Karnataka: बेंगलुरु के लिए BJP ने बदली रणनीति, प्रवासी वोटर्स को लुभाने के लिए लाए गए UP-गुजरात के MLA
Karnataka poll, बीजेपी अब बेंगलुरु में अन्य राज्यों के रह रहे निवासियों को लुभाने में जुट गई है। बीजेपी ने इसके लिए एक नई रणनीति तैयार की है।

कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों में करीब 10 दिन का समय बचा है। राजनीतिक दल अपने पक्ष में वोटरों को लाने के लिए हर पैंतरा अपना रहे हैं। राज्य में इस बार कांग्रेस का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। वहीं बीजेपी सत्ता बरकरार रखने में जुटी हुई है।
सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी बीजेपी ने रणनीति में बदलाव किया है। विधानसभा चुनाव में बेंगलुरु में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए बीजेपी की निगाहें शहर की प्रवासी आबादी पर टिकी हैं।
बीजेपी ने बेंगलुरु के इन मतदाताओं को लुभाने के लिए उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों के 50 से अधिक युवा बीजेपी विधायकों, सांसदों और पदाधिकारियों को तैनात किया है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत दोनों से आने वाले लाखों प्रवासी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक की भूमिका में हैं।

भाजपा इस प्रवासी आबादी से जुड़ने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। कर्नाटक बीजेपी के सूत्रों ने पुष्टि की कि अन्य राज्यों के इन युवा नेताओं को तैनात करना पार्टी द्वारा अपनाई गई कई रणनीतियों में से एक है। वे उत्तर भारतीय नेताओं के जरिए इन्हें साधने की कोशिश कर रहे हैं।
उत्तर भारत से लाए गए ये नेता-विधायक
बीजेपी ने गुजरात के विधायक हार्दिक पटेल, मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख एमडी शर्मा, सूरत के विधायक प्रवीण घोघरी, महाराष्ट्र के विधायक विनोद तावड़े, झारखंड के नेता मनीष जायसवाल और कई अन्य नेताओं को बेंगलुरु के कई प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात किया है।
युवा बीजेपी नेताओं को इन विधानसभा सीटों में उतारने का उद्देश्य राज्य के बाहर की आबादी, विशेष रूप से उत्तर भारतीय राज्यों के लोगों के पार्टी से जोड़ना है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि, बेंगलुरु में रहने वाले उत्तर भारतीय निवासी मतदान से कई सालों से दूर रहते थे। हालांकि, इस बार कई लोगों ने शहर की चुनावी सूची में अपना नाम शामिल कराया है। खासकर बेंगलुरु दक्षिण और महादेवपुरा में।

ऐसे लुभाएंगे वोटरों को
अगर बात बेंगलुरु के जेपीनगर की करें तो यहां करीब 40 फीसदी आबादी माइग्रेंट है। जिसमें राजस्थान, यूपी, बिहार, कलकत्ता और अन्य नार्थ इंडिया की बड़ी आबादी रहती है। इस इलाके में राजस्थान से सबसे अधिक प्रवासी है। जो बिजनेस और आईटी सेक्टर की नौकरियों से जुड़े हुए हैं। ऐसा ही हाल तेजस्वी सूर्या का संसदीय क्षेत्र एचएसआर लेआउट का है। पार्टी ने अन्य राज्यों के बीजेपी नेताओं को हर निर्वाचन क्षेत्र में उतारा है। वे रोजाना जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं।
बीजेपी की रणनीति है कि, निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी (स्थानीय भाजपा प्रमुख) पार्टी के साथ संपर्क और प्रचार गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। जबकि बाहरी राज्यों से आए बीजेपी नेता बूथ स्तर पर पहुंचकर प्रवासी मतदाताओं से बातचीत के जरिए जुड़ने की कोशिश करें। इसी तरह केरल और तमिलनाडु के कुछ नेताओं को महादेवपुरा, सर्वज्ञ नगर और सीवी रमन नगर में तमिल और मलयालम भाषी आबादी के साथ संपर्क करने के लिए शहर में लाया गया है।

हालांकि बीजेपी के एक उम्मीदवार का मानना है कि प्रवासी आबादी वोक्कालिगा या ओबीसी जितनी प्रभावी नहीं हो सकती है। लेकिन बीटीएम लेआउट, महादेवपुरा, सीवी रमन नगर, एचएसआर लेआउट, बयातारायणपुरा, और बैंगलोर दक्षिण में औसतन 25,000-30,000 की प्रवासी आबादी है और उनका समर्थन महत्वपूर्ण है।
2018 में कांग्रेस 28 निर्वाचन क्षेत्रों में से 15 सीटें जीतकर सबसे आगे रही थी। हालांकि बाद में तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। बेंगलुरु के ये 28 निर्वाचन क्षेत्र अर्थव्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव दोनों के मामले में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। जो राज्य की राजनीति में काफी अहम स्थान रखते हैं।












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