कर्नाटक में बोम्मई सरकार के मंत्री ईश्वरप्पा का इस्तीफा क्या भाजपा का बड़ा डैमेज कंट्रोल है?
बोम्मई सरकार के मंत्री ईश्वरप्पा का इस्तीफा क्या भाजपा का बड़ा डैमेज कंट्रोल है?
बेंगलुरू, 15 अप्रैल: कर्नाटक ग्रामीण विकास और पंचायत राज (आरडीपीआर) मंत्री के एस ईश्वरप्पा के खिलाफ एक सिविल ठेकेदार की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज होने के बाद मंत्री ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। भाजपा सरकार के मंत्रीमंडल में शामिल कद्दावर नेता के इस्तीफा देना क्या उनका अपना डिसीजन था या भाजपा आलाकमान की सोची समझी रणीति के तहत ये इस्तीाफा करवाया गया? कर्नाटक में इस सियासी घटना के क्या मायने हैं और इसका क्या असर पड़ सकता है? आइए जानते हैं.....

इस्तीफे से एक दिन पहले गुरुवार को ईश्वरप्पा ने आश्वासन दिया कि वह एक साजिश के तहत अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से निर्दोष साबित होंगे और निश्चित रूप से एक बार फिर मंत्री बनूंगा। उन्होंने कहा मेरे खिलाफ आरोप लगाया जा रहा है, मुझे स्वयं को निर्दोष साबित करते समय, अगर मैं मंत्री के रूप में जांच जारी रखता हूं, तो ऐसा महसूस होगा कि मैं जांच प्रभावित कर सकता हूं इसलिए मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि मैं निर्दोष निकलूंगा और निश्चित रूप से एक बार फिर मंत्री बनूंगा।
भाजपा आलाकमान का है ये फैसला
ईश्वरप्पा भले ही ये कह रहे हैं लेकिन उन्हें ये इस्तीफा भाजपा आलाकमान के आदेश पर देना पड़ा है। भाजपा उनके मंत्री पर लगे बड़े आरोपों को लेकर कर्नाटक में भाजपा की स्थिति को बिगाड़ना नहीं चाहती है और ना ही विपक्षी पार्टी कांग्रेस को इस मामले का फायदा उठाने का मौका देना चाहती है। मंत्री का इस्तीफा दिलवाकर भाजपा अपनी छवि खराब होने से बच चुकी है।
ठेकेदार की आत्महत्या के मामले ने बढ़ा दी थी भाजपा की मुश्किल
बता दें कर्नाटक में विपक्षी पार्टी ने ठेकेदार को आत्महत्या के लिए मंत्री ईश्वरप्पा द्वारा उकसाने के आरोप को लेकर लगातार हमले कर रही थी। जिसके कारण कर्नाटक में भाजपा बड़ी मुश्किल में पड़ गई थी।
भाजपा और कर्नाटक का लिंगायत समाज
इसके पीछे वजह है ये है कि कर्नाटक में भाजपा जिसे लिंगायत समाज का सपोर्ट है और जिस ठेकेदार ने आत्महत्या की वो प्रभावशाली लिंगायत जाति से था । ऐसे में ईश्वरप्पा का इस्तीफा भाजपा आलाकमान का यह बड़ा डैमेज कंट्रोल कदम है। ऐसा करके भाजपा ने लिंगायत समाज की नाराजगी से भाजपा को सुरक्षित कर लिया है।
जानें भाजपा आलाकमान को क्यों करना पड़ा इस मामले में दखल
गौरतलब है यह कदम ईश्वरप्पा के कुरुबा के समर्थन आधार को बीजेपी के साथ परेशान करेगा जो ओबीसी हैं। वहीं कांग्रेस नेता सिद्धरमैया कुरुबा जाति के एक बड़े नेता हैं, जिन्हें उनके बीच बड़ा समर्थन प्राप्त है। बोम्मई ईश्वरप्पा के खिलाफ इस मुद्दे पर डिसीजन के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं है, इसलिए आलाकमान का इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
चुनाव को लेकर भाजपा नहीं लेना चाहती कोई भी जोखिम
बता दें 2023 में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ऐसे में कर्नाटक जो भाजपा का गढ़ माना जाता है वो किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। वो भी जब ठेकेदार की आत्महत्या का कथित आरोप उनके सीनियर मंत्री पर लगा हो ? चूंकि पुलिस ने मंत्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर दी है ऐसे में भाजपा के लिए हर नुकसान की भरपाई इस इस्तीफे से करना अति आवश्यक हो गया था।
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