कांग्रेस के 'संकटमोचक' उपचुनाव लड़ने का जोखिम लेंगे? चन्नापटना में डीके शिवकुमार के सामने क्या होगी चुनौती

Channapatna Assembly Byelection in Karnataka: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने एमएलए रहते हुए भी चन्नापटना विधानसभा उपचुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। वह चन्नापटना को अपने दिल के करीब बता रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी राजनीति भी यहीं से शुरू हुई है।

माना जा रहा है कि कांग्रेस के 'संकटमोचक' शिवकुमार ऐसा इसलिए सोच रहे हैं, ताकि वह वोक्कालिगा समुदाय में अपने प्रभाव को फिर से साबित कर सकें, जो हालिया लोकसभा चुनावों के बाद संदेह के घेरे में आ चुका है।

dk shivakumar

विधायक रहते हुए विधायकी पर नजर क्यों?
शिवकुमार 8 बार के विधायक हैं और जिस कनकपुरा सीट का वह अभी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहां से भी उनका यह चौथा कार्यकाल है। कर्नाटक में यह आम चर्चा है कि डिप्टी सीएम का लक्ष्य मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की कुर्सी है।

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वोक्कालिगा में अपने रसूख को फिर साबित करना चाहते हैं शिवकुमार!
ऐसे में जिस तरह से उन्होंने चन्नापटना उपचुनाव में दिलचस्पी दिखाई है, उससे लगता है कि वह इसके माध्यम से वोक्कालुगा समुदाय में अपने सियासी रसूख को एक बार फिर से कांग्रेस के अंदर मजबूती से दिखाना चाहते हैं, जो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से शक के घेरे में आ चुका है।

लोकसभा चुनाव में वोक्कालिगा इलाके में कांग्रेस की हुई करारी हार
लेकिन, जानकार मानते हैं कि लोकसभा चुनावों में भद पिटने के बाद उनके उपचुनाव लड़ने में बहुत बड़ा जोखिम है। शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं और लोकसभा चुनावों में उन्होंने इस समुदाय के लिए पार्टी से 8 टिकट झटक लिए। लेकिन, वोक्कालिगा हार्टलैंड में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा।

यहां तक कि अपने भाई और कांग्रेस के एकमात्र तत्कालीन लोकसभा सांसद डीके सुरेश की भी सीट नहीं बचा पाए। इसके चलते पार्टी के अंदर शिवकुमार के मंसूबे को बहुत बड़ा झटका लगा है।

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार उनके एक सहयोगी ने कहा, 'अब वे वोक्कालिगा समुदाय के एक प्रमुख नेता के तौर पर अपनी राजनीतिक स्थिति को फिर से मजबूती से रखने के लिए चन्नापटना से चुनाव लड़ने का जोखिम उठाने की सोच रहे हैं।'

एचडी कुमारस्वामी के इस्तीफे की वजह से खाली हुई है सीट
चन्नापटना विधानसभा सीट बारी-बारी से कांग्रेस और जेडीएस को मौका देती रही है। यह सीट जेडीएस नेता और पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के इस्तीफे की वजह से खाली हुई है, जो लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र में कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं। शिवकुमार के समर्थकों को लगता है कि यहां से उनकी जीत निश्चित है और इससे उनकी संभावनाओं के द्वार फिर से खुल सकते हैं।

चन्नापटना में हार का मतलब सियासत में सबकुछ खत्म- एक्सपर्ट
लेकिन, राजनीति के जानकार उनके लिए इसमें काफी जोखिम देख रहे हैं। मसलन, कर्नाटक की राजनीति की समझ रखने वाले विश्वास शेट्टी का कहना है, 'यहां पर हार का मतलब है शिवकुमार के करियर में ताबूत की आखिरी कील साबित होना, क्योंकि इससे उनके सीएम पद की महत्वाकांक्षा ही नहीं टूटेगी, बल्कि पार्टी में कद भी घट जाएगा। क्या सिद्दारमैया शिवकुमार को सपोर्ट करेंगे, यह जानते हुए कि यह आखिर उन्हीं पर भारी पड़ेगा, यह और भी बड़ा जोखिम है।'

शिवकुमार की जीत की संभावनाओं पर भी उठ रहे हैं सवाल
चुनाव विश्लेषक संदीप शास्त्री चन्नापटना में उनकी जीत की संभावनाओं को लेकर भी कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 'चन्नापटना से चुनाव लड़ना कुमारस्वामी को उनके गढ़ में चुनौती देने की तरह है। ऐसी अटकलें हैं कि उनके बेटे निखिल चुनाव लड़ सकते हैं।'

इस तरह से अगर डीके चन्नापटना उपचुनाव के मैदान में उतरते हैं तो यह उनके राजनीतिक जीवन के सबसे बड़ा सियासी जुए की तरह होगा। अगर जीत गए तो लोकसभा चुनावों में घटे हुए कद को संभालने का मौका होगा, लेकिन हार गए तो जीवन की सबसे बड़ी 'महत्वाकांक्षा' पर पानी भी फिर सकता है।

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