Karnataka हाईकोर्ट ने पंचमसाली आरक्षण पर लगाई गई रोक हटाई, अब भाजपा सरकार ले सकेगी फैसला
कर्नाटक की पंचसाल जाति जो लिंगगायत समुदाय के अंतर्गत आती है वो आरक्षण सूची 2 ए श्रेणी में शामिल करने की मांग लंबे समय से कर रही है। कोर्ट ने सरकार के इससे संबंधित फैसले पर रोक हटा कर भाजपा का रास्ता साफ कर दिया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार के लिए राहत की खबर ये है कि गुरुवार को हाई कोर्ट ने पंचसमाली जाति के लोगों को आरक्षण देने पर जो पहले रोक लगाई थी उसे हटा दी है। कोर्ट द्वारा रोक हटाए जाने के बाद अब कर्नाटक की भाजपा सरकार चुनाव से पहले इस माममे में फैसला ले सकेगी और इस समुदाय के वोटरों को खुश कर सकेगी।
आरक्षण पर फैसला लेने की भाजपा सरकार को मिली अनुमति
कर्नाटक सरकार को जाति आधारित आरक्षण सूची की मौजूदा श्रेणी 2Aमें अन्य समुदायों के लिए संवैधानिक रूप से गारंटीकृत कोटा को भंग नहीं करने का निर्देश देते हुए पंचमसाली लिंगायत सब-कास्ट के लिए आरक्षण पर निर्णय लेने की अनुमति दी है।
ये जाति लंबे समय से कर रही मांग
याद रहे कर्नाटक की पंचमसाली जाति लिंगगायत समुदाय के अंतर्गत आती है। ये राज्य की आरक्षण सूची 2 ए श्रेणी में अपनी जाति को शामिल करने की मांग कर रही है, लेकिन याचिकाकर्ता डीजी राघवेंद्र ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पंचमसाली जाति को आरक्षण सूची की 2ए श्रेणी में शामिल करने के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी।
पीआईएल में जताई गई थी ये आशंका
याचिका में बताई गई आशंकाओं में ये भी था कि पंचमसाली लिंगायत सब-कास्ट को मौजूदा श्रेणी 2A सूची में शामिल करने से श्रेणी 2A में मौजूदा जातियों के सदस्य प्रभावित होंगे। मेहता ने पीठ को स्पष्ट किया कि यह निर्णय पंचमसाली लिंगायत सब-कास्ट पर सरकार द्वारा उठाए गए निर्णय से श्रेणी 2ए में मौजूदा जातियों के लिए आरक्षण प्रभावित नहीं होगा।
पंचमसाली लिंगायत सब-कास्ट के लिए आरक्षण
12 जनवरी को कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोगी की पेश अंतरिम रिपोर्ट पर कोई भी कदम उठाने पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। कर्नाटक सरकार को जाति आधारित आरक्षण सूची की मौजूदा श्रेणी 2Aमें अन्य समुदायों के लिए संवैधानिक रूप से गारंटीकृत कोटा को भंग नहीं करने का निर्देश देते हुए पंचमसाली लिंगायत सब-कास्ट के लिए आरक्षण पर निर्णय लेने की अनुमति दी है।
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा ?
इस केस की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने बेंगलुरु के डीजी राघवेंद्र द्वारा दायर जनहित याचिका में पारित अपने पहले के अंतरिम आदेश को संशोधित करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने कहा कि लंबित याचिका का अंतिम फैसला पंचमसाली समुदाय पर सरकार द्वारा लिये गये निर्णय पर लागू होगा। अंतरिम आदेश में खंडपीठ ने राज्य सरकार को पंचमसाली लिंगायत उप-संप्रदाय को श्रेणी 2ए में शामिल करने की मांग के संबंध में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (केएससीबीसी) की अंतरिम रिपोर्ट पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया लेकिन अब यथास्थिति का यह आदेश हटा दिया गया है।
शीतकालीन सत्र में भाजपा ने की थी घोषणा
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा सरकार ने लिंगायतों और वोक्कालिगाओं को शामिल करने के लिए दो नई श्रेणियों जिसमें 2C और 2D के निर्माण करने की घोषणा की थी।
कर्नाटक में ओबीसी की है चार श्रेणियां
बता दें कर्नाटक राज्य में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्थिति के आधार पर ओबीसी की चार श्रेणियां हैं जो 2ए, 2बी, 3ए और 3बी हैं। इन समुदायों को श्रेणियों के आधार पर नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अधिमान्य आरक्षण मिलता है। जबकि 2A सबसे पिछड़े हैं, 2B मध्यम हैं, और उनसे थोड़ा ऊपर 3A और 3B हैं।












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