इस चुनाव में राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। आइए जानते हैं महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस महिलाओं को क्‍या प्रलोभन दे रही हैं?

जानें महिला वोटरों की कितनी है कर्नाटक में संख्‍या

पहले बता दें 2013 और 2023 के बीच राज्य में महिला मतदाताओं की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। 13 जनवरी को जारी की गई अंतिम मतदाता सूची 2022 के अनुसार कर्नाटक के 33 में से कम से कम 15 चुनावी मंडलों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है।मतदाता सूची के अनुसार 2021 के बाद से मतदाताओं की संख्या में 3.27 लाख की वृद्धि हुई है और अब कर्नाटक में 5.25 करोड़ मतदाता हैं जिनमें 2.60 करोड़ महिलाएं और 4,715 अन्य श्रेणी में हैं।

इन निर्वाचन क्षेत्र में महिला वोटरों की अधिक है संख्‍या

कोप्पल, उडुपी, उत्तर कन्नड़, शिवमोग्गा, मैसूर, कोडागु, दक्षिण कन्नड़, बेलगावी, विजयपुरा, बगलकोट और कलबुर्गी सहित 17 मंडलों में महिला मतदाता पुरुषों की तुलना में अधिक हैं। 2023 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, उडुपी में सबसे अधिक लिंगानुपात 1,074 है, जबकि बेंगलुरु में सबसे कम 914 है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के समय ये संख्‍या 960 थी। 2015 के फाइनल रोल्स में फाइनल रोल्स की संख्या 963 थी।

कांग्रेस ने महिलाओं को दिया है ये प्रलोभन

महिला वोटरों की अधिक संख्‍या को देखते हुए पार्टियों ने महिला वोटरों को रिझाना अहम समझा है। कर्नाटक की प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने 16 जनवरी को घोषणा की कि परिवार की मुखिया हर महिला को 2,000 रुपये प्रति माह भत्ता दिया जाएगा। गृहलक्ष्मी के नाम से जानी जाने वाली इस योजना की घोषणा प्रियंका गांधी ने बेंगलुरु में एक रैली के दौरान की थी। हाालांकि कांग्रेस पिछले चुनाव में महिला वोटरों को लुभाने के लिए प्रेशर कुकर, डिनर सेट समेत अन्‍य चीजें बांट कर लुभा चुकी है। हालांकि अभी कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र में अभी महिलाओं को लुभाने के लिए और घोषणाएं कर सकती है।

भाजपा ने महिलाओंं से किया है ये वादा

कांग्रेस को कांउटर करते हुए भाजपा ने गृहिणी शक्ति योजना की घोषणा करते हुए पहले पन्ने पर विज्ञापन दिया, जिसके माध्यम से कम आय वाले परिवारों की गृहिणियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का ऐलान किया गया। COVID-19 और बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावित हुए हैं। बोम्मई सरकार के विज्ञापन में श्रीति सामर्थ्य योजना भी सूचीबद्ध है जिसका उद्देश्य महिला उद्यमियों के लिए है। सरकार ने अमृत स्व-सहायता सूक्ष्म उद्यम योजना को भी सूचीबद्ध किया, जिसके तहत कर्नाटक में 7,500 स्वयं सहायता समूहों को 1 लाख रुपये जारी किए गए।

आधी आबादी को केवल प्रलोभन ही मिला

हालांकि, कर्नाटक की राजनीति का इतिहास है कि इतनी अधिक आबादी होने के बावजूद उन्‍हें चुनाव के एक प्रमुख घटक के रूप में नहीं देखा गया, राजनीतिक दलों ने और उनके उम्मीदवारों ने केवल उन्‍हें प्रेशर कुकर, बर्तन, साड़ी समेत अन्‍य उपहार देकर उनके वोट बैंक को अपने पक्ष में करने का कार्य करते आए हैं। कर्नाटक की तुलना अगर उत्‍तर भारत से की जाए तो कर्नाटक में जहां महिला विधायकों की संख्‍या एकल संख्‍या में हैं वहीं हिंदी भाषी राज्यों में 10 प्रतिशत से अधिक महिला विधायक है जो जनता का प्रतिनिधित्‍व कर रही हैं।

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