Karnataka Election 2023: कैसे मतदान प्रतिशत से तय होगा चुनाव परिणाम? एक्सपर्ट से जानिए
कर्नाटक चुनाव में मतदान के प्रतिशत से चुनाव परिणाम पर असर पड़ने की संभावना रहेगी। ज्यादा मतदान एंटी-इंकंबेंसी की ओर भी इशारा करता है। लेकिन, एक्सपर्ट के मुताबिक इसका कोई प्रमाण नहीं है।

कर्नाटक में 10 मई या बुधवार को होने वाले मतदान का प्रतिशत चुनाव परिणाम में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। वैसे जितनी ज्यादा वोटिंग होती है, कई बार चुनाव परिमाम का अनुमान लगाने में उतनी ही मुश्किल हो सकती है। क्योंकि, जानकारों के मुताबिक सभी राजनीतिक पार्टियों को लेकर, खासकर बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस के प्रति मतदाताओं के बीच अपना-अपना खास आकर्षण बना हुआ है।

सभी दलों ने प्रचार में लगाया है पूरा जोर
न्यूइंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सभी राष्ट्रीय दलों के नेताओं ने कर्नाटक में जमकर प्रचार किया है। सत्ताधारी बीजेपी से करीब 100 नेताओं ने पार्टी के लिए वोट मांगे हैं, जिसकी अगुवाई खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है। वहीं कांग्रेस ने भी सोनिया गांधी समेत पार्टी के लगभग 50 बड़े नेताओं से प्रचार कराया है।

इस बार ज्यादा मतदान के आसार
वहीं जेडीएस ने भी पंचतंत्र कार्यक्रम के तहत वोटरों तक अपनी बात रखने की कोशिश की है, तो शहरी क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी ने भी चुनावी झाड़ू चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विशेषज्ञों की राय में इतने व्यापक चुनाव अभियानों को देखने के बाद लगता है कि इस बार बड़ी संख्या में मतदाता वोट डालने निकल सकते हैं।

2018 में हुई थी सबसे ज्यादा वोटिंग
अगर पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत के आंकड़े देखें तो 2013 में कर्नाटक चुनाव में 70.23% वोटिंग हुई थी। जबकि, 2018 में यह बढ़कर 72.13% हो गया। 1952 से लेकर तबतक कर्नाटक में इतनी वोटिंग कभी नहीं हुई थी। एक नेता की मानें तो यह मतदान प्रतिशत एंटी-इंकंबेंसी की वजह से मतदाताओं का मतदान स्थल तक पहुंचने की ओर इशारा करता है।
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'ज्यादा मतदान से विपक्ष को फायदा'
आंध्र प्रदेश के अमरावती निवासी श्रीनिवास ने पिछले कई दिनों से कर्नाटक में डेरा डाल रखा है। वह कांग्रेस समर्थक हैं। वह कहते हैं कि राजनीतिक पार्टियां वोटरों को पोलिंग बूथ तक लाती हैं। क्योंकि, ज्यादा मतदान से विपक्ष को फायदा होता है, क्योंकि एंटी-इंकंबेंसी बड़ा फैक्टर है।

ज्यादा मतदान पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
चुनाव विश्लेषक प्रोफेसर संदीप शास्त्री का कहना है कि कुल मतदान का चुनाव परिणाम पर निश्चित रूप से असर पड़ता है। लेकिन, यह निर्वाचन क्षेत्र और इलाके पर भी निर्भर करता है। जैसे पुराने मैसुरु, कल्याण कर्नाटक, तटवर्ती कर्नाटक, मुंबई-कर्नाटक और सेंट्रल कर्नाटक को ही ले लीजिए।
उनके मुताबिक, 'अगर एंटी-इंकंबेंसी है, मतदान का प्रतिशत ज्यादा होगा और इससे सत्ताधारी पार्टी को नुकसान हो सकता है। हालांकि, इसे साबित करने के लिए कोई प्रयोग से तय किया हुआ डेटा नहीं है।'
वैसे तथ्य यह भी है कि सभी राजनीतिक दल अपनी ओर से अधिक से अधिक वोटिंग करवाने की कोशिश करेंगे और इससे भी मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी स्वाभाविक है।

पिछले दो चुनावों के कैसे रहे परिणाम?
2013 में कांग्रेस को 224 में से 122, बीजेपी को 40 और जेडीएस को भी 40 सीटें मिली थीं। जबकि, 2018 में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिली थीं। कर्नाटक चुनाव में वोटों की गिनती का काम 13 मई यानि शनिवार को होगा और मतगणना शुरू होने के कुछ ही घंटो के अंदर राज्य की चुनावी स्थिति साफ हो जाने की उम्मीद है। (अंतिम दो तस्वीरें-फाइल)












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