कर्नाटक सरकार को नए आपराधिक कानूनों पर क्यों है आपत्ति, किनको बदलने की है तैयारी?

New Criminal Laws in India:कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने तय किया है कि वह तीन नए आपराधिक कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन करेगी। क्योंकि, सिद्दारमैया सरकार को लगता है कि सोमवार से देशभर में लागू हुए नए आपराधिक कानून के कुछ प्रावधान 'जन-विरोधी' और 'न्याय-विरोधी' हैं।

भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 1 जुलाई, 2024 से पूरे देश में लागू किया गया है।

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नए आपराधिक कानूनों में संशोधन करेगी कर्नाटक सरकार
पहले कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने कहा था कि नए कानूनों की तामील के लिए राज्य पुलिस को पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा था कि फीडबैक के बाद तय करेंगे कि क्या किसी प्रावधान में बदलाव की आवश्यकता तो नहीं है। लेकिन, कुछ ही देर बाद राज्य के कानून और संसदीय कार्यमंत्री एचके पाटिल ने सिद्दारमैया सरकार की योजना का खुलासा कर दिया।

कर्नाटक सरकार को नए आपराधिक कानूनों पर क्यों है आपत्ति?
पाटिल के दावे के मुताबिक, 'नए कानून के तहत सरकार की कार्रवाई और नीतियों के खिलाफ भूख हड़ताल करना एक अपराध है। यह हमारे स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों को कमतर करने जैसा है, जिन्होंने भूख हड़ताल को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था।'

उनके मुताबिक संविधान की समवर्ती सूची की 7वीं अनुसूची के तहत ऐसे संशोधन करने का राज्य सरकार को अधिकार है। जिन संशोधनों पर कांग्रेस सरकार की नजरें अटकी हैं, उनमें आरोपियों की पुलिस हिरासत की अवधि भी शामिल है।

पाटिल ने कहा, 'नए कानून पुलिस को आरोपियों को 90 दिनों तक अपनी हिरासत में रखने की अनमति देते हैं, खत्म हुए कानूनों में यह 15 ही दिन था। नब्बे दिन बहुत ही ज्यादा लंबा हो जाता है और हमनें इसकी अवधि कम करने का फैसला किया है।'

सिद्दारमैया सरकार को इन वजहों से भी खटक रहे हैं नए कानून
इसके अलावा कर्नाटक सरकार को संगठित अपराध के मामलों में आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसियों के स्वत: संज्ञान में लेकर तफ्तीश शुरू करने का प्रावधान भी पसंद नहीं आ रहा है और उसमें भी कांट-छांट की योजना है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने की शक्ति अदालत से पुलिस को देने के प्रावधान को बदलने पर भी विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार, 'इस प्रावधान के दुरुपयोग और पुलिस की मनमानी की गुंजाइश है।'

कर्नाटक ने तीनों आपराधिक कानूनों के हिंदी नाम पर भी जताई थी आपत्ति
कर्नाटक सरकार का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार को नए कानूनों को लेकर पहले ही 23 सुझाव भी भेजे थे, जिसे नजरअंदाज किया गया है।

मसलन, कर्नाटक ने संविधान के आर्टिकल 348 का हवाला देकर तीनों नए कानूनों का नाम अंग्रेजी में रखने का सुझाव दिया था और हिंदी नाम पर आपत्ति दर्ज की थी।

हमारे 23 सुझावों में से कोई नहीं माना गया- कर्नाटक सरकार
पाटिल ने आरोप लगाया है कि 'केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने 2023 में नए आपराधिक कानूनों के लिए सुझाव मांगे थे। उसी हिसाब से, राज्य सरकार ने 23 सुझाव दिए, जिनमें राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक और महात्मा गांधी का अपमान करने पर आपराधिक कार्यवाही शामिल है। लेकिन, उनमें से किसी को भी शामिल नहीं किया गया।'

कर्नाटक सरकार का दावा है कि केंद्र ने नए कानूनों पर वकीलों की राय को भी नहीं माना है और 'इससे सुविधा की जगह और परेशानी होगी, साथ ही असमंजस भी बढ़ेगी।'

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