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Karnataka: रिपोर्ट जारी नहीं हुई, फिर कांग्रेस सरकार ने कैसे की 33% OBC आरक्षण की घोषणा?

कर्नाटक में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सरकार की ओर से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बयानों में ही काफी अंतर नजर आ रहा है। लेकिन, राज्य की कांग्रेस सरकार ने इस रिपोर्ट पर जारी असमंजस के बीच शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतों में ओबीसी आरक्षण की घोषणा करके गजब की 'चतुराई' दिखाई है।

कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए शहरी और पंचायती निकायों में 33% सीटें रिजर्व करने की फैसला किया है। गुरुवार को इसके बारे में कर्नाटक के कानून मंत्री एचके पाटिल ने बताया कि जस्टिस भक्तवत्सल आयोग ने पांच सिफारिशे की थीं, उनमें से कैबिनेट ने तीन को मंजूर किया है।

karnataka obc reservation

कर्नाटक के स्थानीय निकायों में 33% ओबीसी आरक्षण
हालांकि, कर्नाटक सरकार ने कहा है कि इस आरक्षण के बाद भी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समेत आरक्षित कोटा 50% की सीमा को पार नहीं करेगा। दरअसल, ओबीसी कोटा पर सुझाव देने के लिए पिछली बीजेपी सरकार ने ही मई 2022 में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के भक्तवत्सल की अगुआई में यह आयोग बनाया था। कांग्रेस सरकार ने इसी आयोग की सिफारिशों को 33% ओबीसी आरक्षण का आधार बनाया है।

जो रिपोर्ट जारी नहीं हुई, उसके आधार पर आरक्षण?
दिलचस्प बात ये है कि इस आयोग ने उस जातिगत जनगणना के आंकड़ों पर भरोसा करके अपनी सिफारिशें दी हुई हैं, जिसे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुटाए हैं। कमाल की बात है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की वह रिपोर्ट अभी भी जारी नहीं हुई है और कांग्रेस पार्टी और कर्नाटक सरकार की ओर से इसको लेकर अलग-अलग दलीलें दी जा रही हैं। यहां तक की उसमें 'तकनीकी त्रुटियों' तक की बात कही जा चुकी है।

पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर कांग्रेस में विरोधाभास
राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने तो कहा है कि उनकी सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जारी करने के लिए पार्टी आला कमान की हरी झंडी के इंतजार में है। जबकि, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया कह चुके हैं कि रिपोर्ट उन्हें मिली ही नहीं है और जब मिलेगी तो उसे देखने के बाद तय करेंगे। उधर कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जातिगत जनगणना को राष्ट्रीय मुद्दा बना रहे हैं।

यही नहीं कर्नाटक सरकार ने उसी जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर मिले सुझावों के बाद बेंगलुरु नगर निकाय बीबीएमपी में मेयर और डिप्टी मेयर का पद भी ओबीसी के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। राज्य सरकार कह चुकी है कि वह नवंबर तक बीबीएमपी का चुनाव करवाना चाहती है। ऐसे में यह सवाल उठ सकता है कि जो रिपोर्ट जारी भी नहीं हुई और सीएम सिद्दारमैया के मुताबिक उन्हें मिली तक नहीं है, फिर उसके आंकड़ों पर आधारित सुझावों पर कांग्रेस सरकार यह फैसला कैसे ले सकती है।

गौरतलब है कि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जातिगत जनगणना को मूल चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी की है। बिहार में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद विपक्ष के तेवर और चढ़े हुए हैं। कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष महिला आरक्षण में भी ओबीसी के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग कर रहा है। जबकि, कांग्रेस पहले इसका विरोध कर रही थी।

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