कांग्रेस के 'संकटमोचक' के पास आखिरी मौका! क्या कुमारस्वामी के दबदबे को तोड़ पाएंगे डीके शिवकुमार?
कर्नाटक की राजनीति में कुछ समय पहले तक कांग्रेस के सबसे प्रभावी चेहरे के तौर पर देखे जाने वाले उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अभी अपने सियासत के सबसे चुनौती भरे दौर से गुजर रहे हैं। उनके पास कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का भी पद है और लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार से उनका जलवा फीका पड़ रहा है।
खैर, बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट के तहत आने वाली चन्नापट्टना विधानसभा उपचुनाव उनके लिए उम्मीद की आखिरी किरण साबति हो सकती है। कुछ समय पहले उन्होंने यहां से खुद ही चुनाव लड़ने का ताव दिखाया था, लेकिन बाद में वह असमंजस की स्थिति में आ गए और अभी तक स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं है।

चन्नापट्टना में दो वोक्कालिगा नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई!
खैर, अभी भी अगर वे चन्नापट्टना विधानसभा सीट से कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करवाने में सफल हो जाते हैं, तो उनके मुख्यमंत्री बनने का सपना बरकरार रह सकता है। लेकिन, उनकी दिक्कत ये है कि चन्नापट्टना में उन्हें वोक्कालिगा के एक और हेवीवेट और केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी का सामना करना पड़ रहा है।
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चन्नापट्टना सीट कुमारस्वामी के इस्तीफे की वजह से ही खाली हुई है, जो मांड्या लोकसभा सीट से चुनाव जीते हैं। कुमारस्वामी की तरह शिवकुमार भी वोक्कालिगा समुदाय के नेता है और इस वजह से यह चुनाव दोनों नेताओं के बीच छाया युद्ध में बदलता दिख रहा है।
कर्नाटक में कांग्रेस की हार के बाद शिवकुमार के सामने संकट
हाल तक बेंगलुरु से लेकर हैदराबाद और गुजरात से लेकर शिमला तक में डीके शिवकुमार कांग्रेस आला कमान के संकटमोचक माने जाते थे। लेकिन, लोकसभा चुनाव के नतीजों ने उन्हें ही चारों तरफ से संकट में घेरकर उनके सामने सियासी अंधेरा कर दिया है।
बेंगलुरु दक्षिण से चुनाव हार गए हैं शिवकुमार के भाई डीके सुरेश
चन्नापट्टना सीट राजधानी बेंगलुरु से करीब 50 किलोमीटर दूर है और बेंगलुरु रूरल लोकसभा के तहत आती है। यहां से शिवकुमार के भाई डीके सुरेश भी चुनाव नहीं जीत पाए, जो 2019 में राज्य से कांग्रेस के एक इकलौते सांसद थे।
चन्नापट्टना उपचुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई
चन्नापट्टना सीट से चुनाव जीतने का मतलब है कि वोक्कालिगा समाज के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर ठप्पा लगना और इसलिए यह चुनाव कुमारस्वामी और डीके दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है।
वोक्कालिगा बेल्ट में एक और हार डीके के करियर पर पड़ सकता है भारी
जिस तरह से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी में अपनी सीट सुरक्षित रखने के लिए चक्रव्यूह की रचना की है, उसके बाद डीके शिवकुमार के लिए वोक्कालिगा बेल्ट में एक और चुनावी हार झेल पाना संभव नहीं है। कुमारस्वामी 2018 और 2023 दोनों ही चुनाव में यहां से जीत दर्ज कर चुके हैं।
कुमारस्वामी ने एनडीए की जीत के लिए ताल ठोक दी है
हालांकि, एनडीए ने भी अभी तक इस सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं, लेकिन कुमारस्वामी ने अभी से यहां कैंप करना शुरू कर दिया है और हर हाल में गठबंधन के प्रत्याशी (जेडीएस-बीजेपी) की जीत सुनिश्चित करने के लिए ताल ठोक दी है।
बीजेपी नेता और पूर्व एमएलसी सीपी योगेश्वर ने कहा है, 'यहां से जिसे भी उतारा जाएगा, वह एनडीए का प्रत्याशी होगा या होगी। सभी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार की सफलता के लिए काम करना चाहिए।'
पुराने मैसूर इलाके में कांग्रेस की मिली है करारी शिकस्त
लोकसभा चुनावों में पुराने मैसूर क्षेत्र में बीजेपी-जेडीएस के शानदार प्रदर्शन ने कांग्रेस का मनोबल वैसे ही गिरा रखा है। गठबंधन ने क्षेत्र की 11 सीटों पर जोरदार प्रदर्शन किया और कांग्रेस सिर्फ हासन और चामराजनगर में ही जीत दर्ज कर सकी है।
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