Karnataka Politics: CM बदलने की अटकलों पर विराम! सिद्धारमैया-शिवकुमार की ज्वॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ
Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रही हलचल-क्या मुख्यमंत्री बदलेंगे, क्या "रोटेशनल सीएम फॉर्मूला" लागू होगा-इन सब पर शनिवार, 29 नवंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बड़ा संकेत दिया है।
दोनों नेताओं ने एक मंच पर आकर यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार में किसी तरह का मतभेद नहीं है और न ही नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई तत्काल चर्चा चल रही है। लेकिन क्या वाकई हालात इतने सरल हैं? बयानों के बीच छिपे राजनीतिक संकेत कुछ और कहानी बताते हैं।

CM सिद्धारमैया ने क्या कहा?
सीएम सिद्धारमैया ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि सरकार में किसी तरह का मतभेद नहीं है। वो और डीके शिवकुमार पूरी तरह एकजुट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा और दोनों नेता साथ मिलकर कांग्रेस को मजबूत करने पर ध्यान देंग।
इसके साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव में फिर सत्ता में लाने की रणनीति पर काम करेंगे। सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि आगामी 8 दिसंबर से शुरू होने वाले विंटर सेशन में विपक्ष का कैसे सामना किया जाए, इस पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उनका बयान मौजूदा राजनीतिक तनाव को कम करने का प्रयास माना जा रहा है।
डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
डीके शिवकुमार का बयान थोड़ा अलग स्वर लिए हुए दिखा, हम हाईकमान के फैसलों के बंधन में हैं। हम कांग्रेस के सैनिक हैं, और एकजुट होकर काम करेंगे। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कठिन दौर में है, इसलिए कर्नाटक कांग्रेस के लिए सबसे अहम राज्य है।
उन्होंने कहा कि 2023 चुनाव में हुए पावर-शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर बीजेपी और जेडीएस, राज्य में भ्रम फैला रहे हैं और कांग्रेस आने वाले सत्र में इसका करारा जवाब देगी। उनका "हाईकमान के आदेशों के बंधन में" वाला बयान साफ दिखाता है कि वे अपनी ओर से नाराज़गी जताना चाहते हैं, लेकिन नियंत्रण में रहते हुए।
आखिर इसका मतलब क्या है? बड़ा राजनीतिक संकेत
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य था-"हम एकजुट हैं, सीएम बदलने का सवाल अभी मत पूछिए।" लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर में तस्वीर थोड़ी जटिल दिखती है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहां सिद्धारमैया राहत वाली भाषा में संकेत दिया कि वे अपना कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं और विवाद शांत करने की कोशिश करते दिखे।
वहीं, डीके शिवकुमार "हाईकमान के बंधन" वाली लाइन बताती है कि उनके मन में अभी भी कुछ असंतोष है। समर्थकों की ओर से चल रही 2.5 साल के "रोटेशनल सीएम डील" की बात को वे पूरी तरह खारिज भी नहीं कर पाए
क्या अगला सीएम बदलने वाला है?
फिलहाल तो दोनों नेताओं ने "सब ठीक है" का संदेश दिया है। लेकिन ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला, डीके शिवकुमार के समर्थकों की सक्रियता, 1 दिसंबर को हाईकमान के साथ होने वाली बैठकें और 2028 चुनावों की रणनीति ये सभी संकेत बताते हैं कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, उसी पर अंतिम मुहर लगेगी। लेकिन अभी के लिए कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार में स्थिरता है और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खत्म किया जाए।
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