कर्नाटक में 14 जून तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है संक्रमण
बेंगलुरु, 3 मई। कर्नाटक में बढ़ते कोरोना वायरस के सक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने लॉकडाउन 14 जून तक बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 2 जून को ही संकेत दिया था राज्य में लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है। कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में संक्रमण लगातार बढ़ रहा है जिसकी वजह से लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे पहले कर्नाटक सरकार ने 24 मई से 7 जून तक दो हफ्तों के लिए लॉकडाउन बढ़ाए जाने का फैसला लिया था। हालांकि येदियुरप्पा ने निर्यात उद्योग में शामिल लोगों को राहत दी है।

गौरतलब है कि राज्य कोविड पैनल के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय थी कि लॉकडाउन कम से कम एक और सप्ताह के लिए जारी रहना चाहिए क्योंकि राज्य भर में सकारात्मकता दर अभी भी लगभग 15% है। राज्य की कोविड -19 तकनीकी सलाहकार समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सकारात्मकता दर 5% से नीचे और दैनिक मामलों की संख्या 5,000 से कम होनी चाहिए ताकि लॉकडाउन के प्रतिबंध में ढील दी जा सके। पिछले 61 दिनों में बेंगलुरु में कुल 7.2 लाख कोविड -19 मामले और 8,716 मौतें हुईं हैं।
विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की चेतावनी दी है क्योंकि राज्य में कोरोना की तीसरी लहर की उम्मीद है। 2020 में लॉकडाउन हटने के बाद, बेंगलुरु में अगस्त और सितंबर में मामलों में वृद्धि देखी गई। ऐसी आशंका है कि लॉकडाउन के कारण शहर छोड़ चुके प्रवासी कामगारों की वापसी से संक्रमण की एक नई लहर पैदा हो सकती है।
लॉकडाउन बढ़ाने पर नाराज ट्रेड एक्टविस्ट बोले हमें भी करने दो व्यापार - खोलो बाजार, मत बनाओ लाचार
वहीं कर्नाटक में लॉकडाउन बढ़ाए जाने पर व्यापारियों में भारी आक्रोश हैं। बेंगलुरु ट्रेड एक्टिविस्ट सज्जन राज मेहता ने कर्नाटक सरकार द्वारा लॉकडाउन बढ़ाए जानेपर कहा कितनी बड़ी विडंबना हैं कि सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती चाहे व्यावसायिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एक सुर में कितना ही दुःखडा रोये । प्रशासन क्यों सुनेगा जब प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी तनख्वाह मिले और उन्हें तो हरियाली ही नजर आएगी चारों ओर । जहां का राजा व्यापारी - वहां की प्रजा भिखारी अर्थात जिन्हें अपनी कुर्सी और स्वार्थ के परे सोचना ही नहीं हैं तो उन्हें प्रजा की पीड़ा कहां दर्द का आभास कराएगी। उन्होंने कहा हजारों व्यापारी जिनके मातहत लाखों परिवार हैं , चन्द महीनों में देश में करोड़ों बेरोजगारों की कतार में अभिवृद्धि करते नजर आएंगे । वाह रे अच्छे दिन - सबका साथ - सबका विकास कोरोना से लंबी लड़ाई की भेंट पेट्रोल - डीजल को शतक पार पहुंचाकर भी नहीं थकी । समय का ग्रहण तो सूरज और चांद भी झेलते हैं , पर कुशासन के ग्रहण के लिए जनता जनार्दन को बाध्य मत करिए ।












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