Karnataka Elections: गुजरात फॉर्मूले पर नहीं चलेगी बीजेपी, कांग्रेस-जेडीएस से निपटने का खास प्लान!

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में बहुत कम समय बाकी है। किलेबंदी की कवायद के बीच भाजपा की तैयारियों के बारे में सूत्र का कहना है कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी गुजरात फॉर्मूले पर नहीं चलेगी। जानिए क्या है खास रणनीति

karnataka elections

Karnataka Elections BJP कैसे जीतेगी, इस पर तमाम सियासी रणनीतिकार मंथन कर रहे हैं। इसी बीच सूत्रों ने कहा है कि बीजेपी के पास कांग्रेस और एचडी कुमारस्वामी की जेडीएस से आने वाले विधायकों से निपटने की विशेष योजना है। भाजपा कर्नाटक का किला फतह करने के लिए अपने सामान्य चुनाव मॉडल से हटकर एक अलग राजनीति पर काम कर रही है।

अब हिंदी पट्टी और गुजरात का फॉर्मूला नहीं

अब हिंदी पट्टी और गुजरात का फॉर्मूला नहीं

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बारे में सूत्रों के हवाले आई रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि भाजपा मतदान के अलग तरीके को मान्यता दे रही है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने संकेत दिया कि कर्नाटक में भाजपा जिस तरह के फॉर्मूले पर चलेगी, इसे पार्टी के मानदंड से प्रस्थान के रूप में देखा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में हिंदी पट्टी और गुजरात में जो फॉर्मूला अपनाया जा रहा है, कर्नाटक में भाजपा इस फॉर्मूले पर नहीं चलेगी। दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद कर रही है। बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव मई में होने हैं।

किन नेताओं को टिकट मिलेगा

किन नेताओं को टिकट मिलेगा

चुनाव की तैयारियों के बारे में एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया, पार्टी अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों को मैदान में उतारेगी। इसका कारण ज्यादातर नेताओं के अपने वोट बैंक और समर्थन के समूह होना है। जीतने की संभावना वाले सभी नेताओं को टिकट दिया जाएगा, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों।

विधायकों के रिश्तेदारों का पत्ता साफ!

विधायकों के रिश्तेदारों का पत्ता साफ!

बता दें कि दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने हमेशा अपने मौजूदा विधायकों की छंटनी की है। नए चेहरों को नेतृत्व का मौका दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि बाद में, किसी भी सत्ता-विरोधी लहर से बचने के लिए मंत्रियों की एक नई टीम बनाई गई है। यह मांग की गई है कि कर्नाटक में भी यही मॉडल अपनाया जाए। कई नेताओं ने मांग की है कि विधायकों के रिश्तेदारों को भी टिकट न दिया जाए।

नेताओं के दल बदलने की आशंका

नेताओं के दल बदलने की आशंका

कर्नाटक चुनाव तैयारियों पर एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी के थिंक टैंक ने बताया है कि कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति गुजरात से अलग है। 120 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां नेता अपने निजी प्रभाव से चुनाव जीतते हैं। सूत्रों ने कहा कि अगर उन्हें टिकट नहीं दिया जाता है तो उन्हें दल बदलने में कोई झिझक नहीं होगी।

टिकट बंटवारे में येदियुरप्पा का रोल!

टिकट बंटवारे में येदियुरप्पा का रोल!

पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि 224 सदस्यीय सदन में अधिकतम छह या सात विधायकों के टिकट बदले जा सकते हैं। कुछ की उम्र 75 साल के करीब है तो कुछ की तबियत ठीक नहीं है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि ऐसे लोगों को टिकट से वंचित किया जा सकता है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में येदियुरप्पा की अहम भूमिका होगी।

गुजरात और हिमाचल के नतीजों से सहमी भाजपा

गुजरात और हिमाचल के नतीजों से सहमी भाजपा

रिपोर्ट और सियासी हालात के आकलन के अनुसार भाजपा के गुजरात चुनाव फार्मूले के कुछ गंभीर परिणाम भी हुए हैं। हाल के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात में 42 और हिमाचल प्रदेश में 11 मौजूदा विधायकों को छोड़ने के बाद, पार्टी को दोनों राज्यों में विद्रोह का सामना करना पड़ा। इसलिए कर्नाटक में भाजपा बेहद सतर्कता से रणनीति बना रही है।

भाजपा जेडीएस-कांग्रेस से कैसे निपटेगी

भाजपा जेडीएस-कांग्रेस से कैसे निपटेगी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 से पहले अन्य दलों से निपटने के लिए बीजेपी क्या करेगी? इस पर भी सूत्रों का कहना है कि ऐसे विधायक जो चैंलेज बन सकते हैं, इनसे निपटने के लिए भी बीजेपी के पास विस्तृत योजनाएं हैं। खासकर कांग्रेस और एचडी कुमारस्वामी की जनता दल सेक्युलर को पटखनी देने पर फोकस है। सूत्रों ने कहा कि दल बदलने वाले किसी भी व्यक्ति को उसकी वर्तमान सीटों से ही खड़ा किया जाएगा।

येदियुरप्पा-पीएम मोदी के अलावा किस फैक्टर पर फोकस

येदियुरप्पा-पीएम मोदी के अलावा किस फैक्टर पर फोकस

कर्नाटक में बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार अभी भी येदियुरप्पा ही होंगे। पूर्व सीएम और 81 वर्षीय इस वेटरन नेता के अलावा भाजपा सत्ता में वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में क्षेत्रीय नेताओं की व्यक्तिगत पकड़ पर निर्भर है। बीजेपी नेताओं ने जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करने का वादा किया है। 2024 के लोक सभा चुनावों के बाद भी पीएम मोदी पद पर बने रहें, इसका एक मकसद ये भी है।

शाह और नड्डा का कर्नाटक दौरा, वंशवाद से बीजेपी का संघर्ष

शाह और नड्डा का कर्नाटक दौरा, वंशवाद से बीजेपी का संघर्ष

भले ही पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन बैकग्राउंड में वे पूरी तरह सक्रिय रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह 23-24 मार्च को कर्नाटक में रहेंगे। सूत्रों ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी राज्य का दौरा करेंगे। येदियुरप्पा के छोटे बेटे बीवाई विजयेंद्र उनकी सीट शिकारीपुरा से चुनाव लड़ सकते हैं। यह भी रोचक है कि वंशवादी राजनीति के आरोपों को खारिज करने के लिए भाजपा अब तक विजयेंद्र को टिकट या पार्टी का कोई भी पद देने को तैयार नहीं रही है।

पीएम मोदी के दौरे और कर्नाटक के वोटर

पीएम मोदी के दौरे और कर्नाटक के वोटर

इस साल अब तक छह बार कर्नाटक का दौरा कर चुके पीएम मोदी के इस महीने में दो बार राज्य का दौरा करने की उम्मीद है। 25 मार्च को दावणगेरे में प्रधानमंत्री की एक बड़ी रैली होने की उम्मीद है। इसमें चार विजय संकल्प रैलियों का समापन होगा। उससे पहले 19 या 21 मार्च को सरकारी कार्यक्रमों को लेकर भी पीएम मोदी कर्नाटक दौरे पर आ सकते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+