कर्नाटक सरकार ने कमजोर समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया कार्यक्रम
कर्नाटक सरकार ने कमजोर समुदायों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए कर्नाटक समावेशी आजीविका कार्यक्रम (KILP) की शुरुआत की है। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कौशल विकास, उद्यमिता और आजीविका विभाग के नेतृत्व में यह पहल शुरू में 10 जिलों के 20 तालुकों को कवर करेगी।

विकास सभा में इस कार्यक्रम को लॉन्च किया गया। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की मिशन निदेशक पीआई श्रीविद्या और BRAC इंटरनेशनल में भारत की कंट्री लीड श्वेता एस बनर्जी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्री शरण प्रकाश पाटिल और अतिरिक्त मुख्य सचिव उमा महादेवन की मौजूदगी में यह समझौता हुआ।
KILP का प्रारंभिक चरण और उद्देश्य
पायलट चरण का लक्ष्य 23 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ 4,000 परिवारों को सहायता प्रदान करना है। मंत्री पाटिल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि KILP का लक्ष्य ऐसे स्थायी आजीविका का सृजन करना है जो लो ह्यूमन डेवलेपमेंट इनडेक्स रैंकिंग(Low Human Development Index Ranking) वाले क्षेत्रों में अत्यंत गरीब परिवारों के लिए लैंगिक समानता और जलवायु-अनुकूल हो।
उमा महादेवन ने बताया कि इस कार्यक्रम की पहुंच काफ़ी बढ़ाने की योजना है। 2027 तक इसका लक्ष्य 50,000 अत्यंत गरीब परिवारों को कवर करना है और 2029 तक इसे 2,50,000 परिवारों तक बढ़ाना है।
लक्ष्य और सशक्तिकरण रणनीति
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से कमज़ोर समूहों, विशेषकर महिलाओं को लक्षित करता है। इसका उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण, आजीविका में वृद्धि, सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने और क्षमता निर्माण दृष्टिकोण का उपयोग करके आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाना है।
KILP को गरीबी, असमानता, क्षेत्रीय विषमता और आजीविका चुनौतियों जैसे मुद्दों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा, आय में वृद्धि, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच, लैंगिक समानता और सामाजिक सशक्तिकरण शामिल हैं।
कार्यान्वयन भागीदार और समर्थन
BRAC इंटरनेशनल एक राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU) और एक राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन PRADAN के माध्यम से जिला स्तरीय समन्वय इकाइयों के माध्यम से KILP को डिजाइन करने और लागू करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। लाभार्थियों के चयन में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत स्तरीय महासंघ और स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जानें कौन से क्षेत्र हुए हैं सलेक्ट
पायलट चरण में बागलकोट जिले के हुंगुंड और बादामी जैसे तालुके शामिल हैं, बीदर में औरद और कमलानगर; कलबुर्गी में कलगी और शाहाबाद; रायचूर में मास्की और सिरवार; यादगीर में वडगेरा और गुरमित्काल; कोप्पल में कनकगिरी और गंगावती; विजयपुरा में थलीकोट और अलमेल; विजयनगर में कुडलिगी और हरपनहल्ली; बल्लारी में काम्पली और कुरुगोडु; चामराजनगर में गुंडलुपेट और येलंदूर क्षेत्र शामिल है।












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