कर्नाटक में महिलाओं की फ्री बस सेवा पड़ी महंगी? KSRTC के 295 करोड़ डूबे, किराए में भारी बढ़ोतरी की तैयारी
कर्नाटक में पिछले साल कांग्रेस सत्ता में आई थी तो सबसे पहले अपने चुनावी वादे के अनुसार शक्ति स्कीम के तहत महिलाओं को राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त में सफर करने की छूट दे दी थी। लेकिन, अब कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्टे कॉर्पोरेशन ने कहा है कि उसकी वित्तीय हालत इतनी खराब हो गई है कि अस्तित्व बचाना मुश्किल हो गया है।
कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्टे कॉर्पोरेशन ने (KSRTC) राज्य सरकार से कहा है कि बस किराए में बढ़ोतरी के अलावा अब उसके पास कोई उपाय नहीं रह गया है। इसके बिना निगम का टिक पाना असंभव है। उसने किराए में कम से कम 15-20% की बढ़ोतरी की मांग की है।

सिर्फ तीन महीने में ही KSRTC को 295 करोड़ का घाटा
KSRTC के चेयरमैन एसआर श्रीनिवास के मुताबिक निगम के बोर्ड ने बस का किराया बढ़ाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। उनका कहना है कि बस किराये में वृद्धि के बिना, इसका संचालन नामुकिन हो चुका है। उन्होंने खुलासा किया है कि चालू वित्त वर्ष में ही निगम को 295 करोड़ रुपए डूब चुके हैं।
बसों को चलाते रहने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी- KSRTC
उनके मुताबिक, 'पिछली बार किराए में बढ़ोतरी 2019-20 में की गई थी। उस समय डीजल का दाम 60 रुपए प्रति लीटर था और अब यह 93 रुपए लीटर हो चुका है। स्टाफ की सैलरी में वृद्धि, मेंटेंनेंस और अन्य खर्चों की वजह से संचालन लागत बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है। KSRTC जरूरी सेवाएं दे रहा है और इसे चलाते रखने के लिए किराए में संशोधन की आवश्यकता है।'
शक्ति स्कीम ने किया बेड़ा गर्क- NWKRTC
एक और मामले में नॉर्थ वेस्टर्न कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NWKRTC) के चेयरमैन राजू कागे ने निगम के नुकासन की वजह सीधे तौर पर शक्ति स्कीम को बता दिया है। यह योजना कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की ओर से दी गई पांच गारंटियों में से एक है।
इन यात्रियों की रक्षा कौन करेगा सरकार?
कर्नाटक सरकार का कहना है कि शक्ति स्कीम के तहत जो भी लागत आती है, उसकी भरपाई वो करती है। ऐसे में अगर किराए में बढ़ोतरी की जाती है तो सारा भार पुरुष यात्रियों पर आने वाला है। मतलब, जिन्हें किराया देना होगा, उनकी जेब पहले से कहीं ज्यादा ढीली होनी तय है।
उधर KSRTC का कहना है कि उसके पास 8,000 बसें हैं, जिनमें से ज्यादातर 9 लाख से 12 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। 450 एसी बसें तो 20 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल गई हैं।
इसे भी पढ़ें- बीजेपी की किन गलतियों की वजह से यूपी में जीता INDIA bloc? अनुप्रिया पटेल का बड़ा दावा
श्रीनिवास के मुताबिक, 'इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नई बसों की जरूरत है, जो कि बिना किराए में संशोधन के नहीं हो सकती। एक स्वायत्त संस्था होने के नाते हम हर वक्त सरकार पर निर्भर नहीं रह सकते।' बड़ा सवाल है कि जो परिवहन निगम घाटे की बोझ से चीं बोलने के कगार पर पहुंच चुका है, वहां मुफ्त यात्रा का वादा निभाना कब तक मुमकिन है? (इनपुट- पीटीआई)












Click it and Unblock the Notifications