Karnataka Elections: Digital Bribe EC के लिए बना बड़ा चैलेंज, निपटना आसान नहीं

Karnataka Elections में घूस और रिश्वत की खबरें आने लगी हैं। हालांकि, रंगे हाथ पकड़े जाने के डर से इस बार डिजिटल तरीके से लेनदेन हो रहा है, ऐसी खबरें हैं। इस नए तरीके के क्राइम को रोकना चुनाव आयोग के लिए बड़ा चैलेंज है।

Karnataka Elections Digital Bribe

Karnataka Elections के लिए 10 मई को वोटिंग होनी है। 13 मई को नतीजों का ऐलान भी हो जाएगा। इससे पहले Free and Fair Elections का वादा कर रहे निर्वाचन आयोग के सामने घूसखोरी कड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक चुनाव में धनबल का धड़ल्ले से इस्तेमाल होने की खबरों के बीच Digital Bribe Election Commission के लिए बड़ा चैलेंज बनकर उभरा है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि 'अदृश्य साधन' अधिक हैं जिनकी प्रमुख भूमिका होती है। इस समय काले धन को सफेद किया जाता है।

डिजिटल रिश्वत कर्नाटक चुनाव 2023 में चुनाव आयोग के लिए की कितनी परीक्षा ले रहा है, इसका अंदाजा इसी से होता है कि इस चुनाव में कम से कम 10 फीसदी से 15 फीसदी मुफ्त उपहार और भुगतान डिजिटल तरीके से होने का अनुमान है।

दरअसल, ऐप-आधारित डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन की बढ़ती संख्या, चुनाव आयोग के स्वतंत्र और निष्पक्ष के लक्ष्य के आड़े आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसा लगता है कि मतदान में शामिल लोगों ने मतदाताओं को पैसे देने के नए तरीके ढूंढ लिए हैं।

कर्नाटक चुनाव पर डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस चुनाव में कम से कम 10 फीसदी से 15 फीसदी मुफ्त उपहार दिए जाएंगे। इसके अलावा भुगतान डिजिटल तरीकों से हो सकते हैं।

इस खबर में खुफिया विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि वितरित की जाने वाली थोक नकदी पहले ही 'वितरण केंद्रों' तक पहुंच चुकी है। सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक दल किराने की दुकानों, पेट्रोल पंप, ठेकेदारों और अन्य केंद्रों की सेवा का उपयोग करते हैं।

इन केंद्रों पर उनके चालू खातों के माध्यम से दैनिक लेनदेन 3 लाख से 5 लाख रुपये से अधिक होता है। एक सूत्र ने कहा, 'पैसों के वितरण को दैनिक भुगतान के तौर पर दिखाया जाएगा।' डिजिटल भुगतान ऐप- GPay, PhonePe, भीम ऐप आदि का उपयोग किया जाता है।

बेंगलुरु में क्या हो रहा है

नाम न छापने की शर्त पर एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक में मतदान से पहले वाली रात को 'कटाल रात' (Kattal Raat)कहते हैं। इसी दौरान उम्मीदवारों ने कथित तौर पर अपने समर्थकों के माध्यम से नकदी वितरित की होगी।

पकड़े न जाएं इसलिए इस बार, मतदाता चिट, रसीद और उपहार वाउचर दे कर सकते हैं। इसके माध्यम से "अग्रिम वाउचर को भुनाया जा सकता हैं। चुनाव आयोग इस तरह के भुगतानों को ट्रैक करने में कठिनाइयों को स्वीकार करता है।

दैनिक रूप से होने वाली ऑनलाइन लेनदेन की भारी मात्रा और आवश्यक तकनीक की कमी के कारण ऐसे लोगों को पकड़ना बेहद मुश्किल है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार मीणा ने कहा कि उन्होंने इस तरह के लेनदेन को कम करने के लिए एक प्रक्रिया शुरू की है।

मीणा के हवाले से डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में कहा गया, इस तरह के भुगतानों को कम करने की सफलता कई कारकों पर निर्भर होती है। इसमें बैंक और ऑनलाइन भुगतान ऑपरेटर चुनाव आयोग को डेटा कैसे प्रदान करते हैं, इस पर काफी निर्भरता होती है।

निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार मीणा के अनुसार, आयोग ने प्रत्येक जिले में विश्लेषकों को नियुक्त किया है और बैंकों से आवश्यक डेटा प्रदान करने के लिए कहा है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री ने कहा कि हालिया रुझानों को देखते हुए, उन्हें उम्मीद है कि हर बड़ी पार्टी कर्नाटक में वोट हासिल करने के लिए अपनी जेब ढीली करेगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं।

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश कुमार आर ने कहा कि 15 दिन पहले, चुनाव आयोग ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के साथ एक बैठक की। इसी के माध्यम से तमाम UPI पेमेंट होते हैं। RBI और राज्य स्तर पर नोडल बैंकर्स एसोसिएशन के साथ भी मीटिंग हुई।

वेंकटेश के अनुसार, चुनाव से पहले रिश्वत के लिए UPI के इस्तेमाल के संबंध में डिजिटल भुगतान कंपनियां जैसे GPay, PhonePe, Airtel Payment, UPI, BHIM और अन्य के साथ भी बैठक हुई। आयोग ने उन्हें थोक लेनदेन की निगरानी करने को कहा।

UPI पेमेंट इंटरफेस पर यह जांचने के लिए भी कहा गया है कि क्या संदिग्ध लेन-देन लंबे समय से किए जा रहे हैं, या केवल हाल की घटनाएं हैं, जो चुनाव की घोषणा के बाद मार्च या अप्रैल में शुरू हुई हैं।

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    वेंकटेश ने बताया कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। बता दें कि कर्नाटक में 10 मई को वोटिंग में सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के अलावा जेडीएस के बीच मुख्य मुकाबला होगा।

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