कर्नाटक में कांग्रेस ने सिद्दारमैया को दिया आखिरी मौका! मुख्यमंत्री के सामने क्या हैं विकल्प?

कर्नाटक सरकार की आंतरिक गुटबाजी की वजह से राज्य प्रशासन पर काफी असर पड़ रहा है। इसको देखते हुए आखिरकार कांग्रेस आलाकमान ने वहां पार्टी में जारी दंगल में दखल दिया है।

माना जा रहा है कि आलाकमान की ओर से सभी गुटों को चेतावनी दी है कि संयम रखें, क्योंकि इस महीने विधानमंडल के मानसून सत्र का भी सामना करना है।

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कांग्रेस की गुटबाजी से सरकार के कामकाज पर असर
लोकसभा चुनावों में जब से कांग्रेस को कर्नाटक में करारी हार का सामना करना पड़ा है, सत्ताधारी कांग्रेस के सीएम सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों की गुटबाजी सार्वजनिक होने लगी है। इसकी वजह से सरकार की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। क्योंकि, बयानबाजी में सरकार के मंत्री भी शामिल हैं।

सीएम और डिप्टी सीएम हो चुके हैं दिल्ली तलब
इन सबको देखते हुए प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दिल्ली भी तलब होना पड़ गया। रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने पहुंचे। उससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री सिद्दारमैया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर आए थे।

सिद्दारमैया को मिला कैबिनेट फेरबदल का विकल्प?
माना जा रहा है कि सिद्दारमैया से कहा गया है कि वे अपने कैबिनेट में फेरबदल करें और उन नेताओं को जगह दें जो अबतक मंत्री बनने के इंतजार में बैठे हुए हैं। हालांकि, खुद सीएम इस दावे को खारिज कर रहे हैं। कांग्रेस के करीब 40 एमएलए इस इंतजार में बैठे बताए जाते हैं कि कब नन-परफॉर्मेंस के आधार पर कुछ मंत्री हटेंगे और उन्हें सरकार में जगह मिलेगी।

पार्टी में शांति बनाए रखने की नेताओं को मिली हिदायत
राज्य में कांग्रेसियों का एक वह गुट भी है, जो डीके शिवकुमार की जगह प्रदेश अध्यक्ष पर किसी दूसरे वरिष्ठ नेता को जगह दिए जाने की वकालत कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक फिलहाल पार्टी आलाकमान ने सिद्दारमैया और शिवकुमार दोनों को हिदायत दे दी है कि वह अपने-अपने समर्थकों को सार्वजनिक टिप्पणियां करने से परहेज करने की चेतावनी दे दें।

शिवकुमार के मुताबिक, 'खड़गे, सिद्दारमैया और मैं इस निर्णय पर पहुंचे हैं कि पार्टी के हित में कैसे काम करना है।' उनके मुताबिक,'किसी मंत्री,विधायक या किसी और व्यक्ति को सार्वजनिक तौर पर कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं है। अगर कोई भी पदाधिकारी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद के बारे में मीडिया से बात करना जारी रखता है, तो एआईसीसी और प्रदेश कांग्रसे दोनों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करना जरूरी हो जाएगा।'

हार की वजहों पर भी विचार करने की तैयारी!
इस बीच पार्टी ने यह भी तय किया है कि लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में पार्टी के प्रदर्शन का जायजा लेने के लिए दिग्गज नेता मुधसूदन मिस्त्री को भेजेगी। वहीं प्रदेश कांग्रेस भी सभी 28 संसदीय सीटों पर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम भेजने की योजना पर काम कर रही है।

पार्टी में चल रही गतिविधियों के बारे में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सीजी चंद्रशेखर ने कहा, 'इसका उद्देश्य मौजूदा मसलों के बारे में सभी पक्षों से सुनना और अनुशासन बहाल करना है, ताकि पार्टी को आने वाले चुनावों के लिए तैयार किया जा सके।'

दरअसल, लोकसभा चुनावों के रिजल्ट आने के बाद से ही तीन अतिरिक्त डिप्टी सीएम पद गठित करने की मांग हो रही है। यह मांग करने वालों में प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री हैं। इसी दौरान वोक्कालिगा संत की ओर से डीके शिवकुमार को सीएम बनाने की भी मांग होने लगी है तो लिंगायत संत ने भी अपने समुदाय के लिए इन पदों पर दावा ठोक दिया है।

क्या सिर्फ फेरबदल मात्र से ही निकल जाएगा समाधान?
कांग्रेस संगठन और सरकार में मचे इस घमासान के बीच अगर कुछ मंत्रियों को हटाकर वेटिंग लाइन में बैठे एमएलए को कुर्सी सौंपी जाती है, तब क्या हटाए जाने वाले नेता शांत रह पाएंगे, यह अभी से ही बड़ा सवाल बन चुका है।

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