Ola-Uber-Rapido को लगा तगड़ा झटका! Karnataka HC ने कहा– राज्य में बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को परमिशन नहीं
Ola Uber Rapido ban Karnataka: कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार , 22 अगस्त को बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर बड़ा बयान दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य में किसी भी निजी एग्रीगेटर कंपनी (जैसे Ola, Uber, Rapidoआदि) को बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति नहीं दी गई है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार एग्रीगेटर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इस प्रक्रिया में व्यक्तिगत बाइक टैक्सी ड्राइवरों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश वीभू बखरू और जस्टिस सीएम जोशी की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब सरकार की ओर से बताया गया कि कुछ एग्रीगेटर ऐप्स ने बैन के बावजूद संचालन शुरू कर दिया है।

अदालत ने कहा कि उसने एग्रीगेटर्स को कोई सुरक्षा या छूट नहीं दी है और सरकार चाहे तो उनके खिलाफ कदम उठा सकती है।
बाइक टैक्सी लक्ज़री नहीं, बल्कि सस्ती और जरूरी सुविधा
मुख्य न्यायाधीश विभू बखरू और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की खंडपीठ ने कहा कि बाइक टैक्सी कोई विलासिता (Luxury) नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के लिए एक सस्ती और ज़रूरी 'लास्ट-माइल ट्रांसपोर्टेशन' सुविधा है। अदालत का यह अवलोकन उस समय आया जब राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने जानकारी दी कि हाल ही में बेंगलुरु में कुछ बाइक टैक्सी एग्रीगेटर ऐप्स ने सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं।
Karnataka HC bike taxi decision: सरकार को 'नीति पर गंभीर विचार' करने का सुझाव
एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई में अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि सरकार को इस मामले पर गंभीर विचार करना चाहिए क्योंकि हजारों लोगों की आजीविका इस पर निर्भर है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने 16 जून को राज्य में Ola, Uber, Rapido जैसी बाइक टैक्सियों पर बैन लगाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने एग्रीगेटर्स को किसी तरह की सुरक्षा प्रदान नहीं की है और सरकार चाहे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
कोर्ट ने कहा, "हमने कोई आदेश नहीं दिया है। अगर उन्होंने अपना बिज़नेस शुरू किया है तो आप कार्रवाई कर सकते हैं। हमने सिर्फ इतना कहा था कि व्यक्तिगत टैक्सी मालिकों के खिलाफ जल्दबाजी में कोई कदम न उठाया जाए। एग्रीगेटर्स को लेकर हमने कोई टिप्पणी नहीं की है।"
नीति की कमी और पूरी तरह बैन पर सवाल
20 जुलाई को कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य के पास बाइक टैक्सी के लिए कोई ठोस नीति नहीं है, लेकिन जल्द ही इस पर एक समग्र और ठोस निर्णय लिया जाएगा। इस पर अदालत ने सवाल उठाया था कि सरकार ने बाइक टैक्सी को पूरी तरह बैन क्यों किया, जबकि इसे नियंत्रित (Regulate) भी किया जा सकता था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने यहां तक कि बैटरी से चलने वाली बाइक टैक्सियों पर भी रोक लगा दी, जबकि 2014 तक इसके लिए राज्य में नीति मौजूद थी। इस तरह सरकार ने एक "वैध व्यापार" (legitimate trade) पर पाबंदी लगा दी है।
Ola-Uber-Rapido एग्रीगेटर्स और यूनियनों की अपील
हाईकोर्ट की यह सुनवाई ओला, उबर और रैपिडो जैसे निजी बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स और स्थानीय यूनियनों की अपील पर हो रही थी। इससे पहले अप्रैल 2025 में एकल न्यायाधीश ने इनके संचालन पर रोक लगा दी थी।
सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बाइक टैक्सियां यात्रियों के लिए असुरक्षित हैं और ये शहर के ट्रैफिक जाम को भी बढ़ाती हैं। वहीं, एग्रीगेटर्स और यूनियन का तर्क है कि यह सेवा लाखों लोगों के लिए सस्ता विकल्प है और हजारों युवाओं के लिए रोजगार का साधन भी।












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